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5 साल बाद भारत में दौड़ने लगेगी बुलेट ट्रेन, आपको मिलेंगी ये छह सुविधाएं

Wed, 13 Sep 2017 03:25 PM IST
amarujala.com- Written by: अनंत पालीवाल
amarujala.com- Written by: अनंत पालीवाल Updated Wed, 13 Sep 2017 03:25 PM IST
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after 5 years, india will finally gets its first bullet train, here are 6 points to take away
bullet train - फोटो : social media
देश की पहली बुलेट ट्रेन पांच साल बाद दौड़ने लगेगी। केंद्र सरकार ने अहमदाबाद-मुंबई के बीच बन रही इस रेलवे लाइन के शुरू होने की डेडलाइन भी तय कर दी है। रेल मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि 15 अगस्त 2022 को देश की पहली बुलेट ट्रेन को हरी झंडी दिखाई जाएगी। 2022 में देश आजादी की 75वीं वर्षगांठ मना रहा होगा। हम आपको बताने जा रहे हैं इस प्रोजेक्ट से जुड़ी छह अहम बातें, जिनका आम जनता से सीधा पाला पड़ेगा। 
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पढ़ें- अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेनः समुद्र के नीचे दौड़ेगी 7 किलोमीटर, दो घंटे में पूरी होगी 508KM दूरी
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फ्लाइट से सस्ता होगा किराया
रेलवे अधिकारियों की माने तो बुलेट ट्रेन का किराया एक फ्लाइट के किराये से काफी सस्ता होगा। इसका किराया राजधानी एक्सप्रेस के एसी टू टियर कोच के बराबर होगा। 
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शुरू में बैठ सकेंगे पूरी ट्रेन में 750 यात्री
जब पहली बुलेट ट्रेन शुरू होगी तो उसमें एक साथ 750 यात्री बैठ कर यात्रा कर सकेंगे। जापान की शिनकानसेन ई5 सीरिज बुलेट ट्रेन को इस प्रोजेक्ट के लिए तय किया गया है। इस ट्रेन में एग्जिक्यूटिव और इकोनॉमी कोच मिलाकर के 10 कोच हैं।

लेकिन रेलवे इसको भविष्य में 16 कोच का करेगा, जिससे 1250 यात्री इस ट्रेन से सफर कर सकेंगे। शुरुआत में 35 बुलेट ट्रेन को चलाया जाएगा, जिसको 2053 तक 105 ट्रेन चलाने की प्लानिंग है।

ट्रेन में होगीं ये खूबियां
ट्रेन में दिव्यांगों, बीमारी से ग्रसित लोगों और महिलाओं व बच्चों के लिए खास ध्यान रखा गया है। इस ट्रेन में जहां दिव्यांगों के लिए पूरी ट्रेन में दो टॉयलेट होंगे, वहीं बीमारी से ग्रसित लोगों के लिए अलग से जगह बनाई जाएगी।

इसी तरह महिलाओं के लिए अलग कक्ष होगा जहां पर अपने बच्चों को दूध पिला सकें। ट्रेन में दीवार पर माउंट किए गए टॉयलेट होंगे। ट्रेन के अंदर बच्चों के लिए भी अलग से टॉयलेट होगा। 

110 हजार करोड़ की लागत
इस प्रोजेक्ट पर 110 हजार करोड़ की लागत आएगी, जिसमें से 88 हजार करोड़ रुपये जापान सरकार की तरफ से लोन मिलेगा। इस लोन पर 0.1 फीसदी इंटरेस्ट लगेगा, जिसको 50 साल में रिपेमेंट करना होगा।

रिपेमेंट भी पूरा पैसा मिलने के 15 साल बाद शुरू होगा। इस हिसाब से देखा जाए तो प्रत्येक महीने केवल 7-8 करोड़ रुपये का खर्च केवल इंटरेस्ट चुकाने पर आएगा, जिससे रेलवे पर किसी तरह का कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। 


20 हजार लोगों को मिलेगी नौकरी
इस प्रोजेक्ट के कंस्ट्रक्शन फेज में ही कुल 20 हजार लोगों को नौकरी मिलेगी। जिन लोगों को नौकरी पर रखा जाएगा, उन्हें विशेष प्रकार की ट्रेनिंग दी जाएगी। इससे उनको प्रोजेक्ट को तैयार करने में काफी मदद मिलेगी। पूरे प्रोजेक्ट के लिए हाईस्पीड रेल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की स्थापना वडोदरा में खोला जाएगा। 

मुंबई में अंडरग्राउंड बाकी एलिवेटिड होगा ट्रैक
पूरे 508 किमी के रूट में केवल मुंबई शहर और समुद्र में 7 किलोमीटर के हिस्से को छोड़कर पूरा ट्रैक एलिवेटिड होगा। यह ट्रैक गुजरात के साबरमती से शुरू होकर के मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्पलेक्स पर खत्म होगा। 
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