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दुनिया के पहले उपन्यास का लापता हस्तलिखित हिस्सा मिला, यह सैकड़ों साल पुराना

Sat, 12 Oct 2019 10:29 AM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Sat, 12 Oct 2019 10:29 AM IST
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Worlds first Novel The Tale of Genji Lost Chapter Found In Japanese Storeroom
द टेल ऑफ जेंजी - फोटो : Mainichi Japan

उपन्यास और साहित्य लेखन का इतिहास बहुत पुराना है। दुनिया के बहुत से उपन्यास सदियों पहले लिखे गए थे और वर्तमान में सिर्फ उनकी प्रतियां ही उपलब्ध हैं। ज्यादातर उपन्यासों का प्रथम हस्तलिखित संस्करण या तो विलुप्त हो चुका है या फिर लापता है। ऐसे ही विश्व का पहला उपन्यास माने जाने वाले 'द टेल ऑफ जेंजी' का एक लापता हस्तलिखित हिस्सा मिला है। 

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जानकारों के मुताबिक, यह उपन्यास का पांचवां हिस्सा है। उपन्यास का यह लापता हिस्सा टोक्यो में मिला है। यहां रहने वाले मोटोफुयु ओकाची के घर के रेस्टरूम से उपन्यास का यह हिस्सा प्राप्त किया गया। 
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द टेल ऑफ जेंजी नाम के इस उपन्यास को मुरासाकी शिकिबु नाम की महिला ने 10वीं सदी में लिखा था। उपन्यास मिकवा-योशिदा डोमेन वंश के जापानी सम्राट के बेटे जेंजी के जीवन पर आधारित है। कुल 54 अध्याय वाले इस उपन्यास को 10वीं से 11वीं सदी के बीच लिखा गया था और इसमें जेंजी के युद्ध कौशल, राजनीतिक और रोमांटिक जीवन का उल्लेख है। 
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यह उपन्यास जिस व्यक्ति के स्टोररूम से मिला है, उनके परिवार का संबंध मिकवा-योशिदा डोमेन वंश से बताया जाता है। इस उपन्यास के सबसे पुराने संस्करण को कवि फुजिवारा टीका ने दोबारा लिखा था और वर्ष 1241 में उनकी मृत्यु हो गई थी। शोधकर्ताओं के अनुसार, उपन्यास के 54 अध्यायों में से चार का ही टीका द्वारा दोबारा लिखा जाना सिद्ध है। अब यह बात सामने आई है कि यह पांचवां हिस्सा भी फुजिवारा टीका द्वारा ही दोबारा लिखा गया है।

उपन्यास में जेंजी और हियान कोर्ट की एक महिला के बीच प्रेम की कहानी का भी उल्लेख है। हाल ही में मिले पांचवें अध्याय में प्रेमिका से पत्नी बनने के बाद मुरासाकी द्वारा धोखे से जेंजी की हत्या की कहानी भी सामने आई है।

रेइजेइक शिगुरुटी बुंको, जिन्होंने जापानी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण संस्थान की नींव रखी, उन्होंने माना कि उपलब्ध उपन्यास की प्रति का हिस्सा भी कवि फुजिवारा टीका ने ही लिखा है। उन्होंने कहा कि इस उपन्यास का अधिकांश हिस्सा दूसरी प्रतियों से मिलता है, लेकिन इनमें व्याकरण का अंतर जरूर है।

जुंको यामामोतो, जो कि क्योटो विश्वविद्यालय की प्रोफेसर हैं, उन्होंने बताया कि द टेल ऑफ जेंजी पर बहुत पहले से शोध होते रहे हैं। यह जेंजी के वजूद में होने के 250 साल बाद लिखी और संपादित की गई थी। उन्होंने आगे बताया कि टीका द्वारा दोबारा लिखी गई और संपादित की गई पांडुलिपी भी शोध के लिए उपलब्ध है। 

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