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NASA Mars: नासा के रोवर ने भेजी मंगल ग्रह की ऐसी फोटो, देखकर हैरत में पड़े वैज्ञानिक

Thu, 14 Aug 2025 10:13 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: धर्मेंद्र सिंह Updated Thu, 14 Aug 2025 10:13 PM IST
सार

NASA Mars: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के पर्सिवरेंस रोवर ने मंगल ग्रह की ऐसी तस्वीर भेजी है, जिसने लोगों को हैरत में डाल दिया है। इस फोटो को देखकर आप धोखा खा सकते हैं।

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What would Mars look like under an Earth-like blue sky? NASA's Perseverance rover just showed us
नासा के रोवर ने भेजी मंगल ग्रह की ऐसी फोटो, देखकर हैरत में पड़े वैज्ञानिक - फोटो : NASA/JPL

विस्तार

NASA Mars: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के पर्सिवरेंस रोवर ने मंगल ग्रह की ऐसी तस्वीर भेजी है, जिसने लोगों को हैरत में डाल दिया है। इस फोटो को देखकर आप धोखा खा सकते हैं। नासा के पर्सिवरेंस रोवर की भेजी हुई यह 360 डिग्री पैनोरामा फोटो है, जिसमें  मंगल का नजारा बिल्कुल धरती के रेगिस्तानी इलाकों जैसा दिख रहा है। 

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सिर्फ थोड़े से कलर कॉन्ट्रास्ट एडजस्टमेंट की वजब से मंगल ग्रह के आसमान में हल्की सी नीली झलक दिख रही है। इसकी वजह से यह फोटो पहली नजर में लग रही है जैसे आप धरती के अटाकामा डेजर्ट में खड़े हों।
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नासा के प्लैनेटरी साइंटिस्ट जिम बेल ने बताया कि इस तस्वीर में डस्ट-फ्री आसमान ने आसपास के इलाके को साफ दिखने का मौका दिया। कलर एन्हांसमेंट से टेरेन और स्काई के बीच का फर्क और साफ दिख रहा है। दरअसल, मंगल का आसमान सिर्फ सूर्यास्त के समय ही नीला नजर आता है। फिर भी यह फोटो उसे धरती की तरह दिखाती है।
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नासा के वैज्ञानिक काफी लंबे समय से चिली के अटाकामा डेजर्ट में रोवर्स की टेस्टिंग कर रहे हैं। यह बेहद सूखा और बंजर क्षेत्र है, लेकिन यहां पर जीवन के अति सूक्ष्म अंश पाए गए हैं।  2023 में Astrobiology जर्नल में एक स्टडी प्रकाशित हुई थी, जिसके मुताबिक, यह जीवन के सबसे कठिन परिस्थितियों में मौजूद रहने के सबूत हैं। यही वजह है कि भविष्य के रोवर्स को मंगल मिशनों के लिए यहां टेस्ट किया जाता है। 

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लेकिन तस्वीरों में समानता हैरान करने वाली है, लेकिन हकीकत उलट है। मंगल सूरज से चौथा ग्रह है और उसे धरती के मुकाबले आधा से भी कम सूर्य का प्रकाश मिल पाता है। इसकी वायुमंडलीय मात्रा धरती के वातावरण का सिर्फ एक फीसदी है। ऐसे यह जांच करना बाकी है कि क्या मंगल पर प्राचीन जीवन के अवशेष इस कठिन माहौल में टिके रह सकते हैं। शायद इसका जवाब पर्सिवरेंस रोवर की खोज से मिलेगा। 

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