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नेताजी सुभाष चंद्र बोस की वो शादी, जिसका पता किसी को नहीं चला, पत्नी को प्यार से बुलाते थे बाघिनी

Thu, 23 Jan 2020 01:11 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Thu, 23 Jan 2020 01:11 PM IST
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The unique love story of Netaji Subhash Chandra Bose and his wife Emilie Schenkl
नेताजी सुभाष चंद्र बोस और उनकी पत्नी एमिली शेंकल - फोटो : Social media

ये 1934 का साल था। सुभाष चंद्र बोस उस वक्त ऑस्ट्रिया की राजधानी विएना में थे। उस वक्त तक उनकी पहचान कांग्रेस के योद्धा के तौर पर होने लगी थी। सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान जेल में बंद सुभाष चंद्र बोस की तबीयत फरवरी, 1932 में खराब होने लगी थी। इसके बाद ब्रिटिश सरकार उनको इलाज के लिए यूरोप भेजने पर मान गई थी, हालांकि इलाज का खर्च उनके परिवार को ही उठाना था। विएना में इलाज कराने के साथ ही उन्होंने तय किया कि वे यूरोप रह रहे भारतीय छात्रों को आजादी की लड़ाई के लिए एकजुट करेंगे। इसी दौरान उन्हें एक यूरोपीय प्रकाशक ने 'द इंडियन स्ट्रगल' किताब लिखने का काम सौंपा, जिसके बाद उन्हें एक सहयोगी की जरूरत महसूस हुई, जिसे अंग्रेजी के साथ-साथ टाइपिंग भी आती हो। 



The unique love story of Netaji Subhash Chandra Bose and his wife Emilie Schenkl
नेताजी सुभाष चंद्र बोस - फोटो : Social media

बोस के दोस्त डॉ. माथुर ने उन्हें दो लोगों का रिफरेंस दिया। बोस ने दोनों के बारे में मिली जानकारी के आधार पर बेहतर उम्मीदवार को बुलाया, लेकिन इंटरव्यू के दौरान वे उससे संतुष्ट नहीं हुए। तब दूसरे उम्मीदवार को बुलाया गया। ये दूसरी उम्मीदवार थीं, 23 साल की एमिली शेंकल। बोस ने इस खूबसूरत ऑस्ट्रियाई युवती को जॉब दे दी। एमिली ने जून, 1934 से सुभाष चंद्र बोस के साथ काम करना शुरू कर दिया। 1934 में सुभाष चंद्र बोस 37 साल के थे और इस मुलाकात से पहले उनका सारा ध्यान अपने देश को अंग्रेजों से आज़ाद करने पर था, लेकिन सुभाष चंद्र बोस को अंदाजा भी नहीं था कि एमिली उनके जीवन में नया तूफान लेकर आ चुकी हैं। 

The unique love story of Netaji Subhash Chandra Bose and his wife Emilie Schenkl
नेताजी सुभाष चंद्र बोस - फोटो : Social media

सुभाष चंद्र बोस के बड़े भाई शरत चंद्र बोस के पोते सुगत बोस ने सुभाष चंद्र बोस के जीवन पर 'हिज मैजेस्टी अपोनेंट- सुभाष चंद्र बोस एंड इंडियाज स्ट्रगल अगेंस्ट एंपायर' किताब लिखी है। इसमें उन्होंने लिखा है कि एमिली से मुलाकात के बाद सुभाष के जीवन में नाटकीय परिवर्तन आया। सुगत बोस के मुताबिक इससे पहले सुभाष चंद्र बोस को प्रेम और शादी के कई ऑफर मिले थे, लेकिन उन्होंने किसी में दिलचस्पी नहीं ली थी। लेकिन एमिली की खूबसूरती ने सुभाष पर मानो जादू सा कर दिया। सुगत बोस ने अपनी पुस्तक में एमिली के हवाले से लिखा है, 'प्यार की पहल सुभाष चंद्र बोस की ओर से हुई थी और धीरे धीरे हमारे रिश्ते रोमांटिक होते गए। 1934 के मध्य से लेकर मार्च 1936 के बीच ऑस्ट्रिया और चेकेस्लोवाकिया में रहने के दौरान हमारे रिश्ते मधुर होते गए।' 

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The unique love story of Netaji Subhash Chandra Bose and his wife Emilie Schenkl
नेताजी सुभाष चंद्र बोस और उनकी पत्नी एमिली शेंकल - फोटो : Social media

26 जनवरी, 1910 को ऑस्ट्रिया के एक कैथोलिक परिवार में जन्मी एमिली के पिता को ये पसंद नहीं था कि उनकी बेटी किसी भारतीय के यहां काम करे लेकिन जब वे लोग सुभाष चंद्र बोस से मिले तो उनके व्यक्तित्व के कायल हुए बिना नहीं रहे। जाने माने अकादमिक विद्वान रुद्रांशु मुखर्जी ने सुभाष चंद्र बोस और जवाहर लाल नेहरू की जीवन को तुलनात्मक रूप से पेश करते हुए एक पुस्तक लिखी है- नेहरू एंड बोस, पैरलल लाइव्स। पेंगुइन इंडिया से प्रकाशित इस पुस्तक में एक चैप्टर है, 'टू वूमेन एंड टू बुक्स'। इसमें बोस और नेहरू के जीवन पर उनकी पत्नियों की भूमिका को रेखांकित किया गया है। मुखर्जी ने इसमें लिखा है, 'सुभाष और एमिली ने शुरूआत से ही स्वीकर कर लिया था कि उनका रिश्ता बेहद अलग और मुश्किल रहने वाला है। एक-दूसरे को लिखे खतों में दोनों एक दूसरे के लिए जिस संबोधन का इस्तेमाल करते हैं, उससे ये जाहिर होता है। एमिली उन्हें मिस्टर बोस लिखती हैं, जबकि बोस उन्हें मिस शेंकल या पर्ल शेंकल।' 

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नेताजी सुभाष चंद्र बोस - फोटो : Social media

ये हकीकत है कि पहचान छुपा कर रहने की बाध्यता और सैनिक संघर्ष में यूरोपीय देशों से मदद मांगने के लिए भाग दौड़ करने के चलते सुभाष अपने प्यार भरे रिश्ते लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतते होंगे। लेकिन एमिली को लेकर उनके अंदर कैसा भाव था, इसे उस पत्र से समझा जा सकता है, जिसे आप सुभाष चंद्र बोस का लिखा लव लेटर कह सकते हैं।

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