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तनाव को कम करने के लिए म्यूजिक सुनते हैं पेड़ पौधे, होता है ये खास असर, जानिए इनसे जुड़ी दिलचस्प बातें

Mon, 19 May 2025 06:39 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: धर्मेंद्र सिंह Updated Mon, 19 May 2025 06:39 PM IST
सार

Zara Hatke: तनाव को कम करने के लिए इंसान संगीत सुनते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि तनाव को कम करने के लिए पेड़-पौधे भी संगीत सुनते हैं? जी हां तनाव को कम करने के लिए पेड़ पौधे भी संगीत सुनते हैं।

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तनाव को कम करने के लिए म्यूजिक सुनते हैं पेड़ पौधे - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

संगीत एक ऐसी चीज है, जिसे सुनने से मन को शांति मिलती है। संगीत सुनने से कई शारीरिक और मानसिक लाभ होते हैं। यह तनाव को कम करने, चिंता और अवसाद के लक्षणों को भी कम करता है। साथ ही मूड को बेहतर बनाने और याददाश्त को तेज करने में भी मददगात साबित होता है। तनाव को कम करने के लिए इंसान संगीत सुनते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि तनाव को कम करने के लिए पेड़-पौधे भी संगीत सुनते हैं? जी हां तनाव को कम करने के लिए पेड़ पौधे भी संगीत सुनते हैं। यह जानकर आपको यकीन नहीं हो रहा होगा, लेकिन यह बिल्कुल सच है।

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गांव जंक्शन ने मध्य प्रदेश के सागर के रहने वाले किसान आकाश चौरसिया से बातचीत की है। इसमें उन्होंने पेड़ पौधे के संगीत सुनने को लेकर कई चौंकाने वाली बातें बताई हैं, जिसके बारे में जानकर आप हैरान हो जाएंगे। आकाश चौरसिया ने एक अनोखा प्रयोग किया है। उन्होंने पेड़ पौधों को संगीत सुनाकर उत्पादकता बढ़ाई है। उनका दावा है कि फसल की हर स्टेज पर अलग-अलग संगीत सुनाने से पौधों का तनाव कम होता है और उत्पादन 15-20 फीसदी तक बढ़ जाता है। 
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गांव जंक्शन ने आकाश चौरसिया से पूछा कि पेड़ पौधों को म्यूजकि सुनाने का कितना लाभ होता है और आपने यह कहां से जाना कि यह होना चाहिए? जवाब में आकाश ने बताया कि यह हमने महसूस किया, क्योंकि हमारे जीवन में भी तनाव होता है। जब हम बहुत ज्यादा काम करते हैं और हमारे मन में गलत विचार आते हैं, तो इससे तनाव होता है। तनाव के दौरान हमें किसी शांत जगह पर बैठना या कोई पसंद का गाना सुनना अच्छा लगता है, वहीं हमने पेड़ पौधों में भी महसूस की। पेड़ पौधे भी ध्वनि प्रदूषण और वायु प्रदूषण से काफी तनाव में हैं। इससे इनका विकास जितना होनी चाहिए, वो नहीं हो पाता है। उसके लिए हमने एक प्रयोग किया। 
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उन्होंने कहा कि प्रकृति के सिस्टम में पहले जैसे भौरे थे और उनकी गुनगुनाहट थी, वो फसलों का मनोरंजन करती थी। भौरों की गुनगुनाहट एक तरह से म्यूजिक का काम करती थी, तो हमने सोचा कि गुनगुनाहट को आर्टिफिशियल तरीके से सुनाकर क्या पैदावर बढ़ा सकते हैं? फिर हमने गानों पर और अलग-अलग समय पर पेड़ों की उम्र पर गानों को सुनाने का प्रयोग किया। हमने सात से आठ साल तक प्रयोग किए। फसलों के लिए उपयुक्त पांच से छह गानों पर हमने प्रयोग किए। इन गानों को सुनाने से फैसलों में 15 से 25 प्रतिशत तक उत्पादकता में वृद्धि हुई है। 


उन्होंने बताया कि वह सुबह पांच बजे से लेकर सात बजे तक और शाम छह बजे से लेकर आठ बजे तक पेड़ों को म्यजूकि थैरेपी देते हैं। उन्होंने बताया कि पेड़ और पौधों को दो से तीन घंटे गाने सुनाते हैं। उन्होंने आगे कहा कि इससे जो विकास 25 दिन में होनी चाहिए वो 17 से 18 दिन में ही मिल जाती है। साथ ही उससे कम से कम 15 से 25 प्रतिशत ज्यादा फसलों की पैदावार होती है। 

आप नीचे दिए गए वीडियो में गांव जंक्शन की आकाश चौरसिया से पूरी बातचीत देख सकते हैं। इसमें उन्होंने कई दिलचस्प बातें बताई हैं।

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