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Viral News: तेलंगाना की सोसाइटी में छिपे बैठे थे 7000 से ज्यादा सांप, रेस्क्यू करने वालों के भी छूट गए पसीने

Fri, 18 Jul 2025 11:05 AM IST
दीक्षा पाठक फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: दीक्षा पाठक Updated Fri, 18 Jul 2025 11:05 AM IST
सार

Viral News: कोबरा की यह प्रजाति आमतौर पर जून से सितंबर के बीच अंडे देती है। सोसायटी के आंकड़ों के अनुसार जनवरी से जून के बीच 5,954 सांप रेस्क्यू किए गए, जिनमें से 2,970 से अधिक चश्मे वाले कोबरा थे। इसके अलावा, 1 जून से 16 जुलाई तक 1,134 और सांपों को सुरक्षित निकाला गया।

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More than 7000 snakes were hiding in a society in Telangana even the rescuers had a tough time in Viral News
रिहायशी इलाके में छिपे बैठे थे 7000 कोबरा सांप - फोटो : एक्स

विस्तार

मानसून के आते ही सांप अपने बिलों से बाहर निकलने लगते हैं, और तेलंगाना इन दिनों इसी वजह से चर्चा में है। यहां बड़ी संख्या में सांप दिखाई दे रहे हैं, जिसे देखते हुए ‘फ्रेंड्स ऑफ स्नेक्स सोसायटी’ के वॉलंटियर्स लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में लगे हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि इनकी टीम को एक-एक सांप को पकड़ने में पसीना आ रहा है। अब तक संस्था ने 7,088 चश्मे वाले कोबरा सांपों को बचाया है। तो आज की इस खबर में हम आपको इसी घटना के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं।

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सोशल मीडिया पर वायरल हुई यह घटना
कोबरा की यह प्रजाति आमतौर पर जून से सितंबर के बीच अंडे देती है। सोसायटी के आंकड़ों के अनुसार जनवरी से जून के बीच 5,954 सांप रेस्क्यू किए गए, जिनमें से 2,970 से अधिक चश्मे वाले कोबरा थे। इसके अलावा, 1 जून से 16 जुलाई तक 1,134 और सांपों को सुरक्षित निकाला गया। पिछले सप्ताह ‘फ्रेंड्स ऑफ स्नेक्स सोसायटी’ के स्वयंसेवक आदित्य श्रीनाथ ने जगद्गिरिगुट्टा क्षेत्र में 23 छोटे सांपों और एक चश्मे वाले कोबरा को एक घर की दीवार और फर्श के बीच बनी दरार से बाहर निकालने में 12 घंटे से अधिक समय लगाया। ये सांप कंक्रीट की उस दरार से भीतर-बाहर जा रहे थे। श्रीनाथ ने बताया कि यह जमीन अंदर से खोखली थी और अंडे देने के लिए स्थान बन गई थी। उन्होंने रात 7 बजे रेस्क्यू शुरू किया और सुबह 3 बजे तक 19 सांपों को बचाया। अगली सुबह लौटकर उन्होंने बाकी पांच सांपों को भी बाहर निकाला।
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बारिश होने से पहले ही मिले सांप
उस्मानिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर चेल्मेला श्रीनिवासुलु ने बताया कि चश्मे वाले कोबरा का प्रजनन काल जनवरी से अप्रैल होता है। ये आम तौर पर मार्च से जुलाई के बीच अंडे देते हैं और इसकी अवधि 45 से 70 दिन तक रहती है। उन्होंने यह भी बताया कि अगस्त का महीना इनके अंडे देने के लिए सबसे उपयुक्त समय होता है। हालांकि, मानसून की शुरुआत हो चुकी है पर भारी बारिश अभी नहीं हुई है। इस पर सोसायटी के महासचिव अविनाश विश्वनाथम का कहना है कि कम बारिश के कारण सांपों की एक्टिविटी ज्यादा नजर आ रही है। इस विषय में कलिंगा फाउंडेशन के संस्थापक ट्रस्टी पी. गौरी शंकर का कहना है कि मानसून में सिर्फ सांप ही नहीं, बल्कि मेंढक, टोड, चूहे और अन्य कीट भी बड़ी संख्या में अंडे देते हैं। इससे सांपों को भोजन अधिक मात्रा में मिल जाता है, जिससे वे ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं और लोगों को बार-बार नजर आने लगते हैं।

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