भारत के ऐसे मंदिर जहां पर भगवान की प्रतिमा को पसीना आने की हैं मान्यता
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दुनिया रहस्यों से भरी पड़ी है। जिनके बारे जानने के लिए लोगों के मन में हमेशा जिज्ञासा बनी रहती है। कई रहस्यों पर से पर्दा उठ जाता है तो वहीं कई ऐसे रहस्य हैं जिनके रहस्य केवल रहस्य ही बने हुए हैं। भारत में भी कई ऐसी जगह हैं जो अपने आप में हमेशा से रहस्मय रही हैं। इनमें से बहुत सारी जगह लोगों की आस्था से जुड़ी हुई हैं। भारत के कई मंदिर है जिनके साथ कई रहस्य जुड़े हुए हैं। इन मंदिरों को लेकर बहुत सारी अजब-गजब मान्यताएं हैं जिनके बारे में जानकर आप हैरान हो जाएंगे। भारत में ऐसे ही कुछ मंदिर में जिनको लेकर मान्यता है कि यहां पर भगवान कि प्रतिमा को पसीना आता है। जानते हैं इन मंदिरों के बारे में...
मध्यप्रदेश का मां काली मंदिर
मध्यप्रदेश के जबलपुर में स्थित मां काली के मंदिर को लेकर भी लोगों में मान्यता है कि यहां पर माता की प्रतिमा को पसीना आता है। मान्यता के अनुसार माता को गर्मी बर्दाश्त नहीं होती हैं जिसके कारण उन्हें पसीना आता है इसलिए मंदिर में हमेशा एसी चलाई जाती है। जबलपुर में स्थित इस मंदिर की भव्य प्रतिमा को 600 साल पुराना माना जाता है। इसे गोंडवाना साम्राज्य के दौरान स्थापित किया गया था। जिसके बाद से यहां पर ये मान्यता प्रचलित है।
हिमाचल प्रदेश में भलेई माता के मंदिर में भारी संख्या में भक्त दर्शन करने आते हैं नवरात्रि के दिन में तो यहां भक्तों का तांता लगा रहता है। इस मंदिर को लेकर लोगों में एक अजब मान्यता है कि यहां पर देवी की मूर्ति को पसीना आता है। माना जाता है कि जिस समय माता को पसीना आता है उस समय वहां उपस्थित भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। मंदिर में पूजा करने वाले पुजारियों का इस बारे में कहना है कि माता की मूर्ति इसी गांव में प्रकट हुई थी। जिसके बाद यहां पर मंदिर का निर्माण करवाया गया।
तमिलनाडु में भगवान कार्तिकेय मुरुगा के सिक्क्कल सिंगारवेलावर मंदिर को लेकर भी लोगों में मान्यता है कि यहां पर भगवान की प्रतिमा को पसीना आता है। यहां पर हर वर्ष अक्टूबर से नबंवर के बीच एक पर्व का आयोजन होता है। इस दौरान वहां पर भगवान सुब्रमण्य की पत्थर की मूर्ति से पसीना टपकता है और त्योहार की समाप्ति होते-होते पसीना भी कम होने लगता है। इस पर्व को लेकर मान्यता है कि इसे सुरापदमन नाम के राक्षस पर भगवान सब्रमण्य की विजय के रुप में मनाया जाता है। भगवान को आने वाले पसीने के लिए लोकप्रचलित है कि यह पसीना राक्षस को मारने के लिए उत्सुकता से इंतजार करते हुए भगवान सुब्रमण्य के क्रोध का प्रतीक है। इस पसीने का श्रद्धालुओं के ऊपर छिड़काव भी किया जाता है।