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Viral News: लड़की को चला प्रेगनेंसी का पता और 20 घंटे बाद ही दे दिया बच्चे को जन्म, जानें क्या है कहानी?
Mon, 14 Jul 2025 05:02 PM IST
दीक्षा पाठक
फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Published by: दीक्षा पाठक
Updated Mon, 14 Jul 2025 05:02 PM IST
सार
Viral News: इस स्थिति को डॉक्टरों ने "क्रिप्टिक प्रेग्नेंसी" का नाम दिया है। इसमें महिला को गर्भ के कोई नॉर्मल लक्षण नजर नहीं आते। न पेट में सूजन होती है, न मॉर्निंग सिकनेस होती है और कई बार तो पीरियड्स जैसी ब्लीडिंग भी जारी रहती है। इसी कारण ज्यादातर मामलों में महिलाएं खुद भी नहीं जान पातीं कि वे गर्भवती हैं।
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महिला ने दिया बच्चे को जन्म
- फोटो : freepik.com
विस्तार
चार्लोट समर्स की जिंदगी एक पल में बदल गई और वो भी ऐसे कि किसी को अंदाजा तक नहीं था। ऑस्ट्रेलिया की रहने वाली 20 वर्षीय चार्लोट एक दिन सिर्फ डॉक्टर से ग्लूटेन सेंसिटिविटी की जांच कराने गई थीं। लेकिन अगले ही दिन वो एक नवजात बच्चे की मां बन चुकी थीं। हैरान करने वाली बात ये थी कि चार्लोट को खुद भी नहीं पता था कि वो गर्भवती हैं। जब इस बात का खुलासा हुआ, तब तक वो गर्भावस्था के 38 हफ्ते और 4 दिन पूरे कर चुकी थीं। तो आज की इस खबर में हम आपको इसी घटना के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं।
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सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
इस स्थिति को डॉक्टरों ने "क्रिप्टिक प्रेग्नेंसी" का नाम दिया है। इसमें महिला को गर्भ के कोई नॉर्मल लक्षण नजर नहीं आते। न पेट में सूजन होती है, न मॉर्निंग सिकनेस होती है और कई बार तो पीरियड्स जैसी ब्लीडिंग भी जारी रहती है। इसी कारण ज्यादातर मामलों में महिलाएं खुद भी नहीं जान पातीं कि वे गर्भवती हैं। चार्लोट ने बताया कि उन्हें लगा कि शायद रिलेशनशिप में आने के बाद और तनाव के चलते उनका वजन थोड़ा बढ़ गया है। उनकी जींस टाइट होने लगी थी, लेकिन उन्होंने इस बदलाव को गंभीरता से नहीं लिया। वो अब भी नॉर्मल कपड़े पहन रही थीं और बर्थ कंट्रोल पिल्स लेना भी जारी था।
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नहीं हुआ कोई प्रेग्नेंसी के कोई लक्षण
6 जून को जब उन्होंने एक मेडिकल चेकअप के दौरान प्रेग्नेंसी टेस्ट कराया तो रिजल्ट पॉजिटिव आया। शुरुआत में डॉक्टरों को लगा कि ये शुरुआती प्रेगनेंसी हो सकती है। लेकिन जब उसी दिन उनके बॉयफ्रेंड के परिवार की पहल पर अल्ट्रासाउंड कराया गया तो सच्चाई सामने आई। चार्लोट डिलीवरी के बेहद करीब थीं। जैसे ही ये जानकारी मिली, डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया। अल्ट्रासाउंड में पाया गया कि बच्चे के चारों ओर एमनियोटिक फ्लूइड नहीं था, जो गर्भ में शिशु की सुरक्षा के लिए जरूरी होता है। इसलिए लेबर प्रक्रिया शुरू की गई और केवल सात मिनट में चार्लोट ने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया।
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चार्लोट ने सुनाया अनुभव
चार्लोट ने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा, "सब कुछ इतनी तेजी से हुआ कि मुझे कुछ समझ ही नहीं आया। मैं बेहोश हो गई थी और जब होश आया, तब मेरा बेटा मेरी गोद में था।" यह इस बात का प्रमाण है कि महिला का शरीर कई बार संकेतों को छुपा सकता है। चार्लोट का अनुभव न केवल एक अलग घटना है, बल्कि वह सभी महिलाओं के लिए एक चेतावनी भी है कि शरीर के बदलावों को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए।