Frank Kameny: गूगल ने डूडल बनाकर फ्रैंक कैमिनी को दी श्रद्धांजलि, समलैंगिक अधिकारों के लिए सबसे पहले उठाई थी आवाज
फ्रैंक कैमिनी को समलैंगिक होने के कारण नौकरी से निकाल दिया गया था। आर्मी से निकलने के बाद उन्होंने फिजिक्स में ग्रेजुएशन किया और उसके बाद हार्वर्ड विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
गूगल ने आज डूडल बनाकर अमेरिकी खगोलशास्त्री, द्वितीय विश्व युद्ध के दिग्गज और समलैंगिक अधिकारों के लिए पहली बार आवाज उठाने वाले डॉक्टर फ्रैंक कैमिनी को याद किया है। जून महीने की शुरुआत में ही उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है और विश्व स्तर पर इसे ‘एलजीबीटी प्राइड मंथ’ के रूप में मनाया जाता है। गूगल ने अपने होमपेज पर एक डूडल बनाया है, जिसमें कैमिनी को एक रंगीन माला पहने हुए दिखाया गया है। फ्रैंक कैमिनी को गूगल ने अमेरिकी समलैंगिक अधिकारों के प्रमुख के रूप में दिखाया है।
फ्रैंक कैमिनी का जन्म 21 मई, 1925 को क्वींस, न्यूयॉर्क में हुआ था। 15 साल की उम्र में कैमिनी ने फिजिक्स पढ़ने के लिए क्वीन्स कॉलेज में दाखिला लिया। फ्रैंक कैमिनी ने अपने जीवनकाल में एक खगोलशास्त्री और समलैंगिक अधिकार कार्यकर्ता के रूप में काम किया।
नौकरी से निकाल दिए जाने के कारण कैमिनी ने सरकार पर मुकदमा दायर किया और साल 1961 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में पहली समलैंगिक अधिकार अपील दायर की। इसके बाद उन्होंने व्हाइट हाउस और पेंटागन के बाहर कई बार विरोध प्रदर्शन किया।
फ्रैंक कैमिनी ने पहला समलैंगिक अधिकार वकालत समूह तैयार किया और समलैंगिकता को मानसिक परेशानी बताने वाले अमेरिकी साइकेट्रिक एसोसिएशन को खुलकर चुनौती दी। इसका असर ये हुआ कि साल 1975 में सिविल सर्विस कमीशन ने समलैंगिक कर्मचारियों पर लगे प्रतिबंध को हटा लिया।
फ्रैंक कैमिनी को समलैंगिक अधिकारों का अगुवा कहा जाता है। समलैंगिक होने के कारण नौकरी से बर्खास्त किए जाने के 50 साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद कैमिनी से अमेरिकी सरकार ने औपचारिक रूप से माफी मांगी।