Zara Hatke: मरने के बाद भी ये सैनिक आज भी निभा रहा है सरहद पर अपनी ड्यूटी, दुश्मन भी डर से कांपते हैं
Viral Video: हरभजन सिंह को लेकर यह विश्वास है कि वे आज भी सीमा की निगरानी कर रहे हैं और चीन की किसी भी साजिश के बारे में पहले ही इशारा कर देते हैं। इतना ही नहीं, चीनी सैनिक भी बाबा हरभजन की आत्मा से डरते हैं और उनकी मौजूदगी को महसूस करते हैं।
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हमारे देश के सैनिक चौबीसों घंटे सीमाओं की रक्षा में लगे रहते हैं। लेकिन क्या आप उस सैनिक के बारे में जानते हैं, जिसकी वीरता और देशभक्ति इतनी गहरी है कि शहीद होने के 49 साल बाद भी वह देश की सेवा कर रहा है? यह कहानी है हरभजन सिंह की, जो आज भी सिक्किम बॉर्डर पर “ड्यूटी” कर रहे हैं। हरभजन सिंह को सेना के जवान बाबा हरभजन के नाम से जानते हैं। सिक्किम की सीमा पर उनका एक मंदिर बना हुआ है, जिसे सैनिक पवित्र स्थल मानते हैं। वे वहां दर्शन करने जाते हैं और मंदिर की देखभाल भी करते हैं। तो आज की इस खबर में हम आपको इसी सैनिक से जुड़ा एक वीडियो साझा करने जा रहे हैं। आइए जानते हैं।
चीन के सैनिक भी मानते हैं उनकी आत्मा की शक्ति
हरभजन सिंह को लेकर यह विश्वास है कि वे आज भी सीमा की निगरानी कर रहे हैं और चीन की किसी भी साजिश के बारे में पहले ही इशारा कर देते हैं। इतना ही नहीं, चीनी सैनिक भी बाबा हरभजन की आत्मा से डरते हैं और उनकी मौजूदगी को महसूस करते हैं। जब भारत और चीन के बीच कोई बैठक होती है तो उसमें एक कुर्सी बाबा हरभजन के लिए भी खाली रखी जाती है। सेना के लिए वे आज भी एक सक्रिय सिपाही हैं।
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ड्यूटी पर तैनात रहने वाले ‘अमर’ सैनिक
बाबा हरभजन सिंह को सेना की ओर से एक सैनिक का दर्जा मिला हुआ है। उन्हें नियमित वेतन भी दिया जाता है और सेना में उनकी एक रैंक भी है। कुछ समय पहले तक हर साल उन्हें छुट्टी पर उनके गांव पंजाब भेजा जाता था। वहां उनके लिए टिकट बुक किया जाता और उनका सामान भेजा जाता था। लेकिन बाद में कुछ लोगों की आपत्ति के चलते यह परंपरा रोक दी गई। अब बाबा साल के 12 महीने सिक्किम बॉर्डर पर ड्यूटी निभाते हैं
मंदिर में बना है उनका निजी कमरा
बाबा हरभजन सिंह के मंदिर में एक कमरा है, जिसे रोजाना साफ किया जाता है। वहां उनकी वर्दी और जूते रखे जाते हैं। सैनिकों का कहना है कि रोजाना सफाई के बावजूद जूतों में कीचड़ और बिस्तर की चादर पर सिलवटें मिलती हैं, जैसे बाबा हर दिन वहां आते हों।
कौन थे बाबा हरभजन सिंह?
हरभजन सिंह का जन्म 30 अगस्त 1946 को गुजरावाला में हुआ था। वे भारतीय सेना में मात्र दो वर्षों तक ही अपनी सेवाएं दे सके। एक दिन वह खच्चर पर सवार होकर एक नदी पार कर रहे थे, तभी तेज बहाव में बह गए। दो दिन तक तलाश की गई, लेकिन उनका शव नहीं मिला। फिर एक साथी सैनिक को सपना आया जिसमें बाबा ने शव की जगह बताई। जब सैनिक वहां पहुंचे तो सचमुच उनका शव मिल गया। इसके बाद जहां उनका बंकर था, वहां मंदिर बना दिया गया।
आज भी सेना में जिंदा है उनकी आस्था
बाबा हरभजन सिंह की यह कहानी आज भी भारतीय सेना के बीच एक मिसाल है। सैनिक उन्हें न केवल सम्मान देते हैं, बल्कि विश्वास करते हैं कि वे आज भी सरहद की रक्षा कर रहे हैं। स्वतंत्रता दिवस जैसे अवसरों पर बाबा हरभजन सिंह का जिक्र श्रद्धा और गर्व के साथ किया जाता है। एक ऐसे सैनिक के रूप में, जो मरने के बाद भी देश की सेवा में समर्पित है।