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Egypt Lost City: मिल गया मिस्र का हजारों साल पहले खोया शहर, पुरातत्वविदों ने किया चौंकाने वाला खुलासा
Mon, 17 Aug 2026 04:11 PM IST
धर्मेंद्र कुमार सिंह
फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Published by: धर्मेंद्र कुमार सिंह
Updated Mon, 17 Aug 2026 04:11 PM IST
सार
Egypt Lost City: पुरातत्वविदों ने मिस्र के खोए हुए शहर मसन को खोज लिया है। यह खोज वैज्ञानिकों की बड़ी कामयाबी मानी जा रही है।
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मिल गया मिस्र का हजारों साल पहले खोया शहर
- फोटो : AI
विस्तार
Egypt Lost City: पुरातत्वविदों ने मिस्र के खोए हुए शहर मसन को खोजने का दावा किया है। उन्होंने यह दावा हाल ही में की गई एक खोज के आधार पर किया है। मसन मिस्र का एक प्राचीन शहर था, जिसका उल्लेख 3,000 साल से पहले के लेखों में मिलता है। लंबे समय से इस स्थान का पता नहीं चल पा रहा था। पुरातत्वविदों ने अब स्वेज नहर के पास बलुआ पत्थर (सैंडस्टोन) के शिलालेख की खोज की है, जिसने तकरीबन 140 साल पुरानी चल रही बहस में एक नया सबूत जोड़ दिया है। इस खोज से यह संभावना बढ़ गई है कि टेल अबू सेफी ही प्राचीन समय में मसन था।
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एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मिस्र की एक पुरातत्व टीम ने इस्माइलिया प्रांत में स्वेज नहर के पास कंतारा ईस्ट में टेल अबू सेफू में एक शिलालेख खोजा है,जिस पर मसन लिखा हुआ है। बलुआ पत्थर के दरवाजे के ऊपर लगने वाली बीम (लिंटेल) के एक बड़े टुकड़े पर खोदा गया है। यह पत्थर दो टुकड़ों में बंटा हुआ है और तीन तरफ खुदा है, जिस पर रामसेस द्वितीय की शाही उपाधियां लिखी हैं। मिस्र के एक प्रसिद्ध पुरातत्वविद् और मिस्र की सुप्रीम काउंसिल ऑफ एंटीक्विटीज के महासचिव हिशम अल-लेथी का कहना है कि इस खोज गए शिलालेख से टेल अबू सेफी को मसन से जोड़ने वाले पुरातत्व और ऐतिहासिक दावे को मजबूती मिली है। हालांकि, इसकी पुष्टि के लिए अभी और खुदाई और अध्ययन की जरूरत है।
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1887 से बना है सवाल
वर्ष 1887 से यह सवाल जारी है जब टेल अबू सेफी में कुछ पत्थर मिले थे जिन पर रामसेस द्वितीय का नाम और मेसेन के होरस का जिक्र था। जेम्स हॉफमेयर और स्टीफन मोशियर की 2013 की एक अध्ययन में जानकारी सामने आई कि पहले की खुदाई में रामसेस द्वितीय के समय वहां लोगों के रहने के कोई सबूत नहीं मिले थे। खोजे गए पत्थर शायद पास के टेल हेबुआ से लाए गए थे। इसे अब जारू के तौर पर जाना जाता है।
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पर्यटन और पुरावशेष मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि हाल ही में खोजे गए शिलालेख टेल अबू सेफी वाली थ्योरी में नए सबूत को जोड़ते हैं। इस पहचान की पुष्टि होती है कि मसन को होरस मिलिट्री रोड पर स्थित माना जाएगा, जो मिस्र से सिनाई और प्राचीन कनान तक जाने वाला मुख्य सैन्य और व्यापारिक मार्ग था। इस खोज से पुरातत्वविदों को यह समझने में मदद मिलेगी कि देश की पूर्वी सीमा की सुरक्षा और प्रशासन कैसे होता था।
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रामसेस द्वितीय कौन थे?
फराओ का राजा रामसेस द्वितीय था जिसका 13वीं सदी ईसा पूर्व में 60 वर्ष तक मिस्र पर शासन था। इस लेख में होरस की मूर्ति के मरम्मत यानी जीर्णोद्धार का जिक्र है। होरस प्राचीन मिस्र के देवता थे, जिन्हें मसन शहर का स्वामी कहा जाता था। मिस्र के पर्यटन और पुरावशेष मंत्रालय ने शनिवार को इस खोज का एलान किया।
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खुदाई से बदल गया नजरिया
इस नई खुदाई से इस परे स्थान को समझने का नजरिया बदल गया है। पहले माना जाता था कि मिट्टी की ईंटों से बनी दीवार मंदिर का हिस्सा है। पुरातत्वविद् मानते हैं कि यह दीवार पूरे मंदिर परिसर को घेरी थी, जिसे कई बार बढ़ाय दिया गया था। टीम को किलेबंद इलाके के बाहर से मंदिर की तरफ जाने वाली दो पत्थर की सड़कें भी खोजी गई हैं। टॉलेमिक राजवंश के राज में पहली सड़क बनी थी, जबकि मिस्र के रोमन नियंत्रण में दूसरी संकरी सड़क बनी। पुरातत्वविदों ने परिसर में उत्तर की तरफ सामान रखने के कमरे, तो वहीं दक्षिण की तरफ बड़े सर्विस रूम और मंदिर के सबसे पवित्र गर्भगृह के अवशेषों की पहचान की।
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खोज में मिली हजारो साल पुरानी मूर्तियां
इस जगह से खोजी गई चीजों में 2,500 साल पुरानी मूर्ति भी शामिल है। इसमें एक छोटा मंदिर पकड़े हुए सैन्य अधिकारी को दिखाया गया है। पुरातत्वविदों ने एक और मूर्ति खोजी थी, जिसका सिर और पैर नहीं था। इसके साथ ही एक राजा का बेसाल्ट पत्थर का धड़ और बेसाल्ट- चूना पत्थर से बनी बाज की मूर्तियों के टुकड़े खोज गए हैं। अभी खुदाई होगी, क्योंकि पुरातत्वविद् टेल अबू सेफी ही मसन था के सबूत तलाश रहे हैं।