आज जब डॉक्टर शैलजा वल्लभनेनी उस दिन के बारे में सोचती हैं तो वो यकीन नहीं कर पातीं। उन्होंने अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करते हुए जमीन से हजारों फीट ऊपर उड़ते विमान में बच्चे की डिलीवरी करवाई है। डिलीवरी करवाने के लिए उन्हें उस वक्त विमान में केवल कैंची, सैनिटाइजर, पट्टी ही मिल पाई थी। शायद ये भारत का पहला बच्चा है, जिसने अपनी आंखें आसमान में खोली हैं।
जब जमीन से हजारों फीट ऊपर फ्लाइट में हुई बच्चे की डिलीवरी, यात्रा कर रही डॉक्टर ने की मदद
बेंगलुरु के कलाउड नाइन अस्पताल में भ्रूण चिकित्सा विशेषज्ञ डॉक्टर शैलजा वल्लभनेनी ने बीबीसी हिंदी को बताया, "मुझे अब भी इस बात पर यकीन नहीं होता कि मैं वाकई में ऐसा कर पाई।"
दो दिन पहले दिल्ली से बेंगलुरु आने वाली एक उड़ान में उन्होंने एक बच्चे की डिलीवरी करवाई है। वो आश्चर्य जताती हैं कि उड़ान के दौरान इस तरह की आपात स्थिति में तकनीकी रूप से डॉक्टर की मदद करने के लिए कोई खास व्यवस्था नहीं थी। वो कहती हैं, विमानों में इस तरह के मौकों के लिए खास बेसिक प्रेग्नेंसी किट रखा जाना चाहिए। बेसिक प्रेग्नेंसी किट ये प्राथमिक चिकित्सा किट यानी फर्स्ट एड किट से अलग होता है।
उड़ान के दौरान क्या हुआ था?
दिल्ली से उड़ान के टेक-ऑफ करने के आधे घंटे बाद विमान में एक डॉक्टर की जरूरत के बारे में घोषणा की गई। रियाद में पलास्टिक सर्जन के तौर पर काम करने वाले डॉक्टर नागराज मदद के लिए आगे आए। डॉक्टर शैलजा कहती हैं, "मैं विमान के पीछे की तरफ ये सोच कर गई कि शायद उन्हें मदद चाहिए। मुझे विमान चालक दल ने बताया कि एक 7.5 महीने की गर्भवती एक महिला को मदद चाहिए।"
पहले तो डॉक्टर शैलजा को लगा कि ये गर्भपात का मामला हो सकता है। क्योंकि महिला पेट में दर्द की भी शिकायत कर रही थी। लेकिन जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें स्पॉटिंग यानी वजाइना से खून की बूंदे आ रही हैं, तो उन्होंने इससे इनकार किया। डॉक्टर शैलजा कहती हैं, "जब मैंने महिला के पेट की तरफ देखा तो ऐसा लगा कि वो 32 या 34 सप्ताह की गर्भवती हैं। उन्होंने मुझसे कहा कि उन्होंने मल त्याग किया है। जब वो बाथरूम से निकलीं तो मैंने वहां खून के धब्बे देखे।"
इसके बाद डॉक्टर शैलजा महला के पास बाथरूम गईं, जहां उन्होंने देखा कि बच्चे का सिर थोड़ा-सा बाहर आ गया है। वो कहती हैं, "मैंने कैंची ली और उसे सैनिटाइजर से स्टेरिलाइज किया, इसके बाद मैंने बच्चे का नाल काटी और उसे ढकने के लिए पट्टी का इस्तेमाल किया। इसके बाद दूसरे यात्रियों ने जो कपड़े मदद के लिए आगे बढ़ाए थे उसकी मदद से हमने बच्चे को साफ किया और सुनिश्चित किया बच्चा ठीक है।"
डॉक्टर बताती हैं कि "इसके बाद हमने महिला को यूटेरस मसाज (गर्भाशय की मालिश) की। ये अच्छी बात हुई कि उस वक्त विमान में दो इंजेक्शन उपलब्ध थे हमने उनका इस्तेमाल किया। महिला का गर्भाशय संकुचित होने लगा था और खून का रिसाव भी बंद हो गया था। मां ने बच्चे को गोद में लेकर उसे दूध पिलाया, जिससे गर्भाशय के संकुचित होने में और थोड़ी मदद हुई।"
डॉक्टर शैलजा बताती हैं कि विमान के पायलट कैप्टन संजय मिश्रा पहले भारतीय वायुसेना में काम कर चुके थे। उन्होंने पूछा कि मदद के लिए क्या वो विमान को हैदराबाद में उतार सकते हैं। लेकिन मैंने उनसे कहा कि इसकी जरूरत अब नहीं थी क्योंकि बच्चा और मां दोनों सामान्य थे।"