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Research: इस वजह से 20 वर्षों में हुई 5 लाख लोगों की मौत, शोध में चौंकाने वाला खुलासा, वैज्ञानिकों की चेतावनी

Mon, 01 Sep 2025 04:26 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: धर्मेंद्र सिंह Updated Mon, 01 Sep 2025 04:26 PM IST
सार

New Research: नेचर क्लाइमेट चेंज पत्रिका में यह शोध प्रकाशित हुआ है। ब्राजील, घाना और ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने मिलकर यह शोध किया है। जंगलों की कटाई से स्थानीय तापमान में वृद्धि होती है, जिससे वैश्विक जलवायु परिवर्तन के साथ अतिरिक्त खतरा पैदा होता है।

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Deforestation has killed half a million people in past 20 years study finds
इस वजह से 20 वर्षों में हुई 5 लाख लोगों की मौत, शोध में चौंकाने वाला खुलासा - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

New Research: जंगलों के कटने का असर सिर्फ पर्यावरण पर नहीं पड़ता है, बल्कि इंसानों को भी प्रभावित करता है। जंगलों के कटने से इंसानों के लिए खतरा पैदा हो रहा है। इसको लेकर एक नई अंतरराष्ट्रीय रिसर्च में डराने वाला खुलासा हुआ है। इसके मुताबिक, बीते 20 वर्षों (2001-2020) में उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में जंगलों की कटाई के कारण करीब पांच लाख से अधिक लोगों की गर्मी से जुड़ी बीमारियों की वजह से मौत हुई है। 

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नेचर क्लाइमेट चेंज पत्रिका में यह शोध प्रकाशित हुआ है। ब्राजील, घाना और ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने मिलकर यह शोध किया है। जंगलों की कटाई से स्थानीय तापमान में वृद्धि होती है, जिससे वैश्विक जलवायु परिवर्तन के साथ अतिरिक्त खतरा पैदा होता है। शोधकर्ताओं ने ब्राजील के माटो ग्रोसो इलाके का उदाहरण दिया है। उन्होंने बताया कि वहां पर सोया की खेती के लिए बड़ पैमाने पर जंगल की कटाई हो रही है। किसान की तरफ से अमेजन में और भूमि काटने की मांग की जा रही है। 
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जंगलों की कटाई से खतरा

जगल को धरती का फेफड़े कहा जाता है, क्योंकि वो कार्बन डाइऑक्साइड सोखते हैं, ऑक्सीजन देते हैं और मौसम का संतुलन बनाकर रखते हैं। लेकिन अगर बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई होती है, तो यह संतुलन बिगड़ता है। जंगलों के काटने से छाया घटती है और नमी कम होती है। बारिश में कमी होती और आग लगने का खतरा बढ़ जाता है। स्थानीय तापमान तेजी से बढ़ता है, जो इंसानों के लिए खतरनाक है। यह गर्मी वैश्विक जलवायु परिवर्तन के अलावा अतिरिक्त है।  जंगलों के बिना क्षेत्र का तापमान ती डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है। 
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शोधकर्ताओं की तरफ से इस शोध के लिए सैटेलाइट डेटा और मौसम रिकॉर्ड्स का इस्तेमाल किया गया है। वैज्ञानिकों ने काटे गए जंगलों वाले इलाकों में बढ़े तापमान को को बिना कटाई वाले इलाकों से तुलना की। गैर-दुर्घटना मौतों (जैसे हार्ट अटैक, स्ट्रोक) के आंकड़ों को भी शामिल किया गया है। 

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जहां जंगल कटे, वहां पर मौतें अधिक

शोध के मुताबिक, जिन जगहों पर जंगलों की कटाई हुई है, वहां का तापमान बढ़ा है और मौतें ज्यादा हुई हैं। ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स के प्रोफेसर डोमिनिक स्प्रैकलन ने बताया कि लोगों को जंगलों की कटाई मार रही है। उनका कहना है कि यह वैश्विक जलवायु बहस से परे स्थानीय लोगों की जिंदगी का मुद्दा है। 

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