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Ajab-Gajab: 78 साल की उम्र में 3 किमी पैदल चलकर पढ़ने स्कूल जाते हैं बुजुर्ग, बेहद प्रेरक है कहानी
Thu, 03 Aug 2023 06:35 PM IST
धर्मेंद्र सिंह
फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Published by: धर्मेंद्र सिंह
Updated Thu, 03 Aug 2023 06:35 PM IST
सार
लालरिंगथारा की कहानी लोगों को प्रेरणा दे रही है। ह्रुआइकोन गांव में राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (आरएमएसए) हाई स्कूल में कक्षा 9 में प्रवेश लिया है।
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78 years old man got admission in 9th class walks 3 km to go to school
- फोटो : Twitter@mizozeitgeist
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विस्तार
Ajab-Gajab: पढ़ने और सीखने की कोई उम्र नहीं होती है। इंसान किसी भी उम्र में पढ़ाई कर सकता है। इन दिनों एक ऐसा ही मामला सामने आया है। मिजोरम के एक 78 साल के बुजुर्ग ने स्कूली शिक्षा को पूरी करने में उम्र को बाधा नहीं बनने दिया। इस बुजुर्ग शख्स का नाम लालरिंगथारा है। वह तीन किलोमीटर की दूरी तय कर स्कूल पहुंचते हैं। सबसे खास बात यह है कि वह स्कूल यूनिफॉर्म पहनकर और किताबों से भरा बैग लेकर स्कूल जाते हैं।
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लालरिंगथारा मिजोरम के चम्फाई जिले के खुआंगलेंग गांव के रहने वाले हैं। लालरिंगथारा की कहानी लोगों को प्रेरणा दे रही है। ह्रुआइकोन गांव में राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (आरएमएसए) हाई स्कूल में कक्षा 9 में प्रवेश लिया है। खुआंगलेंग गांव भारत-म्यांमार सीमा के पास स्थित है।
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1945 में जन्में लालरिंगथारा को पिता की मौत होने पर कक्षा 2 के बाद पढ़ाई को छोड़ना पड़ा था। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, वह अपने माता-पिता की अकेली संतान थे, जिसकी वजह उन्हें कम उम्र में खेतों में अपनी मां की मदद करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
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वह अपनी आजीविका कमाने के लिए स्थानीय प्रेस्बिटेरियन चर्च में गार्ड के तौर पर काम कर रहे हैं। गरीबी की वजह से उनका स्कूली करियर के कई साल बर्बाद हो गए। अंग्रेजी कौशल में सुधार के लिए फिर स्कूल वापस गए। उनकी पढ़ाई का मुख्य लक्ष्य अंग्रेजी में प्राथना पत्र लिखने और टेलीविजन समाचार रिपोर्टों को समझने में सक्षम होना है। लालरिंगथारा मिजो भाषा में पढ़ और लिख सकते हैं।
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मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, लालरिंगथारा को मिजो भाषा पढ़ने और लिखने में कोई समस्या नहीं है, लेकिन अंग्रेजी भाषा सीखने की वजह से उनकी शिक्षा की इच्छा बढ़ी है। उनका कहना है कि साहित्य में कुछ अंग्रेजी के शब्द होते हैं, जिससे वह भ्रमित हो जाते हैं। इसलिए उन्होंने अंग्रेजी भाषा में ज्ञान को बढ़ाने के लिए वापस स्कूल जाने का फैसला किया।
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न्यू ह्रुआइकॉन मिडिल स्कूल के प्रभारी प्रधानाध्यापक वनलालकिमा के मुताबिक, लालरिंगथारा छात्रों और शिक्षकों दोनों के लिए समान रूप से एक प्रेरणा और चुनौती है।