Lalu Yadav: क्या लालू यादव बने रहेंगे राजद अध्यक्ष? संगठनात्मक चुनाव से पहले अटकलें तेज
हमेशा पार्टी के शीर्ष पद के लिए निर्विरोध चुने गए लालू प्रसाद वर्तमान में राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में लगातार 11वां कार्यकाल पूरा कर रहे हैं।
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राष्ट्रीय जनता दल संगठनात्मक चुनावों के लिए कमर कस रहा है, जिसका समापन अक्टूबर में राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के साथ होगा। चुनाव ऐसे वक्त पर होगा जब इसके संस्थापक लालू प्रसाद को लेकर अनिश्चितताएं हैं और जो पार्टी के अस्तित्व में आने के बाद से शीर्ष पद पर काबिज हैं। पार्टी द्वारा अपने राज्य मुख्यालय पर जारी कार्यक्रम के अनुसार बूथ, पंचायत, ब्लॉक और जिला स्तर पर इकाइयों के लिए चुनाव 16 अगस्त से शुरू होकर 6 सितंबर तक चलेगा। 21 सितंबर को प्रदेश अध्यक्षों और सदस्यों के लिए चुनाव होंगे। राष्ट्रीय अध्यक्ष के सबसे महत्वपूर्ण चुनाव के लिए 11 अक्टूबर को दिल्ली में परिषद की बैठक होगी।
1997 में जनता दल को विभाजित कर राजद का गठन
लालू प्रसाद जो कंधे की चोट से उबर रहे हैं और जिनके विदेश में गुर्दा प्रत्यारोपण की उम्मीद है, उन्होंने 1997 में जनता दल को विभाजित करते हुए राजद का गठन किया था। हमेशा पार्टी के शीर्ष पद के लिए निर्विरोध चुने गए लालू प्रसाद वर्तमान में राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में लगातार 11वां कार्यकाल पूरा कर रहे हैं। आखिरी बार वह 2019 में निर्वाचित हुए थे, चारा घोटाले में सजा होने के कारण वह जेल में थे। पिछले कुछ समय से अटकलों का बाजार गर्म है कि क्या बीमार लालू पद छोड़ने पर विचार करेंगे। पार्टी कार्यकर्ताओं ने लालू प्रसाद के छोटे बेटे और उत्तराधिकारी तेजस्वी यादव को अपने वास्तविक नेता के रूप में स्वीकार कर लिया है।
इस युवा नेता का कद तब से बढ़ गया जब उन्होंने 2020 के विधानसभा चुनावों में पार्टी को शानदार प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया, जिसमें राजद सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी, हालांकि बहुमत के आंकड़े से काफी पीछे रह गई थी। विपक्ष के नेता तेजस्वी का उत्थान एक पीढ़ीगत बदलाव का संकेत देगा, जिसके संकेत उच्च जातियों और महिलाओं को अधिक हिस्सा दिए जाने जैसे कदमों में दिखाई दे रहे हैं।
'सहयोग' के मौके पर भाजपा की मीडिया से बातचीत बंद
बिहार में भाजपा ने गुरुवार को पुष्टि की कि उसने 'सहयोग' के मौके पर मीडिया से बातचीत बंद कर दी है। राज्य मुख्यालय में सप्ताह में छह दिन होने वाले सहयोग कार्यक्रम में पार्टी के मंत्री शामिल होते हैं। हालांकि, राज्य भाजपा के उपाध्यक्ष राजीव रंजन ने मीडिया के एक वर्ग में इन अटकलों को खारिज कर दिया कि यह कदम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जद (यू) को शांत करने के उद्देश्य लिया गया।
रंजन ने कहा कि बंद आदेश का कोई सवाल ही नहीं है। प्रवक्ता मीडिया के सवालों के जवाब देने और पार्टी लाइन के अनुसार बयान देने के लिए हैं। इसके अलावा मंत्री जब भी सुविधाजनक लगे, कहीं भी बोलना जारी रख सकते हैं। राज्य भाजपा उपाध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि सहयोग में मीडिया को प्रतिबंधित करने का निर्णय, जो बाइट की तलाश में पत्रकारों के बीच लोकप्रिय था, तार्किक है।