फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bihar ›   Why Bihar polls become a question of credibility

क्यों साख का सवाल बन गया बिहार चुनाव?

Fri, 26 Jun 2015 12:51 PM IST
Updated Fri, 26 Jun 2015 12:51 PM IST
विज्ञापन
Why Bihar polls  become a question of credibility

बिहार चुनावी मोड में आ गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त के सितंबर-अक्तूबर में चुनाव की संभावना जताने से पहले वह भूकंप की चर्चा और चिंता कर रहा था। राजनीतिक रूप से सबसे सचेत और सामाजिक समूहों की गोलबंदी में आगे बिहार का तेज़ी से चुनाव के रंग में रंगना स्वाभाविक है।

विज्ञापन


1857 के विद्रोह के बाद से राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों का केंद्र रहे बिहार का अपना तो काफ़ी कुछ दांव पर है। इस बार देश की राजनीति का आगे का रास्ता भी काफी कुछ बिहार चुनाव के नतीजों पर निर्भर करेगा।
विज्ञापन


तेज़ और बेहतर विकास का सवाल, 25 साल से जारी पिछड़ापन और सेक्युलर सरकार का सवाल, नीतीश कुमार बनाम बड़े मोदी या छोटे मोदी या फिर किसी और नेता का सवाल, लालू-नीतीश जैसों के राजनीतिक भविष्य का सवाल भी इस चुनाव से जुड़ा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

राजनीति

Why Bihar polls  become a question of credibility

अगर लालूजी ज़हर पीने की बात खुलकर करते हैं तो लोकसभा चुनाव के बाद नीतीश ने, ख़ुद लालू यादव ने या राज्य सरकार के गिरने से लेकर जदयू के बिखरने जैसे कई बड़े दावे करके पिटे सुशील मोदी समेत अन्य भाजपा नेताओं ने क्या-क्या ज़हर पीया है यह हिसाब भी लगाना चाहिए।

अब बिहार चुनाव के बाद कौन-कौन ज़हर का घूंट पीएगा। यह कहने का अभी कोई मतलब नहीं है। लेकिन लालू-नीतीश की जोड़ी अगर मिलकर नहीं लड़ी या उसने हिंदुओं का ध्रुवीकरण कराने वाला कोई ग़लत कदम उठाया तो इस बार इन दोनों का राजनीतिक नेतृत्व दांव पर है।

संभव है दूसरा पक्ष इन्हें ज़्यादा मुसलमानपरस्त बताने और हिंदुओं को गोलबंद करने का प्रयास भी करे। हालांकि बिहार की राजनीति में सांप्रदायिकता का खेल कम ही चला है। इस बार मुसलमान समाज इसी गठबंधन के पीछे होगा।

भाजपा की दुविधा

Why Bihar polls  become a question of credibility

दूसरी ओर अगर भाजपा ने किसी अगड़े को नेता प्रोजेक्ट करने का इशारा भी किया तो पिछड़ा गोलबंदी में देर नहीं लगेगी। भले ही उसके पास दलित और पिछड़ा समर्थन दिखता है। लेकिन इन समाजों के सारे नेता सहयोगी दलों के हैं या पार्टी में हाशिये पर रहे हैं।

अगर बिहार में लालू-नीतीश की जोड़ी जमती है तो कल को देश भर में अपना अहं छोड़कर ज़हर पीने यानी भाजपा विरोधी गठबंधन करने वाले नेताओं की लाइन लग जाएगी। उत्तर प्रदेश मेँ मायावती और मुलायम मिलें न मिलें।

लेकिन इन दोनों में कांग्रेस से गठजोड़ करने के लिए उसी तरह की होड़ लगेगी जैसी बिहार में जदयू और राजद ने लगाई थी। वैसे ग़ैर कांग्रेसवाद की तरह गैर भाजपावाद या सेक्युलरवाद की राजनीति अब भी परिभाषित नहीं है, लेकिन यह प्रवृत्ति तेज़ हो जाएगी।

मोदी की साख

Why Bihar polls  become a question of credibility

बिहार चुनाव का इससे बड़ा मतलब देश, भाजपा और नरेंद्र मोदी-अमित शाह की जोड़ी की आगे की राजनीति के लिए है। अगर दिल्ली में पिटने के बाद मोदी को बिहार से बड़ी जीत मिलती है तो अभी अरुण शौरी से लेकर आडवाणी तक की आलोचना वाला क्रम एकदम रुक जाएगा। फिर कोई वसुंधरा जैसा भी बागी तेवर नहीं अपना सकेगा।

सरकार, संगठन और देश की राजनीति में मोदी-शाह की डुगडुगी बजेगी। शायद मई 2014 से भी ज़्यादा ज़ोर से। और अगर बिहार ने उल्टा परिणाम दिया तो यह क्रम उलटेगा। मोदी की तो नहीं, लेकिन अमित शाह की गद्दी मुश्किल में पड़ेगी। मोदी की आलोचना के स्वर तेज़ होंगे।

नरेंद्र मोदी के नाम पर चुनाव लड़ने का मतलब ये कि हार-जीत भी उनके ही नाम होगी। लोकसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन को विधानसभा की 184 सीटों पर बढ़त मिली थी लेकिन भाजपा तो राज्य की 100 सीटों पर भी ढंग के उम्मीदवार नहीं दे पाती थी।

माना जाता है कि पिछली बार तो भाजपा के कई उम्मीदवार नीतीश ने तय किए थे मोदी के जादू ने ही उसे इस स्थिति तक पहुंचाया है, तो वह उनके नाम पर ही चुनाव लड़े यह उचित है। लेकिन जब उनके नाम पर चुनाव लड़ेंगे तो परिणाम भी उनके भविष्य से जुड़ेंगे। ज़ाहिर है तब बिहार का चुनाव प्रादेशिक कैसे रह जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed