बेटे का शव लेने को पिता को देना पड़ा जिंदा होने का सबूत
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बिहार में एक व्यक्ति को अपने जिंदा होने का हलफनामा देने का मामला सामने आया है। घटना सूबे के पश्चिम चंपारण जिले की है। छपरा जिले के लालबाबू सिंह उर्फ हरिहर सहनी को अपने जीवित होने के संबंध में तब हलफनामा देना पड़ा जब वे अपने मृत बेटे का शव लाने सोमवार को बेतिया पहुंचे।
इस संबंध में पश्चिम चंपारण के ज़िलाधिकारी लोकेश कुमार सिंह ने बताया, "विचाराधीन कैदी रमेश कुमार की इलाज के दौरान मौत हो गई और पते में कैदी के पिता के मृत होने की बात दर्ज थी। इस कारण ऐसी स्थिति पैदा हुई।"
दरअसल रविवार 11 जनवरी को बगहा जेल में बंद रमेश कुमार की इलाज के दौरान बेतिया स्थित सदर अस्पताल में मौत हो गई थी। सूचना पाकर रमेश के पिता लालबाबू सिंह अपने परिजनों के साथ अपने बेटे का शव लेने पहुंचे।
लेकिन जेल, पुलिस और अस्पताल के अधिकारियों ने लालबाबू सिंह को यह कहते हुए शव सौंपने से इंकार कर दिया कि मृतक के दस्तावेज में उनके पिता की पहले ही मौत हो चुकी है। ऐसे में लालबाबू सिंह द्वारा अलग-अलग दस्तावेजों में अपने जीवित होने के संबंध में हलफनामा दिए जाने के बाद उन्हें शव सौंपा गया।
अब होगी जांच
लालबाबू के हलफनामे को उनके एक भतीजे के द्वारा प्रमाणित भी कराया गया जो कि शव लेने उनके साथ आए थे। मृतक कैदी मूल रूप से बिहार के छपरा जिले के बसरिया गांव का रहने वाले थे।
वे नक्सली गतिविधियों में शामिल होने के आरोपों में जेल में बंद थे। पश्चिम चंपारण के ज़िलाधिकारी के अनुसार, इस बात की जांच कराई जाएगी कि मृत कैदी के पिता के बारे में गलत जानकारी रिकॉर्ड में कैसे दर्ज हुई।