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Hindi News ›   Bihar ›   Valentine Day 90 years old man living life with wife ashes for 32 years

Valentine's Day: 90 साल का बुजुर्ग 32 साल से पत्नी की मौत के बाद उसके अस्थि कलश के साथ गुजार रहा जिंदगी

Tue, 15 Feb 2022 02:44 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पूर्णिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पूर्णिया Published by: देव कश्यप Updated Tue, 15 Feb 2022 02:44 AM IST
सार

32 साल से अपनी पत्नी के अस्थि कलश के साथ रह रहे भोला नाथ आलोक ने अपने परिवार के सदस्यों से अनुरोध किया है कि जब उनकी मृत्यु हो जाए तो उनके पार्थिव शरीर के साथ पत्नी के अस्थि कलश का अंतिम संस्कार कर दें।

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Valentine Day 90 years old man living life with wife ashes for 32 years
अस्थि कलश (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पूरी दुनिया ने 14 फरवरी को वैलेंटाइन डे (Valentine's Day) मनाया। इसी बीच बिहार के एक जिले में 90 वर्षीय व्यक्ति का अपनी पत्नी के प्रति अटूट प्रेम लोगों के दिल जीत रहा है।

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बिहार के सीमांचल जिले पूर्णिया में एक 90 वर्षीय व्यक्ति अपनी पत्नी की मृत्यु के 32 साल बाद भी उसके प्रति अटूट प्रेम से लोगों का दिल जीत रहे हैं। 32 साल से अपनी पत्नी के अस्थि कलश के साथ रह रहे भोला नाथ आलोक ने अपने परिवार के सदस्यों से अनुरोध किया है कि जब उनकी मृत्यु हो जाए तो उनके पार्थिव शरीर के साथ उनके अस्थि कलश का अंतिम संस्कार कर दें।
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पूर्णिया के सिपाही टोला इलाके में रहने वाले भोला नाथ आलोक ने घर के परिसर के अंदर एक आम के पेड़ से अस्थि कलश को लटका कर रखा है। भोलानाथ आलोक पर किताब लिखने वाले पूर्णिया के साहित्यकार राम नरेश भक्त ने कहा कि वह सच्चे प्यार के प्रतीक हैं, जो आजकल कम ही देखने को मिलते हैं। दरअसल, आलोक की पत्नी पद्मा रानी का 32 साल पहले निधन हो गया था। उन्होंने उनके कलश को संरक्षित किया और उनके सम्मान में एक आम के पेड़ से लटका दिया। वह उन्हें याद करने के लिए हर दिन गुलाब चढ़ाते हैं और प्रार्थना करते हैं।

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राम नरेश भक्त के मुताबिक, "वह अपनी पत्नी से बहुत प्यार करते थे, जब वह जीवित थीं और उसकी मृत्यु के बाद भी उन्हें अकेला नहीं छोड़ना चाहते थे। 32 साल एक लंबा समय होता है, लेकिन वह उन्हें हर रोज याद करते हैं, उनका सम्मान करते हैं और अपना सच्चा प्यार दिखाते हुए उनकी प्रार्थना और फूल चढ़ाते हैं।"



भक्त ने कहा, "उन्होंने मृत्यु के बाद दाह संस्कार के दौरान पत्नी के अस्थि कलश को अपने सीने पर रखने की इच्छा भी व्यक्त की है। पति-पत्नी के लिए ऐसा सम्मान इन दिनों कम ही देखा जाता है। मुझे पिछले कई वर्षों में ऐसा कोई उदाहरण याद नहीं है।"

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