यूसीसी पर NDA एकजुट नहीं: आखिर चिराग ने क्यों कहा कि ड्राफ्ट देखे बिना फैसला जल्दबाजी होगी, जानिए पूरी बात
समान नागरिक संहिता को लेकर एनडीए में अब अलग-अलग राय सामने आने लगी है। गृह मंत्री अमित शाह के 2029 से पहले 21 राज्यों में यूसीसी लागू करने के ऐलान के बाद केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने बड़ा बयान दिया है। आखिर चिराग ने क्यों कहा कि ड्राफ्ट देखे बिना फैसला जल्दबाजी होगी? जानिए यूसीसी पर क्या है उनका पूरा रुख...
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समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में सहयोगी दलों के अलग-अलग सुर सामने आने लगे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से 2029 से पहले भाजपा शासित राज्यों में यूसीसी लागू किए जाने की घोषणा के बाद लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने इस पर तत्काल समर्थन देने के बजाय व्यापक विचार-विमर्श की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि यूसीसी का मसौदा पहले सार्वजनिक किया जाना चाहिए। इसके बाद इसके प्रावधानों और अलग-अलग समुदायों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चर्चा होनी चाहिए।
चिराग पासवान ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच पर अपनी बात रखते हुए कहा कि भारत की पहचान उसकी सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता से है। देश में अलग-अलग समुदायों की अपनी परंपराएं, रीति-रिवाज और सामाजिक व्यवस्थाएं हैं। संविधान में भी इस विविधता और कुछ विशेष क्षेत्रों की विशिष्ट पहचान को संरक्षण दिया गया है।
संविधान के विशेष प्रावधानों का दिया हवाला
लोजपा (रामविलास) प्रमुख ने संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची के साथ अनुच्छेद 371ए और 371जी जैसे प्रावधानों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न कानूनों के तहत अनुसूचित जनजातियों और कुछ क्षेत्रों को विशेष प्रावधान और छूट हासिल हैं। ऐसे में समान नागरिक संहिता पर कोई अंतिम निर्णय लेने से पहले इन पहलुओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है। चिराग ने कहा कि उनकी पार्टी समानता के साथ देश की विविधता के संरक्षण के लिए भी प्रतिबद्ध है। इसलिए यूसीसी के प्रस्तावित ड्राफ्ट को सार्वजनिक करने, उसके प्रभावों का आकलन करने और सभी संबंधित पक्षों से बातचीत करने के बाद ही पार्टी अपना अंतिम रुख तय करेगी।
'पहले ड्राफ्ट आए, फिर तय होगा रुख'
चिराग पासवान के मुताबिक, यूसीसी को लेकर पहले मसौदा सामने आना चाहिए। इसके बाद सभी हितधारकों के हितों और संभावित प्रभावों की समीक्षा की जानी चाहिए। व्यापक चर्चा के बाद ही उनकी पार्टी इस विषय पर अपना अंतिम पक्ष रखेगी।
गृह मंत्री ने क्या घोषणा की थी जानिए?
गृह मंत्री अमित शाह की घोषणा के बाद यूसीसी को लेकर एनडीए के भीतर अलग-अलग राय सामने आ रही है। भाजपा जहां इसे लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कर रही है, वहीं सहयोगी दलों की ओर से पहले व्यापक विचार-विमर्श की मांग की जा रही। बता दें कि अमित शाह ने रविवार को कहा था कि भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकारों वाले 21 राज्यों में 2029 से पहले समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी।