क्या बिहार में मुसलमानों ने भी नीतीश्ा से मुंह मोड़ा?

Alakh Ramअलख राम Updated Thu, 08 May 2014 08:45 AM IST
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there is doubt on muslim voters to support nitish

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बिहार की आबादी में लगभग 17 प्रतिशत हिस्सा मुसलमानों का है। आबादी का बड़ा हिस्सा होना और पूरे राज्य में फैला होना इस अल्पसंख्यक समुदाय को राजनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण बना देता है।
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जहाँ एक ओर यह माना जाता है कि एमवाई समीकरण यानी मुस्लिम-यादव समीकरण के कारण ही लालू प्रसाद यादव बड़ी राजनीतिक ताकत बने हुए हैं। वहीं दूसरी ओर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जदयू ने भी मुस्लिम मतों के भरोसे ही पिछले साल भाजपा से गठबंधन तोड़ा था।
विश्लेषकों के अनुसार जदयू का गणित यह था कि भाजपा से गठबंधन टूटने पर होने वाले सवर्ण मतों के नुकसान की भरपाई पार्टी मुस्लिम मतदाताओं की पहली पसंद बन कर सकेगी।
गठबंधन टूटने के बाद जानकारों को लगने लगा था कि मुस्लिम समुदाय आम चुनाव में जदयू के साथ जा सकता है क्योंकि यह पार्टी सांप्रदायिकता के मुद्दे पर ही एनडीए से बाहर हुई थी लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है।
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