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Bihar Teacher Rules 2023: बेगूसराय में CM, डिप्टी CM व शिक्षा मंत्री के खिलाफ प्रदर्शन,शिक्षकों ने रखी ये मांग

Wed, 12 Apr 2023 06:04 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेगूसराय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेगूसराय Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Wed, 12 Apr 2023 06:04 PM IST
सार

बेगूसराय में बुधवार को शिक्षकों ने बिहार अध्यापक नियमावली 2023 के खिलाफ जिले के तमाम प्रखंडों के सरकारी विद्यालयों में प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर यादव का पुतला जलाकर विरोध जताया। इसके साथ ही उन्होंने अपनी मांगे सरकार के सामने रखीं। 

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Teachers protest against Bihar Teacher Rules 2023 in Begusarai, put their demands to the government
प्रदर्शन के दौरान शिक्षक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बेगूसराय में बिहार अध्यापक नियमावली 2023 के खिलाफ शिक्षकों का आक्रोश गहराता ही जा रहा है। बुधवार को जिले के तमाम प्रखंडों के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों ने बिहार अध्यापक नियमावली के खिलाफ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर यादव का पुतला जलाकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ ने बिहार सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

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'सरकार की वादाखिलाफी से मर्माहत हैं हम'
महागठबंधन सरकार की ओर से चुनावी घोषणापत्र में बिहार के लाखों शिक्षकों से वादा किया गया था कि सभी नियोजित शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा, नियमित शिक्षकों के समान सेवा शर्त, समान काम का समान वेतन और पुरानी पेंशन की व्यवस्था की जाएगी। प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने कहा कि इसके उल्टा कैबिनेट के द्वारा स्वीकृत बिहार राज्य अध्यापक नियमावली 2023 से पहले से बहाल शिक्षकों को पूर्णतः अलग-थलग रखा गया। इससे लाखों शिक्षकों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। वे सरकार की वादाखिलाफी से मर्माहत हैं और उनके अंदर विभाग तथा सरकार के प्रति व्यापक रोष है।
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'भेदभाव की संस्कृति कायम की जा रही'
बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष साकेत सुमन ने कहा कि सहायक शिक्षक के पद को पुनर्जीवित करने के बजाय सरकार विद्यालय अध्यापक के नए पद पर बहाली की नियमावली लाई है। जो न केवल शिक्षकों के साथ, बल्कि बिहार के करोड़ों करोड़ बच्चों के साथ भी धोखा है। एक ही विद्यालय में सहायक शिक्षक नियोजित शिक्षक और विद्यालय अध्यापक जैसे बहुरंगी पद सृजित करके भेदभाव की संस्कृति कायम की जा रही है। जो हमारे संवैधानिक मूल्यों के भी खिलाफ है। सूबे के शिक्षक पहले की तरह सेवा शर्त के लिए विभागीय परीक्षा देने को तैयार हैं। लेकिन विद्यालय अध्यापक जैसे संशोधित पदों के नाम पर कार्यरत शिक्षकों की हकमारी कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।
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'बेशर्त दिया जाए राज्यकर्मी का दर्जा'
संघ के प्रधान सचिव राम कल्याण पासवान ने कहा कि बिहार राज्य विद्यालय अध्यापक नियमावली 2023 में पहले से बहाल सभी शिक्षकों को समाहित करते हुए बिना किसी शर्त के राज्यकर्मी का दर्जा दिया जाए। साथ ही नियमित शिक्षकों की तरह समान काम समान वेतन और सेवा शर्त दी जाए। अन्यथा की स्थिति में बिहार के लाखों शिक्षक असहयोग आंदोलन तथा अन्य बड़े और क्रमबद्ध आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। इसकी सारी जवाबदेही सरकार की होगी

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