सीवान पटाखा विस्फोट: पांचवें दिन मलबे से मिला मुस्कान का शव, हादसे में अब-तक छह की मौत; प्रशासन पर उठे सवाल
बिहार के सीवान के अलमापुर गांव में पटाखा फैक्टरी में हुए भीषण विस्फोट के पांचवें दिन मासूम मुस्कान सिद्दीकी का शव मलबे से बरामद हुआ। हादसे में छह लोगों की मौत हो गई।
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सीवान के जामो थाना क्षेत्र के अलमापुर गांव में हुए भीषण पटाखा विस्फोट कांड का सबसे दर्दनाक अंत आखिरकार पांचवें दिन सामने आया। जिस मासूम मुस्कान सिद्दीकी की तलाश में पूरा जिला दुआ कर रहा था, उसका शव उसी मलबे में दबा मिला, जिसे प्रशासन दूसरे दिन से ही हटाने की तैयारी कर रहा था। इस खबर ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है।
शुक्रवार की शाम रिहायशी इलाके में अवैध रूप से चल रही पटाखा फैक्टरी में हुए शक्तिशाली विस्फोट ने पूरे इलाके को दहला दिया था। धमाका इतना जबरदस्त था कि पांच लोगों की मौत हो गई थी। एक ही परिवार के तीन सदस्य, एक मजदूर और पड़ोस का एक मासूम बच्चा काल के गाल में समा गए थे। सभी को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया था, लेकिन उस घर की सबसे छोटी चिराग मुस्कान का कहीं पता नहीं था।
प्रशासन ने 24 घंटे तक बचाव अभियान चलाया
मकान मालिक और पटाखा कारोबारी अमीरुद्दीन की पोती मुस्कान उस वक्त घर में ही थी। प्रशासन ने 24 घंटे तक बचाव अभियान चलाया, लेकिन जर्जर और कभी भी गिर सकने वाली इमारत के खतरे को देखते हुए अभियान रोकना पड़ा। एसपी भारत सोनी ने कहा था कि भवन को गिराने के बाद ही दोबारा तलाशी ली जाएगी।
सबकी सांसें अटकी हुई थीं
सोमवार को भवन निर्माण विभाग की जांच के बाद प्रशासन ने मकान को खतरनाक घोषित कर उस पर बुलडोजर चलाने का नोटिस चिपकाया और कार्रवाई शुरू की। जैसे-जैसे बुलडोजर मलबा हटा रहा था, सबकी सांसें अटकी हुई थीं। आखिरकार पांचवें दिन उसी मलबे के ढेर से मुस्कान का नाजुक शव बरामद हुआ।
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पांच दिन तक उम्मीद और आंसुओं के बीच झूल रहे परिजनों का सब्र टूट गया। दादी की गोद में खेलने वाली मुस्कान अब कभी नहीं लौटेगी। इस हादसे ने छह जिंदगियां लील लीं और यह सवाल भी छोड़ गया कि रिहायशी इलाके में मौत का यह सामान कैसे तैयार किया जा रहा था और प्रशासन की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ी।