बिहार: गोपालगंज में 401 कलशों के बीच लेटकर तपस्या कर रहे लाल बाबा, नौ दिनों तक साधना का संकल्प
गोपालगंज के बैकुंठपुर प्रखंड स्थित हकाम गांव में लाल बाबा नौ दिनों की कठिन तपस्या कर रहे हैं। वे 401 कलशों के बीच लेटकर साधना कर रहे हैं। बाबा के अनुसार, उनकी तपस्या बिहार की खुशहाली और गरीबों के कल्याण के लिए समर्पित है।
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बिहार के गोपालगंज जिले में लाल बाबा की कठिन तपस्या इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। बैकुंठपुर प्रखंड के हकाम गांव निवासी लाल बाबा नौ दिनों तक चलने वाली साधना कर रहे हैं। इस दौरान वे 401 कलशों के बीच लेटकर तपस्या में लीन हैं। उनकी साधना को देखने और दर्शन करने के लिए आसपास के इलाकों के साथ दूर-दराज से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
सात वर्षों से कर रहे हैं ऐसी तपस्या
प्राप्त जानकारी के अनुसार, लाल बाबा पिछले सात वर्षों से लगातार इस तरह की कठिन तपस्या करते आ रहे हैं। हर साल वे अपने ऊपर कलश रखकर साधना करते हैं। इस वर्ष उन्होंने 401 कलशों के बीच लेटकर तपस्या करने का संकल्प लिया है। उनकी इस साधना को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग अनुष्ठान स्थल पर पहुंच रहे हैं।
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नौ दिनों तक अन्न-जल त्यागने का दावा
लाल बाबा की इस साधना का एक अहम पहलू यह है कि वे नौ दिनों तक अन्न और जल ग्रहण नहीं करने का संकल्प लेकर तपस्या कर रहे हैं। उनकी इस कठिन साधना को लेकर श्रद्धालुओं में काफी उत्सुकता है। हालांकि, लगातार नौ दिनों तक बिना भोजन और पानी के रहने से स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।
बिहार के कल्याण और गरीबों के लिए कर रहे हैं साधना
लाल बाबा के अनुसार, उनकी तपस्या का उद्देश्य बिहार की खुशहाली और गरीब व दुखी लोगों के जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करना है। वे अपनी साधना को समाज के कल्याण और राज्य में शांति व समृद्धि की कामना के लिए समर्पित बता रहे हैं।
दर्शन के लिए पहुंच रहे श्रद्धालु
लाल बाबा की तपस्या की जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। लोग उनकी साधना की सफलता और अच्छे स्वास्थ्य की कामना कर रहे हैं। इस आयोजन के कारण हकाम गांव में धार्मिक माहौल बना हुआ है।