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Bihar News: सरकारी अस्पताल के डॉक्टर ने बचाई मासूम की जान, बगैर ऑपरेशन निकाला स्टील का गियर

Wed, 15 Jan 2025 10:30 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पूर्णिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पूर्णिया Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Wed, 15 Jan 2025 10:30 PM IST
सार

Purnea News: डॉक्टर ने बताया कि गियर का आधा हिस्सा वोकल कॉर्ड में और आधा ट्रैकिया में फंसा हुआ था, जो बेहद नाजुक स्थिति थी। अगर समय पर इलाज न होता तो बच्चे की जान को गंभीर खतरा हो सकता था। पढ़ें पूरी खबर...।

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Purnea News: GMCH doctor saved life of innocent boy, removed steel gear without operation
बच्चे का इलाज करते डॉक्टर विकास कुमार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पूर्णिया में खेल-खेल में चार साल के मासूम बच्चे ने खिलौने का स्टील गियर निगल लिया। इस घटना ने परिजनों और डॉक्टरों को बड़ी चुनौती में डाल दिया। बच्चे की जान पर मंडराते खतरे के बीच जीएमसीएच पूर्णिया के डॉक्टर विकास कुमार की सूझबूझ और तत्परता ने उसे नया जीवन दिया। बिना ऑपरेशन किए लेरिंगोस्कोपी की मदद से गले में फंसे गियर को सुरक्षित निकाल लिया गया।

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खेल-खेल में निगला स्टील का गियर
जानकारी के मुताबिक, मामला पूर्णिया जिले के चंपानगर थाना क्षेत्र के चरैया रहिका गांव का है। चार साल के मासूम सुंदर कुमार घर में खिलौनों से खेलते समय गलती से खिलौने का स्टील गियर निगल गया। गियर बच्चे के वोकल कॉर्ड और ट्रैकिया के बीच फंस गया। इसके चलते बच्चे को सांस लेने में दिक्कत होने लगी और वह दर्द से चीखने लगा। उसके बाद परिजन तुरंत बच्चे को शहर के निजी अस्पतालों में ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इलाज करने से इनकार कर दिया। उन्होंने परिजनों को बच्चे को पटना ले जाने की सलाह दी। आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण पटना जाना मुश्किल था, जिससे परिजन निराश होकर घर लौट रहे थे।
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डॉ. विकास कुमार ने संभाली स्थिति
इसी बीच किसी परिचित ने परिजनों को जीएमसीएच पूर्णिया के डॉक्टर विकास कुमार से संपर्क करने की सलाह दी। डॉ. विकास कुमार ने जानकारी मिलते ही बच्चे को तुरंत अस्पताल बुलाया। उन्होंने अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संजय कुमार को स्थिति से अवगत कराया, जिन्होंने उनका हौसला बढ़ाया और आवश्यक संसाधन मुहैया कराए।
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डॉ. विकास ने बच्चे को बेहोश कर बगैर किसी सर्जरी के लेरिंगोस्कोपी की मदद से गले में फंसे स्टील गियर को बाहर निकाल दिया। उन्होंने बताया कि गियर का आधा हिस्सा वोकल कॉर्ड में और आधा ट्रैकिया में फंसा हुआ था, जो बेहद नाजुक स्थिति थी। अगर समय पर इलाज न होता तो बच्चे की जान को गंभीर खतरा हो सकता था।
 
परिजनों ने जताया आभार
बच्चे की जान बचने के बाद परिजनों ने डॉक्टर विकास कुमार और जीएमसीएच की पूरी टीम का आभार जताया। उन्होंने कहा कि अगर डॉक्टर विकास समय पर मदद न करते, तो हमारे बच्चे की जान बचाना नामुमकिन था। हम उनके इस नेक कार्य को कभी नहीं भूल सकते।

 
डॉ. विकास ने कहा कि हर डॉक्टर का फर्ज है कि वह हर परिस्थिति में मरीज की जान बचाने का प्रयास करे। इस घटना से हमें सीखने को मिला कि सामूहिक प्रयास और सूझबूझ किसी भी कठिन चुनौती को हल कर सकते हैं।

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