पूर्णिया: अब्दुल जलील मस्तान सुपुर्द-ए-खाक, जनाजे की नमाज में उमड़ा जनसैलाब; नम आंखों से दी अंतिम विदाई
बिहार के पूर्व मंत्री और अमौर से छह बार विधायक रहे वरिष्ठ कांग्रेस नेता हाजी अब्दुल जलील मस्तान को उनके पैतृक गांव में नम आंखों के साथ सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।
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बिहार सरकार के पूर्व मंत्री और अमौर विधानसभा क्षेत्र से छह बार विधायक रहे वरिष्ठ कांग्रेस नेता हाजी अब्दुल जलील मस्तान को उनके पैतृक गांव में नम आंखों के साथ सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित एम्स में इलाज के दौरान अंतिम सांस लेने के बाद उनका पार्थिव शरीर पूर्णिया लाया गया, जहां अंतिम दर्शन के लिए समर्थकों और ग्रामीणों का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
जनाजे की नमाज में उमड़े हजारों लोग
दिवंगत नेता के जनाजे की नमाज में सीमांचल भर से हजारों लोग शामिल हुए। इस दौरान किशनगंज के सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद, अमौर के एआईएमआईएम (AIMIM) विधायक अख्तरूल ईमान, कई पूर्व व वर्तमान विधायक और विभिन्न दलों के वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
अब्दुल जलील मस्तान ने 1985 में अमौर से निर्दलीय चुनाव जीतकर अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा के आह्वान पर वे कांग्रेस में शामिल हुए और जीवनभर पार्टी से जुड़े रहे। उन्होंने अमौर से छह बार विधानसभा का प्रतिनिधित्व किया। 2015 की महागठबंधन सरकार में वे उत्पाद एवं मद्य निषेध मंत्री बने और 2016 में बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून लागू कराने में उनके विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका रही। 2017 में नोटबंदी के विरोध के दौरान वे राष्ट्रीय मीडिया और राजनीति के केंद्र में रहे।
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जनाजे में पहुंचे नेताओं ने जलील मस्तान को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें सीमांचल की राजनीति का मजबूत स्तंभ, सादगी की मिसाल और गरीबों की बुलंद आवाज बताया। वक्ताओं ने कहा कि बाढ़ पीड़ितों और क्षेत्र के विकास के लिए उनका योगदान सदैव याद रखा जाएगा। उनके निधन से कोसी-सीमांचल की राजनीति में हुई क्षति की भरपाई होना नामुमकिन है।

पूर्व मंत्री अब्दुल जलील मस्तान सुपुर्द-ए-खाक, जनाजे में उमड़ा जनसैलाब

पूर्व मंत्री अब्दुल जलील मस्तान सुपुर्द-ए-खाक, जनाजे में उमड़ा जनसैलाब