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Bihar: क्या करने वाले हैं नीतीश? जानें बैठकें, चार्जशीट, तबादले और बयानों से बन रहे समीकरणों के क्या संकेत

सार

Bihar Politics : कुछ भी दावे के साथ नहीं कहा जा सकता है, लेकिन ताजा समीकरण कुछ इस तरह बन रहा है कि सवाल सामने आ गया है- नीतीश क्या करने वाले हैं? इस वक्त सिर्फ समीकरण को समझना अच्छा है।
 

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Politics news bihar : after maharashtra politics bihar news of cm nitish kumar and lalu yadav equation
विपक्षी एकता की जगह यह क्या हो रहा? - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार के खिलाफ विपक्षी एकता की खिचड़ी कैसी पकी, यह तो पटना में दूसरी बार मिली तारीख और फिर दूसरी बैठक के लिए तीसरी बार आई तारीख से साफ हो गया है। इस बीच, बिहार में दूसरे तरह की खिचड़ी पकने की गंध आ रही है। कुछ भी दावे के साथ नहीं कहा जा सकता है, लेकिन ताजा समीकरण कुछ इस तरह बन रहा है कि सवाल सामने आ गया है- नीतीश क्या करने वाले हैं? जब तक कुछ हो नहीं, कहना गलत होगा। इसलिए, सिर्फ समीकरण को समझना इस समय अच्छा है। इसके लिए हम अभी और फिर पीछे जाएंगे।

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हरिवंश-नीतीश मुलाकात से समझ घटनाक्रम समझें
मंगलवार को सामने आया कि राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश से बंद कमरे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने करीब डेढ़ घंटे बातचीत की। बातचीत क्या हुई, यह मुख्यमंत्री ने बताया नहीं और हरिवंश भी कॉल नहीं रिसीव कर रहे। बाकी जो भी बातें चल रहीं, अंदाजन है। हम पक्के तौर पर सिर्फ यही बता सकते हैं कि जदयू कोटे के राज्यसभा सांसद हरिवंश के भाजपा सरकार में राज्यसभा का उप सभापति बने रहना चर्चा का एक विषय रहा और दूसरा सवाल कि विपक्षी एकता की नीतीश की कोशिशों का क्या फलाफल निकलने की संभावना है। दूसरी लाइन की वजह यह है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को अपने सांसदों को मुलाकात के लिए बुलाया था। उससे पहले वह अपने विधायकों से मिल चुके थे। इन मुलाकातों के बाद हरिवंश से लंबी बातचीत में उनके पद पर कायम रहने की बात का सीधा वास्ता है। 
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तेजस्वी पर चार्जशीट से कैसे जुड़ रहा घटनाक्रम
यह याद करने के लिए बहुत ज्यादा जोर डालने की जरूरत नहीं कि पिछली बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महागठबंधन सरकार से पीछा क्यों छुड़ाया था। भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को नीतीश-निश्चय बताया भी जाता है। सोमवार की शाम तेजस्वी यादव के खिलाफ चार्जशीट दायर होने की खबर आई। यह वही चार्जशीट है, जिसके बारे में उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को 20 दिनों से अंदाजा लग रहा था। वह बार-बार केंद्र सरकार पर आरोप लगा रहे थे कि विपक्षी एकता की कोशिशों को कुंद करने के लिए उनपर चार्जशीट दाखिल हो सकती है। वैसे, किसी चर्चित केस में चार्जशीट दाखिल होने की स्थिति के पहले अंदाजा लग ही जाता है। तेजस्वी को भी लगा। तो, एक चर्चा यह भी कि नीतीश भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति के बारे में सोच सकते हैं। 
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ट्रांसफर-पोस्टिंग का विवाद पिछली बार भी सामने था
बिहार में जून के अंत में बड़े पैमाने पर तबादले हुए। यह तबादले तब हुए, जब उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव बिहार से बाहर थे। तेजस्वी यादव के विभाग से भी तबादले हुए। सभी तबादलों में मुख्यमंत्री सचिवालय की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता है। कुछ तबादला आदेश को वापस भी किया गया और कुछ को बदला भी गया। इन ताजा परिस्थितियों को पिछले बार की परिस्थितियों से मेल कराएंगे तो सामने आएगा कि तब भी बहुत हद तक ऐसी हालत बनी थी। 

अब बयानों को समझने की बारी है, ठीक से देखिए
भाजपा ने 'मुख्यमंत्री' के रूप में नीतीश कुमार के लिए दरवाजे बंद रखे हैं, यह तो पक्का है। बीच में उनके लिए उप राष्ट्रपति या राज्यपाल जैसे पदों की चर्चा भी निकली थी, लेकिन हवा हो गई। तेजस्वी पर चार्जशीट के बाद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने तो इतना तक कह दिया कि तेजस्वी को फंसाने के लिए नीतीश कुमार ने ही खेला किया है। एजेंसियों को जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के जरिए दस्तावेज पहुंचाए जाने का भी आरोप लगाया गया। राजद और जदयू ने इसे गलतबयानी कहा। हालांकि, राजद में जदयू के विलय की बात को ललन सिंह नकार चुके हैं और इससे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी इसे बकवास कहा था। विलय को लेकर बयानबाजी उस समय भी सामने आई थी, जब हिन्दुस्तानी आवामी मोर्चा ने जदयू में विलय की जगह महागठबंधन सरकार से बाहर होना बेहतर समझा था।


अब पीके की भविष्यवाणी को इन बातों से जोड़ें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक के आसपास रह चुके चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर अपने संगठन को बिहार की राजनीति के लिए खड़ा कर रहे हैं। प्रशांत किशोर, यानी पीके ने कई बार दुहराया है कि "नीतीश कुमार ने जदयू के एनडीए सरकार से हटने के बावजूद राज्यसभा के उप सभापति के रूप में भाजपा से बात करने का एक विंडो खुला रखा है।" इस लाइन से ताजा परिस्थितियों को जोड़ते समय राजभवन में पिछले हफ्ते मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी की 'संयोगवश’ कही गई मुलाकात का भी समीकरण लोग देख रहे हैं। पिछली बार महागठबंधन सरकार गिराने में सुशील मोदी की अहम भूमिका रही थी, इससे कोई इनकार नहीं कर सकता। मतलब, विपक्षी एकता की कोशिशों के बीच यह क्या हो रहा है? सवाल वाजिब है, हालांकि जवाब में जदयू के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता केसी त्यागी एक लाइन की बात कहते हैं- “सब अफवाह है। सरकार स्थिर है। नीतीश समय-समय पर विधायकों-सांसदों से मिलते हैं, हरिवंश जी से भी वैसी ही मुलाकात थी।”

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