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पटना में बोले पीएम मोदी- सरकारी बंधन से मुक्त होंगे देश के चुनिंदा 20 विश्वविद्यालय
टीम डिजिटल/ अमर उजाला
Updated Sat, 14 Oct 2017 08:34 PM IST
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पीएम मोदी
- फोटो : ANI
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की गति बहुत धीमी है। अब सरकार इसमें कुछ तेजी लाने जा रही है। जिस प्रकार पटना विश्वविद्यालय ने देश को प्रशासनिक अधिकारी उपलब्ध कराया है, उसी प्रकार भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) विश्व को सीईओ उपलब्ध कराता है।
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भारतीय प्रबंधन संस्थान को सरकारी बंधनों से मुक्त किया जा चुका है। इसके बाद सरकार 20 चुनिंदा विश्वविद्यालयों को भी सरकारी बंधनों से मुक्त करने जा रही है। योग्यता के आधार पर दस निजी और दस सरकारी विश्वविद्यालयों को चयन होना है।
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पांच वर्ष में उन्हें 10 हजार करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे वो एक विश्वस्तरीय संस्थान बन सकें। प्रधानमंत्री पटना विश्वविद्यालय के 100 वर्ष पूरे होने पर आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे।
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मोदी ने कहा कि विश्व के पांच सौ बेहतरीन शिक्षण संस्थाओं में भारत का कोई संस्थान नहीं है। जहां नालंदा जैसे शिक्षा के केंद्र थे, उसे इस सूची में होना चाहिए था, लेकिन यह काम कोई बाहरी आकर नहीं करेगा।
हमें ही करना होगा। मोदी ने कहा कि पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय से आगे ले जाना है। इस संस्थान को प्रतिस्पर्धा में शामिल करते हुए बंधन मुक्त करने का प्रयास करें।
इसमें राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन की भी भूमिका है। मोदी ने कहा कि चयन में किसी नेता की पैरवी नहीं चलेगी।
मोदी ने कहा कि नवाचार से ही प्रगति संभव है। उन्होंने देश के तमाम विश्वविद्यालयों से आह्वान किया कि स्थानीय जरूरतों और समस्याओं के निराकरण के लिए नवाचार को बढावा दें।
शिक्षा का मूल लक्ष्य दिमाग को खाली करना है। ऐसा होने पर ही नए विचारों के लिए जगह बन सकती है। सीखने और पढने का युग समाप्त हो चुका है। नवाचार आज की जरूरत है। देश को आगे ले जाने के लिए हमें दिमाग खाली करने का अभियान चलाना होगा।
पहली बार पटना विश्वविद्यालय में आए कोई पीएम
शिक्षण संस्थाओं में पूर्ववर्ती छात्रों की भूमिका का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी संस्थान के लिए उनके पूर्ववर्ती छात्र एक पूंजी हैं। उनकी अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए।
आईआईएम में ऐसा किया गया है। पटना विश्वविद्यालय के पास भी पूर्ववर्ती छात्रों की समृद्ध पूंजी है। उसका उपयोग होना चाहिए।
इससे पूर्व पटना विश्वविद्यालय में पहले प्रधानमंत्री के रूप में आने को अपना सौभाग्य मानते हुए मोदी ने कहा कि पूर्ववर्ती प्रधानमंत्रियों ने कुछ काम मेरे लिए छोड़ रखे थे, जिनमें से यह भी एक पुण्य काम था। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश आज जहां भी है, वहां तक पहुंचाने में इस संस्थान की बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका है। गंगा जितनी पुरानी बिहार की ज्ञान धारा है।
मोदी ने कहा कि बिहार की विरासत ही भारत का भावी इतिहास है। जो समाज इतिहास भूल जाता है, उसकी कोख बांझ हो जाती है, क्योंकि इतिहास के ज्ञान से ही भविष्य का गर्भधारण होता है।
इतनी समर्थ विरासत शायद ही किसी के पास होगी। बिहार अब तक सरस्वती की आराधना में ही खुद को खपा दिया है। अब लक्ष्मी और सरस्वती के मिलन से बिहार को आगे ले जाने का संकल्प लेकर आजादी की 75वीं वर्षगांठ यानी 2022 तक उसे समृद्ध राज्यों की कतार में ले जाने की जरूरत है।
नीतीश के एनडीए में शामिल होने के बाद पीएम की पहली यात्रा
नीतीश कुमार के लालू प्रसाद यादव से संबंध तोड़कर एनडीए में शामिल होने के बाद प्रधानमंत्री पहली बार सरकारी दौरे पर बिहार आए हैं। हवाईअड्डे पर राज्यपाल सत्यपाल मलिक और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनकी अगवानी की।
विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में दोनों ने पहली बार मंच साझा किया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, रामविलास पासवान और अश्विनी कुमार चौबे भी उपस्थित थे। विश्वविद्यालय के कार्यक्रम के बाद मोदी ने अचानक पटना म्यूजियम देखने चले गए। मुख्यमंत्री ने वहां भी उनका साथ दिया।
आईआईएम में ऐसा किया गया है। पटना विश्वविद्यालय के पास भी पूर्ववर्ती छात्रों की समृद्ध पूंजी है। उसका उपयोग होना चाहिए।
इससे पूर्व पटना विश्वविद्यालय में पहले प्रधानमंत्री के रूप में आने को अपना सौभाग्य मानते हुए मोदी ने कहा कि पूर्ववर्ती प्रधानमंत्रियों ने कुछ काम मेरे लिए छोड़ रखे थे, जिनमें से यह भी एक पुण्य काम था। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश आज जहां भी है, वहां तक पहुंचाने में इस संस्थान की बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका है। गंगा जितनी पुरानी बिहार की ज्ञान धारा है।
मोदी ने कहा कि बिहार की विरासत ही भारत का भावी इतिहास है। जो समाज इतिहास भूल जाता है, उसकी कोख बांझ हो जाती है, क्योंकि इतिहास के ज्ञान से ही भविष्य का गर्भधारण होता है।
इतनी समर्थ विरासत शायद ही किसी के पास होगी। बिहार अब तक सरस्वती की आराधना में ही खुद को खपा दिया है। अब लक्ष्मी और सरस्वती के मिलन से बिहार को आगे ले जाने का संकल्प लेकर आजादी की 75वीं वर्षगांठ यानी 2022 तक उसे समृद्ध राज्यों की कतार में ले जाने की जरूरत है।
नीतीश के एनडीए में शामिल होने के बाद पीएम की पहली यात्रा
नीतीश कुमार के लालू प्रसाद यादव से संबंध तोड़कर एनडीए में शामिल होने के बाद प्रधानमंत्री पहली बार सरकारी दौरे पर बिहार आए हैं। हवाईअड्डे पर राज्यपाल सत्यपाल मलिक और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनकी अगवानी की।
विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में दोनों ने पहली बार मंच साझा किया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, रामविलास पासवान और अश्विनी कुमार चौबे भी उपस्थित थे। विश्वविद्यालय के कार्यक्रम के बाद मोदी ने अचानक पटना म्यूजियम देखने चले गए। मुख्यमंत्री ने वहां भी उनका साथ दिया।