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Bihar Politics: प्रशांत किशोर का खुलासा, जन सुराज अभियान के लिए अपने पूर्व ग्राहकों से मिल रही है वित्तीय मदद
Wed, 26 Oct 2022 05:59 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: Amit Mandal
Updated Wed, 26 Oct 2022 05:59 PM IST
सार
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को सनसनीखेज जीत दिलाने में मदद करने के बाद आईपीएसी (IPAC) के संस्थापक प्रशांत किशोर ने पिछले साल पेशेवर राजनीतिक परामर्श से अपनी सेवानिवृत्ति की घोषणा की थी।
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प्रशांत किशोर (file photo)
- फोटो : PTI
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विस्तार
राजनीतिक रणनीतिकार से कार्यकर्ता बने प्रशांत किशोर ने गुरुवार को संकेत दिया कि उन्हें बिहार में अपने 'जन सुराज अभियान' के लिए अपने पूर्व ग्राहकों से वित्तीय सहायता मिल रही है, जिनमें से कई अब अपने-अपने राज्यों के मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने बिहार की राजधानी से लगभग 300 किलोमीटर दूर भारत-नेपाल सीमा पर स्थित एक सुरम्य और सुदूर वन अभ्यारण्य वाल्मीकि नगर में एक संवाददाता सम्मेलन में ये खुलासा किया।
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प्रशांत किशोर 2 अक्टूबर से पदयात्रा पर
प्रशांत किशोर 2 अक्टूबर से पदयात्रा पर हैं और अपने अभियान के एक पूर्ण राजनीतिक दल के रूप में विकसित होने से पहले अपने गृह राज्य के हर नुक्कड़ और कोने में पहुंचते हुए 3,500 किमी पैदल चलने का इरादा रखते हैं। उनसे उनके अभियान के लिए धन के स्रोत के बारे में पूछा गया था जिसे लेकर बहुत अटकलें थीं। जद (यू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललल ने हाल ही में कहा था कि आईपीएसी संस्थापक पीके को भाजपा से धन मिल रहा है।
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किशोर ने याद किया, पिछले एक दशक में मैंने कम से कम 10 चुनावों के लिए अपनी सेवाएं दीं और एक को छोड़कर सभी में सफल रहा। उन्होंने 2017 के यूपी विधानसभा चुनावों को याद किया जिसमें उनकी सलाह को कथित रूप से अनदेखा किया गया था, यही उनकी एकमात्र विफलता थी। किशोर ने कहा, मैंने कम से कम छह लोगों को जीतने में मदद की, जो अब मुख्यमंत्री हैं। मैंने उनसे पैसे नहीं लिए, हालांकि मीडिया ने मुझ पर विश्वास नहीं किया। लेकिन अब मैं बिहार में जो प्रयोग कर रहा हूं, उसके लिए मैं उनकी मदद मांग रहा हूं। पीके ने पहली बार 2014 में प्रसिद्धि हासिल की थी जब उन्होंने नरेंद्र मोदी के लोकसभा चुनाव अभियान का प्रबंधन किया था।
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ममता बनर्जी को दिलाई सनसनीखेज जीत
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को सनसनीखेज जीत दिलाने में मदद करने के बाद आईपीएसी (IPAC) के संस्थापक ने पिछले साल पेशेवर राजनीतिक परामर्श से अपनी सेवानिवृत्ति की घोषणा की थी। उनकी सेवा लेने वालों में अमरिंदर सिंह के अलावा अरविंद केजरीवाल, एम के स्टालिन और जगन मोहन रेड्डी, दिल्ली, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री शामिल हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि मैंने बिहार में किसी से एक भी रुपया नहीं लिया है और इस बात पर जोर दिया कि उनके अभियान में हेलीकॉप्टर की सवारी, विशाल मंचों को खड़ा करने, विज्ञापन निकालने और भीड़ को ले जाने जैसे खर्च नहीं थे।
पीके ने कहा कि हम अभी तक एक राजनीतिक दल नहीं हैं। लेकिन एक बार जब ऐसा हो जाएगा तो बिहार भर में दो करोड़ परिवारों से केवल 100 रुपये का दान हमें चुनाव में अच्छी लड़ाई लड़ने के लिए पर्याप्त राशि जुटाने में मदद करेगा। उन्होंने किसी भी स्थापित दल से हाथ मिलाने की संभावना से इनकार किया है। प्रशांत किशोर नीतीश कुमार और उनके मौजूदा सहयोगी लालू प्रसाद पर कटाक्ष करते रहे हैं। दोनों ने 2015 में पहली बार हाथ मिलाने पर उनकी सेवाओं का लाभ उठाया था। उन्होंने जद (यू) और राजद पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि ये अपने दम पर कभी भी बिहार नहीं जीत पाए हैं।