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Namami Gange: गंगा बचाने के लिए ढाई दशकों से जुटे गुड्डू बाबा, छठ के मौके पर सरकार-व्रतियों से की भावुक अपील

Sun, 03 Nov 2024 03:11 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Sun, 03 Nov 2024 03:11 PM IST
सार

Namami Gange: गुड्डू बाबा ने कहा कि नमामि गंगे आने के बाद घाटों का सौंदर्यीकरण सरकार की प्राथमिकता में रही, अच्छी बात है। लेकिन गंगा या किसी भी नदियों के प्रदूषित होने का जो कारक होता है वह 74 प्रतिशत सीवरेज है, 24 प्रतिशत इंडस्ट्रियल वेस्ट है और केवल दो प्रतिशत पब्लिक उसका कारण है।

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Namami Gange: Guddu Baba engaged in saving Ganga for 25 years, appeals to govt and people on Chhath festival
सामाजिक कार्यकर्ता विकासचंद्र उर्फ गुड्डू बाबा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जीवनदायिनी नदी गंगा पापों का नाश कर मोक्ष प्रदान करने के लिए जानी जाती है। ऐसी पावन धारा को निर्मल बनाए रखने के ध्येय के साथ सामाजिक कार्यकर्ता विकासचंद्र उर्फ गुड्डू बाबा पिछले 25 वर्षों से गंगा बचाओ अभियान में जुटे हुए हैं। इसी सिलसिले में गुड्डू बाबा ने एक बार फिर एक वीडियो जारी कर अपने विचार रखे हैं। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार तथा आम लोगों से भावुक अपील की है।

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सामाजिक कार्यकर्ता विकासचंद्र उर्फ गुड्डू बाबा ने बताया कि गंगा बचाओ अभियान की शुरुआत पटना के बास घाट श्मशान घाट से 1998 में की गई थी। पहली बार गंगा को बचाने के लिए जेपी गुलंबर पर 48 घंटे का फास्ट एक आम नागरिक द्वारा शुरू किया गया। गंगा को बचाने का क्रम आज तक जारी है। साल 2008 में गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित किया गया। उसके बाद वर्तमान सरकार ने 53 हजार करोड़ रुपये का प्रोवीजन किया।
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उन्होंने कहा कि नमामि गंगे आने के बाद घाटों का सौंदर्यीकरण सरकार की प्राथमिकता में रही, अच्छी बात है। लेकिन मैं आज स्पष्ट करना चाहता हूं कि गंगा या किसी भी नदियों के प्रदूषित होने का जो कारक होता है वह 74 प्रतिशत सीवरेज है, 24 प्रतिशत इंडस्ट्रियल वेस्ट है और केवल दो प्रतिशत पब्लिक उसका कारण है। पटना शहर छठ के मौके पर भारत का सबसे साफ-सुथरा शहर बन जाता है।
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उन्होंने कहा कि 16 मार्च 2001 को माननीय पटना उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि लाशें गंगा में नहीं फेंकी जाएं, लाशों का निष्पादन सरकार की जवाबदेही है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय में 70,000 लावारिस लाशों का मामला कोर्ट में मेरे द्वारा ले जाया गया, आरटीआई से इस देश के सभी जगहों से सूचना इकट्ठा करने के बाद।


 
गुड्डू बाबा ने कहा कि भारत की सरकार ने गाइडलाइन बनाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर। कोर्ट में एक मई 2018 को गाइडलाइन दी गई असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल पिंकी आनंद द्वारा। कहा गया कि कैबिनेट में भेजा जा चुका है कानून बनाने के लिए, लेकिन आज तक कानून नहीं बन पाए। सुधार कहीं-कहीं हुए हैं, लेकिन यह देश आज छठ के मौके पर यह जरूर मांग कर रहा है यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी जी से कि कुछ चीजें जो बिलकुल सरकार द्वारा की जा सकती हैं, उन्हें सरकार को जरूर करना चाहिए। आंदोलन के 25 साल हो गए, आज भी मेरे मन में पीड़ा है कि क्या यह देश गंगा नदी में एक बूंद पानी सीवरेज का, नाले का जाने से रोक पाया है क्या? छठव्रती माताएं क्या इस बार यह आश्वस्त होकर छठ कर पाएंगी?

उन्होंने कहा कि सरकार आश्वस्त करेगी कि गंगा में नाले का पानी नहीं जा रहा है, गंगा में कहीं भी लावारिस शव नहीं दिखेंगे, जानवरों के शव नहीं दिखेंगे। हमने कल ही सरकार को कहा है कि कम से कम 48 घंटे पहले गंगा नदी में जो नाले का पानी जाता है, इसे आप रोक सकते हैं, इसे रोक लीजिये। लेकिन एक बार सभी लोगों को, सरकार के लोगों को यह संकल्प जरूर लेना चाहिए कि अगले बार छठ के मौके पर हम लोग कह सकें कि अब गंगा में नाले का पानी नहीं गिराया जाता है। हमारे गंगा के इतिहास को देखें तो टेम्स नदी जो दुनिया की सबसे प्रदूषित नदी थी। आज टेम्स नदी दुनिया की सबसे स्वच्छ नदी है। तो जिस गंगा को मां कहने वाले 140 करोड़ लोग हैं। ऐसे में गंगा को बचाने के लिए विदेशों का कर्ज कब तक यह देश लेता रहेगा?

उन्होंने आगे कहा कि अब तो मुझे खुशी है कि कम से कम सरकार, नगर निगम और सभी लोग तथा जिला प्रशासन हर साल छठ घाटों की सफाई में पंद्रह दिन पहले से लग जाते हैं। लेकिन एक जो पीड़ादायक शब्द है, फिर मैं बार-बार दोहरा रहा हूं, अपने अंदर की व्यथा बता रहा हूं कि क्या गुड्डू बाबा यह देख पाएंगे अपने जीवित काल में कि गंगा में नाले के पानी को जाने से हमारी भारत की सरकार और राज्य की सरकार ने रोक लिया। जिस दिन मैं ये देख पाऊंगा, मैं समझूंगा कि मेरा जीवन सार्थक हो गया, क्योंकि गुड्डू बाबा ने पूरा जीवन गंगा को समर्पित कर दिया यह सब लोग जानते हैं, बताने की आवश्यकता नहीं है।


गौरतलब है कि विकासचंद्र ऊर्फ गुड्डू बाबा गंगा बचाओ अभियान से जुड़े हैं। पटना में पीएमसीएच के पीछे सैकड़ों लाशें पाई गई थी। इस मामले को लेकर पहली बार विकासचंद्र उर्फ गुड्डू बाबा ने सड़क पर बैठकर धरना-प्रदर्शन किया था। तब से लेकर आज तक वह इस आंदोलन से जुड़े हुए हैं। अपनी लड़ाई लड़ने के लिए हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जा चुके हैं। इन पर कई बार जानलेवा हमला भी हुआ। अब हाई कोर्ट ने इन्हें दो बॉडीगार्ड मुहैया कराए हैं।
 
गुड्डू बाबा का मुख्य काम लावारिस लाशों को खुद निकालना, पॉलिथीन निकालना, गंदगी की सफाई करना है। वे 16 मार्च 2001 से लेकर अब तक यह लड़ाई लड़ रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय में भी इन्होंने लावारिस लाशों को गंगा में फेंकने से रोकने के लिए याचिका दायर की थी।  इसका परिणाम यह निकला कि सुप्रीम कोर्ट में गंगा में लावारिस लाश को न फेंकने का कानून बनाया गया।

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