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Bihar: विश्व शांति स्तूप की 56वीं वर्षगांठ पर शामिल हुए राज्यपाल, समारोह में कई देशों के प्रतिनिधि हुए शामिल

Sat, 25 Oct 2025 02:46 PM IST
पटना ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजगीर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजगीर Published by: पटना ब्यूरो Updated Sat, 25 Oct 2025 02:46 PM IST
सार

राजगीर स्थित रत्नागिरी पहाड़ी के विश्व शांति स्तूप का 56वां स्थापना दिवस शनिवार को मनाया गया। इस अवसर पर बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने समारोह में भाग लिया।

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Nalanda news Governor attended the 56th anniversary of Vishwa Shanti Stupa,
विश्व शांति स्तूप के 56वें वर्षगांठ पर शामिल हुए राज्यपाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रत्नागिरी पहाड़ी पर स्थित विश्व शांति स्तूप के 56वें स्थापना दिवस के अवसर पर शनिवार को बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने इस पवित्र स्थल पर आयोजित समारोह में भाग लिया। यह स्तूप न केवल बौद्ध धर्म की महान विरासत का प्रतीक है, बल्कि भारत और जापान के बीच गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों का भी जीवंत प्रमाण है।
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कार्यक्रम की शुरुआत राज्यपाल के भव्य स्वागत के साथ हुई, जब नालंदा पुलिस ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इसके बाद राज्यपाल रत्नागिरी पहाड़ी पर आयोजित मुख्य समारोह में सम्मिलित हुए, जहां पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। पूजा-पाठ के उपरांत राज्यपाल खान ने अपने संबोधन में कहा कि आज इस शुभ अवसर पर विश्व शांति स्तूप की 56वीं वर्षगांठ के इस पवित्र समारोह में उपस्थित होना मेरे लिए बहुत बड़े सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि राजगीर जैसे पवित्र स्थान पर, जहां भगवान बुद्ध के चरणों ने धरती को पावन किया, यह स्मारक शांति का पवित्र प्रतीक है।
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राज्यपाल ने राजगीर बुद्ध विहार सोसायटी, निपोन्जन म्योहोजी के अनुयायियों और परम पूज्य निचिदात्सू फूजी गुरुजी के शिष्यों को हार्दिक बधाई दी। समारोह में कई देशों से आए प्रतिष्ठित प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। राज्यपाल ने विशेष रूप से जापान के संतोपु कंपनी लिमिटेड के अध्यक्ष श्री केनसुके ओरियोची, सीजीसी और सनपो के प्रतिनिधियों, तथा पीस एंड गुडविल पिलग्रिमेज मिशन ऑफ इंडिया की डॉ. महास्वेता महाराठी के साथ-साथ वेनेरेबल सीनियर मोंक्स और महाविहार एवं नागर मंदिर के संघ के सभी सदस्यों की सराहना की।
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राज्यपाल ने राजगीर के ऐतिहासिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राजगीर, जो प्राचीन मगध साम्राज्य की राजधानी रहा है, बौद्ध धर्म के सबसे पवित्र स्थलों में से एक है। यहीं पर द्वितीय धर्म चक्र परिवर्तन हुआ था और सप्तपर्णि गुफा में महत्वपूर्ण बौद्ध परिषद का आयोजन हुआ था।


अपने संबोधन में राज्यपाल खान ने भारत और जापान के बीच मैत्री के प्रतीक पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आप सभी की उपस्थिति इस कालातीत बंधन को दर्शाती है, जिसकी जड़ें महान गुरु भगवान बुद्ध की शिक्षाओं में निहित हैं। उन्होंने बताया कि राजगीर बुद्ध विहार सोसायटी, जिसकी स्थापना भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्री मोरारजी देसाई और परम पूज्य निचिदात्सू फूजी गुरुजी के नेतृत्व में हुई थी, पिछले आधी सदी से अधिक समय से भारत-जापान मैत्री को मजबूत करने और विश्व शांति को बढ़ावा देने में समर्पित रही है।

राज्यपाल ने कहा कि रत्नागिरी पहाड़ी की चोटी पर स्थित विश्व शांति स्तूप, जहां भगवान बुद्ध ने सात वर्षों तक उपदेश दिया था, अहिंसा और करुणा में हमारी अटूट आस्था का प्रतीक है। समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और बौद्ध धर्म के अनुयायी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक बौद्ध प्रार्थनाएं और मंत्रोच्चारण भी किए गए। विश्व शांति स्तूप आज भी दुनिया भर से आने वाले पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है और यह बिहार की समृद्ध बौद्ध विरासत का गौरवशाली प्रतीक बना हुआ है।

 

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