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Mountain Man: कब है माउंटेन मैन की जयंती? भाजपा ने दशरथ मांझी का जन्मदिन आज ही मना लिया

Tue, 13 Jan 2026 06:48 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: आदित्य आनंद Updated Tue, 13 Jan 2026 06:48 PM IST
सार

Bihar News: बिहार भाजपा के किसी नेता या पूर्व मंत्री की ओर से इस पर कोई स्पष्टीकरण नहीं आया है, लेकिन सोशल मीडिया पर 'तारीखों की इस भूल' ने दशरथ मांझी की जयंती को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। राजद और कांग्रेस ने इस मामले को लेकर भाजपा क

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Mountain Man's birth anniversary? Bihar BJP celebrated Dashrath Manjhi birthday
भाजपा ने दशरथ मांझी की जयंती आज ही मना ली। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार के गौरव और 'माउंटेन मैन' के नाम से दुनिया भर में मशहूर बाबा दशरथ मांझी की जयंती को लेकर सोशल मीडिया पर एक अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई है। अमूमन 14 जनवरी को मनाई जाने वाली उनकी जयंती, इस बार एक दिन पहले यानी 13 जनवरी को ही सुर्खियों में आ गई। बिहार की राजनीति में उस वक्त सुगबुगाहट तेज हो गई जब भाजपा बिहार के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल और पूर्व मंत्री जनक राम के अकाउंट से दशरथ मांझी को उनकी जयंती पर भावभीनी श्रद्धांजलि और शुभकामनाएं दी जाने लगीं। देखते ही देखते ये पोस्ट वायरल हो गए और आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गए।

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जयंती 13 या 14 जनवरी को है? 
दशरथ मांझी का जन्म आधिकारिक तौर पर 14 जनवरी को माना जाता है। ऐसे में एक दिन पहले ही सत्ताधारी दल के बड़े मंचों से दी गई इन शुभकामनाओं ने लोगों को हैरान कर दिया। आमलोगों ने तुरंत इस पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। लोग पूछ रहे हैं कि क्या यह कोई तकनीकी गलती है या फिर दशरथ मांझी की जयंती की तिथि को लेकर कोई नया संशोधन हुआ है।राजनीतिक पंडित इसे जल्दबाजी और सोशल मीडिया टीम की लापरवाही के रूप में देख रहे हैं, जिसने पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी है। दशरथ मांझी की जयंती बिहार के स्वाभिमान का प्रतीक मानी जाती है। जब तक तोड़ेंगे नहीं तब तक छोड़ेंगे नहीं दशरथ मांझी का यह संवाद आज भी करोड़ों लोगों को प्रेरित करता है, लेकिन इस बार उनकी जयंती 'तारीखों के फेर' में फंसकर खबरों में आ गई है।
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क्यों खास हैं दशरथ मांझी?
गया जिले के गहलौर के रहने वाले दशरथ मांझी ने 22 साल की अथक मेहनत के बल पर अकेले दम पर पहाड़ को काटकर एक चौड़ा रास्ता बना दिया। सिर्फ एक छेनी और हथौड़े के दम पर 360 फुट लंबा और 30 फुट चौड़ा पहाड़ काट दिया था। अपने इसी भागीरथी प्रयास के जरिए मांझी ने देश दुनिया में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने दिखाया कि कैसे एक आम आदमी अगर जीवन में कुछ ठान ले तो कुछ भी आसान किया जा सकता है। पहाड़ काटने का ये सिलसिला शुरू हुआ एक दुर्घटना से जब मांझी की पत्नी फाल्गुनी देवी उनके लिए खाना लाते समय पहाड़ से गिरकर चोटिल हो गई थी। दशरथ मांझी घायल पत्नी की जान बचाने के लिए उसे अस्पताल ले जाना चाहते थे लेकिन वो गांव से 70 किलोमीटर की दूरी पर था। दिक्कत ये थी कि उस समय आने जाने के लिए कोई साधन भी नहीं थे। नतीजा ये हुआ कि गरीब मांझी की पत्नी ने गांव में ही वैध के उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। पत्नी की मौत ने मांझी को झकझोर दिया। जिसके बाद उन्होंने एक ऐसा निश्चय लिया जिससे हर कोई उन्हें अचंभे से देखने लगा। दशरथ मांझी ने अतरी और वजीरगंज के बीच की 75 किलोमीटर की दूरी को कम करने के लिए गहलौर के एक पहाड़ को काटने का निर्णय किया। इसके कटने से दोनों ब्लाक के बीच की दूरी मात्र 15 किलोमीटर रह जाती। साल 1960 से शुरू हुआ यह सिलसिला 1982 तक बिना रुके चलता रहा। जिसके बाद मांझी ने विशालकाय पहाड़ को काटकर 360 फीट लंबा, 25 फीट ऊंचा और 30 फीट चौड़ा रास्ता बना दिया।


कांग्रेस बोली- भाजपा ने अपमान किया है
कांग्रेस के प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने कहा कि भाजपा इतनी हड़बड़ी में हैं कि उसे जयंती की तारीख ही मालूम नहीं है। दलितों का इनलोगों ने इतना अपमान किया है कि इन्हें किसी दलित की जयंती की सही तारीख तक याद नहीं। इसलिए एक दिन पहले ही यह लोग बधाई दे रहे। हर भवन हीन को पक्का मकान देने का वादा करने वाले पीएम मोदी दशरथ मांझी के परिवार को पक्का मकान तक नहीं दे पाएं? यह लोग बाबा दशरथ मांझी को सम्मान देते ही नहीं है। इसलिए उनकी जयंती की तारीख भूलकर उनका और दलित समाज का अपमान कर रहे हैं। 

राजद ने कहा- भाजपा वाले कुछ भी कर सकते हैं
वहीं राजद के महासचिव और ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र गोप ने कहा कि भाजपा की पुरानी आदत है। भाजपा वाले कुछ भी कर सकते हैं। अगर वो चाहे तो दिन को रात भी कह सकती है। भाजपा के लोग संविधान से देश नहीं चला रहे हैं। देश में अपना संविधान लागू कर रहे हैं, यही कारण है कि बाबा दशरथ मांझी की 14 जनवरी को जन्मतिथि है तो लोग आज मना रहे हैं। खाता न वही भाजपा कहे, वह सही।

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