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Bihar: शहादत का हिसाब बाकी! अंग्रेजी गोली के सामने डटे थे बिहटा के वीर, 72 साल पुराने दस्तावेज से हुआ खुला

Fri, 15 Aug 2025 04:13 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: आशुतोष प्रताप सिंह Updated Fri, 15 Aug 2025 04:13 PM IST
सार

बिहटा में 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान शहीद हुए चार गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों की कहानी 72 साल पुराने दस्तावेज़ से सामने आई।
 

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four unknown heroes bihta quit india movement 1942 72 year old document reveals
72 साल पुराने दस्तावेज़ से सामने आई शहादत की कहानी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश की आज़ादी के 79 साल बाद बिहटा क्षेत्र में शहीद हुए चार गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों की कहानी सामने आई है। बिहार राज्य अभिलेखागार में सुरक्षित 13 फरवरी 1953 की बिहार स्पेशल ब्रांच, सीआईडी की रिपोर्ट के अनुसार, 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान बिहटा में चार क्रांतिकारी शहीद हुए थे। शहीदों में बिहटा के गोपाल साह (पिता रामसेवक साह), कैलाश राउत (पिता देवलाल राउत, खेड़लपुरा), देव लाल साह (पिता जित्तो साह, अखगांव, थाना संदेश, भोजपुर) और सदिसोपुर के गोपाल साह (पिता रामगोबिंद साह) शामिल थे।
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सदिसोपुर निवासी पत्रकार और शहीदों के वंशज दीपक गुप्ता ने बताया कि 11 अगस्त 1942 को ये चारों क्रांतिकारी राघोपुर से सरकारी प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचाते हुए बिहटा पहुंचे। उन्होंने रेलवे स्टेशन और प्रखंड कार्यालय के पास तोड़फोड़ की और तार सेवा नष्ट कर दी। मौके पर अंग्रेज़ी सेना ने दस्ता भेजकर उन्हें दबाने का प्रयास किया। इस संघर्ष में तीन क्रांतिकारी मौके पर शहीद हो गए। सदिसोपुर के गोपाल साह ने एक अंग्रेज सैनिक को मार गिराया, लेकिन पीछा करते हुए अंग्रेज सैनिकों ने उन्हें भी सदिसोपुर देवी स्थान के पास गोली मारकर शहीद कर दिया। स्थानीय लोग और शहीदों के वंशज अब प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि उनके नाम प्रखंड परिसर स्थित शहीद पट्टिका पर अंकित किए जाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियां इन वीरों की शहादत से प्रेरणा ले सकें।
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