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Bihar news: केसीसी ऋण मामले में उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला, तत्कालीन बैंक प्रबंधक पर 30 हजार का लगा जुर्माना
Tue, 21 Jul 2026 06:11 PM IST
पटना ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतास
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतास
Published by: पटना ब्यूरो
Updated Tue, 21 Jul 2026 06:11 PM IST
सार
Bihar News: रोहतास जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने किसान क्रेडिट कार्ड ऋण मामले में बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक और जोनल महाप्रबंधक पर 30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने 60 दिनों के भीतर राशि का भुगतान करने का आदेश दिया है। आयोग का ये फैसला तकरीबन छः वर्षों बाद आया है।
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न्यायालय, जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
रोहतास जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने केसीसी ऋण अस्वीकृति मामले में लगभग छः वर्ष बाद एक बड़ा फैसला सुनाते हुए कॉरपोरेशन बैंक (वर्तमान यूनियन बैंक) के तत्कालीन शाखा प्रबंधक कृष्णा कुमार एवं बैंक के जोनल महाप्रबंधक पर तीस हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। आयोग ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि विपक्षी बैंक अधिकारी 60 दिनों के भीतर परिवादी को उक्त जुर्माना राशि अदा करें अन्यथा वास्तविक भुगतान तिथि तक इस राशि पर 9% वार्षिक साधारण ब्याज भी देय होगा।
केसीसी ऋण के लिए आवेदन
बता दें कि रोहतास जिले के करगहर थाना क्षेत्र अंतर्गत सोनी गांव निवासी शिव शंकर तिवारी द्वारा खेती के लिए किसान क्रेडिट कार्ड द्वारा ऋण प्राप्त करने हेतु सासाराम के कचहरी स्थित कॉरपोरेशन बैंक (वर्तमान यूनियन बैंक) की शाखा में एक आवेदन दिया गया था। बैंक प्रबंधक के निर्देशानुसार किसान ने ऋण के लिए सभी जरूरी दस्तावेज बैंक में जमा किये तथा बैंक द्वारा विभिन्न शुल्कों के रूप में कुल 7560 रुपए की राशि भी जमा कराई गई, लेकिन बावजूद इसके किसान को ऋण उपलब्ध नहीं कराया गया।
40 हजार रुपये की अतिरिक्त राशि की मांग
दरअसल जमीन जांच, दस्तावेज और शुल्क जमा होने के बावजूद तत्कालीन बैंक प्रबंधक कृष्णा कुमार ने ऋण स्वीकृत करने के एवज में किसान से 40 हजार रुपये की अतिरिक्त राशि की मांग की। हालांकि किसान ने जब उक्त राशि देने से इनकार किया, तो बैंक प्रबंधक ने दुर्भावनापूर्ण रवैया अपनाते हुए लगभग दो वर्षों तक मामले को लटकाए रखा। जिससे किसान को शारीरिक, मानसिक एवं आर्थिक रूप से परेशानी उठानी पड़ी।
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यह भी पढ़ें: अंतिम सक्षमता परीक्षा का परिणाम आया; पास नहीं कर सके निकाय शिक्षकों का क्या होगा अब?
लगभग छः साल बाद आयोग का फैसला
वहीं बैंक प्रबंधक के मनमाने रवैए से परेशान होकर किसान ने जब वर्ष 2019 में न्याय के लिए जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया, तो लंबी सुनवाई और परिवादी की ओर से प्रस्तुत साक्ष्य के आधार पर जिला उपभोक्ता फोरम ने किसान के पक्ष में अब बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने परिवादी को हुई शारीरिक, मानसिक एवं आर्थिक क्षति के साथ-साथ वाद खर्च हेतु एक मुस्त 30 हजार रुपए अदा करने का आदेश दिया है।
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केसीसी ऋण के लिए आवेदन
बता दें कि रोहतास जिले के करगहर थाना क्षेत्र अंतर्गत सोनी गांव निवासी शिव शंकर तिवारी द्वारा खेती के लिए किसान क्रेडिट कार्ड द्वारा ऋण प्राप्त करने हेतु सासाराम के कचहरी स्थित कॉरपोरेशन बैंक (वर्तमान यूनियन बैंक) की शाखा में एक आवेदन दिया गया था। बैंक प्रबंधक के निर्देशानुसार किसान ने ऋण के लिए सभी जरूरी दस्तावेज बैंक में जमा किये तथा बैंक द्वारा विभिन्न शुल्कों के रूप में कुल 7560 रुपए की राशि भी जमा कराई गई, लेकिन बावजूद इसके किसान को ऋण उपलब्ध नहीं कराया गया।
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40 हजार रुपये की अतिरिक्त राशि की मांग
दरअसल जमीन जांच, दस्तावेज और शुल्क जमा होने के बावजूद तत्कालीन बैंक प्रबंधक कृष्णा कुमार ने ऋण स्वीकृत करने के एवज में किसान से 40 हजार रुपये की अतिरिक्त राशि की मांग की। हालांकि किसान ने जब उक्त राशि देने से इनकार किया, तो बैंक प्रबंधक ने दुर्भावनापूर्ण रवैया अपनाते हुए लगभग दो वर्षों तक मामले को लटकाए रखा। जिससे किसान को शारीरिक, मानसिक एवं आर्थिक रूप से परेशानी उठानी पड़ी।
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लगभग छः साल बाद आयोग का फैसला
वहीं बैंक प्रबंधक के मनमाने रवैए से परेशान होकर किसान ने जब वर्ष 2019 में न्याय के लिए जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया, तो लंबी सुनवाई और परिवादी की ओर से प्रस्तुत साक्ष्य के आधार पर जिला उपभोक्ता फोरम ने किसान के पक्ष में अब बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने परिवादी को हुई शारीरिक, मानसिक एवं आर्थिक क्षति के साथ-साथ वाद खर्च हेतु एक मुस्त 30 हजार रुपए अदा करने का आदेश दिया है।