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कार्डिकॉन 2026: पटना में जुटे देश भर के हृदय रोग विशेषज्ञ, मंत्री निशांत ने क्या कहा, कौन सा प्रस्ताव रखा गया

Sun, 01 Nov 2026 10:26 AM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: आदित्य आनंद Updated Sun, 01 Nov 2026 10:26 AM IST
सार

कार्डिकॉन 2026 में देशभर के हृदय रोग विशेषज्ञों ने इलाज की नई तकनीकों और जटिल मामलों पर चर्चा की। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने उद्घाटन करते हुए युवाओं में बढ़ते हार्ट अटैक और हार्ट फेल्योर के मामलों पर चिंता जताई। विशेषज्ञों ने बताया कि आधुनिक कैथेटर तकनीक से नवजात शिशुओं के जन्मजात हृदय रोगों का भी इलाज संभव है। सम्मेलन में एंजियोप्लास्टी, मिनिमली इनवेसिव बाईपास सर्जरी और हार्ट अटैक के गोल्डन ऑवर में उपचार के महत्व पर भी चर्चा हुई।

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CARDICON 2026: Experts Discuss Latest Heart Disease Treatment Technologies in Patna
मंत्री निशांत के साथ सीएसआई बिहार के अध्यक्ष डॉक्टर संजीव व अन्य। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 पटना में शनिवार को कार्डियोलॉजी सोसाइटी ऑफ इंडिया (सीएसआई), बिहार चैप्टर का 32वां वार्षिक अधिवेशन कार्डिकॉन 2026 शुरू हुआ। होटल मौर्य में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में देशभर के जाने-माने हृदय रोग विशेषज्ञ और कार्डियक सर्जन जुटे हैं। इस वर्ष सम्मेलन की थीम रोकथाम से उपचार तक रखी गई है। इसमें हृदय रोगों की रोकथाम, आधुनिक उपचार पद्धतियों और चिकित्सा की नई तकनीकों पर चर्चा हो रही है। बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने युवाओं में हार्ट अटैक, हार्ट फेल्योर और अचानक हृदय गति रुकने की बढ़ती घटनाओं को गंभीर चिंता का विषय बताया।
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स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने कहा कि हृदय रोगों से निपटने के लिए समय पर पहचान, रोकथाम, स्वस्थ जीवनशैली और जन-जागरूकता बेहद जरूरी है। बिहार सरकार स्वास्थ्य संबंधी जानकारी जुटाने के लिए घर-घर अभियान चला रही है। इसके तहत हृदय रोगों से जुड़े मामलों की भी गणना की जाएगी। सरकार राज्य में हृदय रोगों की व्यापकता का आकलन करने के साथ उपलब्ध अस्पतालों और चिकित्सा सुविधाओं की स्थिति की समीक्षा करेगी। इसके आधार पर राज्य के सभी हिस्सों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना और मुख्यमंत्री सहायता कोष के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को इलाज के लिए आर्थिक मदद देने की व्यवस्था की भी बात कही। 
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सम्मेलन के अध्यक्ष और एम्स पटना के सीटीवीएस विभागाध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में बिहार में 'कार्डियोलॉजी कमीशन ऑफ बिहार' यानी बिहार हृदय रोग आयोग के गठन का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि इस आयोग के माध्यम से हृदय रोगों की रोकथाम और उपचार के लिए एक समेकित व्यवस्था विकसित की जा सकती है। इसके तहत चिकित्सा शिक्षा के उच्च मानकों, आधुनिक उपकरणों, अस्पतालों के बुनियादी ढांचे और चिकित्सा सुविधाओं की निगरानी सुनिश्चित की जा सकेगी। इसका उद्देश्य आधुनिक हृदय चिकित्सा की सुविधाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। 
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सीएसआई बिहार चैप्टर के सचिव और हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि वैज्ञानिक सत्रों में देश के जाने-माने हृदय रोग विशेषज्ञ जटिल हृदय रोगों के उपचार और आधुनिक तकनीकों पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि 'हार्ट की सुरक्षा, सबकी सुरक्षा' के संदेश को दैनिक जीवन में अपनाने की जरूरत है। उन्होंने खान-पान में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम रखने तथा डायबिटीज और हाइपरटेंशन से बचाव पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि गंभीर हार्ट अटैक के मामलों में भी समय पर इलाज मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकती है और हृदय को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। 
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CARDICON 2026: Experts Discuss Latest Heart Disease Treatment Technologies in Patna
कॉर्डिकॉन 2026 का शुभारंभ करते मंत्री निशांत कुमार व दिग्गज हृदय रोग विशेषज्ञ। - फोटो : अमर उजाला
नवीनतम तकनीकों से जटिल हृदय रोगों का इलाज संभव
सम्मेलन के पहले दिन आयोजित वैज्ञानिक सत्रों में देश के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों से आए विशेषज्ञों ने हृदय रोगों के निदान और उपचार की नई तकनीकों पर व्याख्यान दिए। प्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अरविंद कुमार ने एंजियोप्लास्टी की आधुनिक तकनीकों और जटिल मामलों के प्रबंधन पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि नई तकनीकों की मदद से अब लेफ्ट मेन कोरोनरी आर्टरी जैसी गंभीर ब्लॉकेज में भी एंजियोप्लास्टी के जरिये मरीजों की जान बचाना संभव हो रहा है। डॉ. बीबी भारती ने एंजियोप्लास्टी के दौरान कैथेटर के सही चयन और उसकी पोजिशनिंग के महत्व को समझाया। डॉ. नीरव कुमार ने मोटापे और शरीर में अत्यधिक वसा को हृदय रोगों का प्रमुख जोखिम कारक बताते हुए इससे बचाव के उपायों पर चर्चा की। वहीं, आईजीआईसी के डॉ. रवि विष्णुप्रसाद ने हार्ट अटैक के मामलों में गोल्डन ऑवर के भीतर इलाज शुरू करने की अहमियत बताई। उन्होंने कहा कि समय पर उपचार मिलने से मरीज की जान बचाने की संभावना बढ़ जाती है।

नवजात शिशुओं के दिल का इलाज भी कैथेटर तकनीक से संभव
पहले दिन का विशेष आकर्षण डॉ. ए.के. ठाकुर मेमोरियल ओरेशन रहा। यह व्याख्यान बिहार में कार्डियोलॉजी के विकास में योगदान देने वाले स्वर्गीय डॉ. ए.के. ठाकुर की स्मृति में आयोजित किया जाता है। इस वर्ष बेंगलुरु की प्रसिद्ध पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. आईबी विजयलक्ष्मी ने व्याख्यान दिया। उन्होंने नवजात शिशुओं में जन्मजात हृदय रोगों के उपचार में कैथेटर आधारित तकनीकों की उपयोगिता और सावधानियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आधुनिक तकनीक से नवजात शिशुओं के दिल में छेद और रक्त वाहिकाओं की बनावट में गड़बड़ी जैसी समस्याओं का भी कैथ लैब में उपचार संभव हो रहा है। डॉ. के. हीरामथ ने हार्ट वाल्व बैंक की उपयोगिता और बिहार में इसकी स्थापना की संभावनाओं पर चर्चा की। वहीं, डॉ. एसके सिन्हा ने बीटिंग हार्ट और मिनिमली इनवेसिव बाईपास सर्जरी के फायदों की जानकारी दी। अन्य वैज्ञानिक सत्रों में डॉ. अनूप सिंह ने हाई ब्लड प्रेशर की आपातकालीन स्थिति में उपचार, डॉ. प्रशांत चंद्र सिन्हा ने पल्मोनरी एम्बोलिज्म और भागलपुर के डॉ. वीरेंद्र कुमार ने पैरों में रक्त की आपूर्ति कम होने से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा की। डॉ. आकांक्षा सिंह ने आपातकालीन स्थिति में सीने में दर्द की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों के त्वरित उपचार के बारे में बताया।

देशभर के विशेषज्ञों ने लिया हिस्सा
उद्घाटन समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक डॉ. राजू अग्रवाल, आईजीआईसी के निदेशक डॉ. सुनील कुमार, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. कमलेश ठाकुर, रूबन मेमोरियल हॉस्पिटल के प्रबंध निदेशक डॉ. सत्यजीत कुमार सिंह और पीएमसीएच के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह समेत कई चिकित्सक मौजूद रहे। आयोजन सचिव डॉ. विपिन कुमार ने स्वास्थ्य मंत्री और सभी अतिथियों के प्रति आभार जताया। वैज्ञानिक सत्रों में मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, नई दिल्ली के डॉ. मोहित गुप्ता, वेल्लोर के डॉ. जैकब जोश, एम्स दिल्ली के डॉ. रामकृष्णन और डॉ. राकेश यादव, वाराणसी के डॉ. आशीष जायसवाल, श्री चित्रा इंस्टीट्यूट तिरुवनंतपुरम की डॉ. दीपा एस. कुमार, हैदराबाद के डॉ. कुमार नारायण, बेंगलुरु की डॉ. आईबी विजयलक्ष्मी और डॉ. सीएस हीरामथ, मुंबई के डॉ. अनूप आर. बकसांडे समेत देश के कई प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
 
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