Bihar: कैमूर के हरसू ब्रह्म स्थान में नवरात्र पर लगता है भूतों का मेला, उमड़ती है भक्तों की भीड़
Bihar News: कविता मिश्रा बताती हैं कि वे 15 साल से बाबा के दर्शन करने आ रही हैं। उनका कहना है कि संतान की समस्या हो या भूत-प्रेत की बाधा, सब बाबा की कृपा से दूर हो जाती है। पढ़ें पूरी खबर
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नवरात्र के मौके पर कैमूर जिले के चैनपुर प्रखंड स्थित हरसू ब्रह्म स्थान मंदिर में भूतों का मेला लगता है। यहां पूरे नौ दिनों तक लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। लोगों का विश्वास है कि भूत-प्रेत या किसी भी प्रकार की बाधा बाबा हरसू ब्रह्म के दरबार में शांत हो जाती है। भक्तों का कहना है कि यहां आने से मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की परेशानियां दूर हो जाती हैं। यही कारण है कि इस धाम को लोग भूत-प्रेत का सुप्रीम कोर्ट भी कहते हैं।
क्या है इसका इतिहास
मान्यता है कि बाबा हरसू ब्राह्मण जाति से थे और राजा शालिवाहन के राजपुरोहित थे। राजा की संतान न होने पर बाबा ने दूसरी शादी की सलाह दी। इससे नाराज रानी ने राजा से बाबा का महल ध्वस्त करा दिया। इस पर क्रोधित होकर बाबा ने राजा के राजपाट का विनाश कर दिया और स्वयं शरीर त्याग दिया। उसी दिन से यहां उनका ब्रह्म स्थान स्थापित हो गया और पूजा-अर्चना की परंपरा शुरू हुई।
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श्रद्धालुओं की मान्यता
गाजीपुर (यूपी) के श्रद्धालु शक्ति त्रिपाठी का कहना है कि वे 15 साल से परेशान थे, डॉक्टर ने उन्हें ब्रेन ट्यूमर बताया था। लेकिन बाबा के दरबार में आने के बाद सब ठीक हो गया और घर से भूत-प्रेत का साया भी खत्म हो गया। मिर्जापुर (यूपी) की कविता मिश्रा बताती हैं कि वे 15 साल से बाबा के दर्शन करने आ रही हैं। उनका कहना है कि संतान की समस्या हो या भूत-प्रेत की बाधा, सब बाबा की कृपा से दूर हो जाती है। मंदिर के कोषाध्यक्ष बद्रीनाथ शुक्ला के मुताबिक बाबा हरसू ब्रह्म का इतिहास बेहद पुराना है। देश-विदेश से लोग अपनी समस्या लेकर आते हैं और यहाँ पूजा-पाठ करने से उनकी बाधाएँ दूर होती हैं। जिन पर भूत-प्रेत का साया होता है, उन्हें 15 माह तक पूजा करने की सलाह दी जाती है।
आस्था या अंधविश्वास?
भले ही हम विज्ञान युग में जी रहे हों, लेकिन आज भी लोग आस्था और अंधविश्वास के बीच झूल रहे हैं। सरकार अंधविश्वास और पाखंड के खिलाफ अभियान चलाती है, पर नवरात्र के दौरान हरसू ब्रह्म स्थान पर मानसिक पीड़ितों और श्रद्धालुओं का विशाल जमावड़ा यही दिखाता है कि लोगों के लिए यह स्थान आज भी आस्था का बड़ा केंद्र है।