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Bihar News: नगर निकाय चुनाव पर लगेगी रोक? पटना हाईकोर्ट सुनाएगा चार अक्तूबर को फैसला
Fri, 30 Sep 2022 10:31 PM IST
वीरेंद्र शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Fri, 30 Sep 2022 10:31 PM IST
सार
दिसंबर 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि राज्य सरकार उच्च न्यायलय द्वारा तय किए गए मानकों को पूरा न करने पर स्थानीय निकाय चुनाव में आरक्षण की अनुमति नहीं दी जा सकती है।
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निकाय चुनाव।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
बिहार में होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव के लिए पिछड़े वर्ग के आरक्षण को लेकर पेंच फंसा हुआ है। हालांकि, इसपर पटना हाईकोर्ट चार अक्तूबर को सुनवाई करेगा। पिछड़े वर्ग के आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा कि राज्य सरकार स्थानीय निकाय चुनाव में पिछड़े वर्ग को आरक्षण देने के लिए पहले एक विशेश आयोग का गठन करें। आयोग अध्ययन करे कि कौन सा वर्ग वाकई पिछड़ा है। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही उन्हें आरक्षण दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, अगर इन शर्तो को राज्य सरकार की तरफ से पूरा नहीं किया जाता है तो पिछड़े वर्ग के लिए रिजर्व सीट को भी सामान्य ही माना जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने रखा था अपना फैसला सुरक्षित
सुप्रीम कोर्ट में स्थानीय निकाय चुनाव में आरक्षण के मुद्दे पर सुनवाई हुई थी। प्रदेश सरकार की तरफ से एडवोकेट ललित किशोर के साथ सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने सरकार का पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान याचिका दायर करने वाले वकीलों ने सरकार के निर्णय को गलत बताया, जबकि दूसरे पक्ष ने फैसले को सही ठहराया था। इस दौरान याचिका दायर करने वाले पक्ष के वकीलों ने दलील दी कि चुनाव में आरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अनदेखी की गई है। पटना हाईकोर्ट ने दोनों पक्ष की दलील सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।
दिसंबर 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि राज्य सरकार तय मानकों को पूरा न होने तक स्थानीय निकाय चुनाव में आरक्षण की अनुमति तक नहीं दी जा सकती है। चुनाव के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 2010 में मानक तय किए थे। आरोप है कि सरकार ने मानकों को पूरा करे बिना ही चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी। सरकार के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पटना हाईकोर्ट में इस संबंध में एक फैसला लंबित है। सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि 10 अक्तूबर को होने वाले पहले फेज के चुनाव से पहले पटना हाईकोर्ट को अपना फैसला सुना देना चाहिए।
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हाईकोर्ट ने रखा था अपना फैसला सुरक्षित
सुप्रीम कोर्ट में स्थानीय निकाय चुनाव में आरक्षण के मुद्दे पर सुनवाई हुई थी। प्रदेश सरकार की तरफ से एडवोकेट ललित किशोर के साथ सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने सरकार का पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान याचिका दायर करने वाले वकीलों ने सरकार के निर्णय को गलत बताया, जबकि दूसरे पक्ष ने फैसले को सही ठहराया था। इस दौरान याचिका दायर करने वाले पक्ष के वकीलों ने दलील दी कि चुनाव में आरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अनदेखी की गई है। पटना हाईकोर्ट ने दोनों पक्ष की दलील सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।
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दिसंबर 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि राज्य सरकार तय मानकों को पूरा न होने तक स्थानीय निकाय चुनाव में आरक्षण की अनुमति तक नहीं दी जा सकती है। चुनाव के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 2010 में मानक तय किए थे। आरोप है कि सरकार ने मानकों को पूरा करे बिना ही चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी। सरकार के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पटना हाईकोर्ट में इस संबंध में एक फैसला लंबित है। सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि 10 अक्तूबर को होने वाले पहले फेज के चुनाव से पहले पटना हाईकोर्ट को अपना फैसला सुना देना चाहिए।
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