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नरेंद्र मोदी को पप्पू की ललकार
पंकज प्रियदर्शी/बीबीसी संवाददाता
Updated Mon, 28 Apr 2014 11:11 AM IST
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सभा क्षेत्र इस समय हाई प्रोफाइल बना हुआ है क्योंकि यहां से जनता दल (यू) के अध्यक्ष शरद यादव भी चुनाव लड रहे हैं। पप्पू यादव और भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार विजय कुमार सिंह से उन्हें कडी टक्कर भी मिल रही है।
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अजित सरकार हत्याकांड में कई वर्षों तक जेल में रहे पप्पू यादव को पिछले साल पटना हाई कोर्ट ने रिहा कर दिया था। इसके बाद पप्पू यादव जेल से छूटे और उन्हें लालू प्रसाद यादव ने मधेपुरा से टिकट दे दिया।
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हालांकि उनकी पत्नी रंजीता रंजन बगल के सुपौल से कांग्रेस की उम्मीदवार हैं। मधेपुरा में मुझे भी क्लिक करें पप्पू यादव के जनसंपर्क अभियान को नजदीक से देखने का मौका मिला। उस रैली में पप्पू यादव जनता से ज्यादा से ज्यादा जुडने की कोशिश कर रहे थे।
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नारा
वे लोगों से वोट तो मांग ही रहे हैं, साथ ही अपने काम की दुहाई भी दे रहे हैं। पप्पू यादव बुजुर्गों से आशीर्वाद मांगते हैं, कहते हैं कि वे उनके बेटे की तरह हैं, मैथिली में बात करते हैं। उनकी बातें सुनकर लोग तालियां बजाते हैं। उनके साथ बडी संख्या में युवा हैं, जो उनके नाम का नारा लगाते हैं।
उनके भाषणों से ये भी अहसास होता है कि उनके लिए पार्टी कोई मायने नहीं रखती। अगर राष्ट्रीय जनता दल उन्हें टिकट नहीं देता, तो भी वे चुनाव लडते और निर्दलीय लडते।
लेकिन वे अपनी प्राथमिकता भी गिनाते हैं। पप्पू यादव कहते हैं कि राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने उन्हें एक जिम्मेदारी सौंपी है।
उन्होंने कहा, "क्लिक करें लालू यादव ने मुझे जिम्मेदारी दी है। ऐसी ताकत, जिसे गीता पर भरोसा नहीं, जिसे संविधान पर भरोसा नहीं, जिसे लोकतंत्र पर भरोसा नहीं, जिसे इंसानियत पर भरोसा नहीं, जिसे भारतीय संस्कृति पर भरोसा नहीं, उसे रोकना है।"
अपने पार्टी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की चर्चा करते हुए वे कहते हैं कि सांप्रदायिकता को रोकने के लिए एक व्यक्ति हैं, वो हैं लालू यादव।
वे चुनौती देते हुए कहते हैं- क्लिक करें नरेंद्र मोदी को भाजपा से हटाकर निर्दलीय के रूप में चुनाव लडने को कहिए ना, किसी में हिम्मत नहीं, सिर्फ पप्पू यादव ही ऐसा कर सकते हैं।
पप्पू यादव ने कहा, "हम जब जहां चाहें निर्दलीय के रूप में चुनाव लडकर जीत हासिल कर सकते हैं।"
पप्पू यादव अपनी जनसभा में सामाजिक न्याय की चर्चा करते हैं, सामाजिक समरसता के फायदे गिनाते हैं, लेकिन जब सांप्रदायिकता की बात करते हैं, तो भाजपा और नरेंद्र मोदी पर निशाना लगाना नहीं भूलते।
आलोचना
वे नीतीश कुमार की भी आलोचना करते हैं, जिन्होंने भाजपा के साथ गठबंधन सरकार चलाई।
क्लिक करें भाजपा की ओर इशारा करते हुए वे कहते हैं, "एक पार्टी सांप्रदायिक है, देश को तोडने वाली। उसका नेता लाखों लोगों का हत्यारा है। उसने इंसानियत का कत्लेआम किया है। झूठ की नींव, झूठ की खेती। वह सामाजिक न्याय का विरोधी है और उद्योगपतियों, पूंजीपतियों और माफियाओं के हाथों में है।"
उन्होंने नीतीश के कार्यकाल की चर्चा करते हुए कहा कि हर घर में आरएसएस, हर गांव में आरएसएस को लाने की कोशिश हुई।
कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल के गठबंधन पर पप्पू यादव कहते हैं कि वे सांप्रदायिक शक्तियों को लाभ नहीं पहुंचाना चाहते थे। उन्होंने कहा, "गोलबंद होने का कारण ये था कि हम मिलकर इकट्ठे होकर सांप्रदायिकता को रोकेंगे। हम केंद्र में सामाजिक न्याय की सरकार बनाएंगे।"
नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए वे कहते हैं कि संविधान को लात तले दबाकर सिर्फ एक व्यक्ति का उदय दिखाया जा रहा है। पप्पू यादव गुजरात में नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में हुए विकास पर भी सवाल उठाते हैं। वे कहते हैं कि अगर तुलना करें तो कांग्रेस ने इतने वर्षों में इस देश में लाख गुना बेहतर काम किया है।
पप्पू यादव कहते हैं कि सांप्रदायिक सरकार को रोकना पूरे देश की आवाज है और सांप्रदायिकता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।