Padma Shri Award: आनंद कुमार, सुभद्रा देवी और कपिलदेव प्रसाद को पद्मश्री, राष्ट्रपति ने किया सम्मानित
बिहार के तीन शख्सियत को पद्मश्री सम्मान मिला है। इनमें सुपर थर्टी के संस्थापक आनंद कुमार, पेपरमेसी आर्टी में उत्कृष्ट योगदान देने वाली सुभद्रा देवी और बावन बूटी कला को पहचान दिलाने वाले कपिलदेव प्रसाद शामिल हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बिहार के तीन शख्सियत को पद्मश्री सम्मान मिला है। इनमें सुपर-30 के संस्थापक आनंद कुमार, पेपरमेसी आर्टी में उत्कृष्ट योगदान देने वाली सुभद्रा देवी और बावन बूटी कला को पहचान दिलाने वाले कपिलदेव प्रसाद शामिल हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने PM मोदी समेत अन्य कई गणमान्य अतिथियों की मौजूदगी में इन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा।पद्म श्री से सम्मानित होने की घोषणा 25 जनवरी को की गई थी।
बच्चों के लिए संघर्ष करने वाले शिक्षकों को किया डेडिकेटेड
आनंद कुमार ने 2002 में सुपर 30 की स्थापना की थी जिसमें प्रत्येक वर्ष 30 गरीब मेधावी बच्चों का चयन कर वह उन्हें मुफ्त में IIT की नौकरी के लिए तैयारी करवाते हैं। तैयारी के साथ साथ उन बच्चों के रहने, खाने और पढाई के लिए कॉपी और किताबों की व्यवस्था भी वहां व्यवस्था है। आनंद कुमार ने इस सम्मान को ग्रहण करते हुए कहा कि यह पुरस्कार यह एक संघर्ष को पहचान और उसे दी जा रही प्रतिष्ठा है, इसलिए संघर्ष के साथी परिवारजनों को मुझसे ज्यादा इस प्रतिष्ठापूर्ण अवसर का इंतजार है। उन्होंने कहा कि मैं यह सम्मान उन शिक्षकों को डेडिकेट करना चाहता हूं जो वर्तमान में रात-दिन विद्यार्थियों का भविष्य संवारने में लगे रहते हैं। वह अपने इस उपलब्धी का श्रेय अपने सहयोगियों और परिवार के सदस्यों को दिया है।
कपिल देव प्रसाद को पद्म श्री का सम्मान उनके 52 बूटी कला को एक पहचान देने के दी गई है। वह 15 साल की उम्र से ही 52 बूटी कला से जुड़े हुए हैं। कपिल देव प्रसाद ने अपने 55 सालों से बुनकारी का काम करते हुए अब तक कई लोगों को इसकी ट्रेनिंग दे चुके हैं। वह आज भी लोगों को 52 बूटी कला की ट्रेनिंग दे रहे हैं। 52 बूटी कला से उनके द्वारा निर्मित साड़ियां आज भी लोगों काफी पसंद करते हैं।
मधुबनी की पेपर मेसी आर्ट की वयोवृद्ध साधिका सुभद्रा देवी को भी पेपर मेसी आर्ट कला के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान दिया गया। वह पेपर मेशी आर्टिस्ट हैं। पेपरमेसी मूल रूप से जम्मू-कश्मीर की कला के रूप में प्रसिद्ध है, लेकिन सुभद्रा देवी बचपन में इस कला से खेला करती थीं। अब जब पहली बार इस कला को बढ़ावा देने वाले किसी कलाकार के नाम पद्मश्री की घोषणा हुई तो कला और फिल्म समीक्षक विनोद अनुपम ने भी इस कला और कलाकार दोनों की जमकर तारीफ की।