Bihar News: प्रथम राष्ट्रपति की जयंती पर लोगों ने कहा- मान, सम्मान, स्वाभिमान के प्रतीक हैं राजेंद्र बाबू
ग्रामीणों ने कहा कि डॉ राजेन्द्र बाबू ने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया लेकिन, उनको सम्मान के नाम पर केवल भाषण दिया गया।
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सीवान जिले का एक छोटा सा गांव, जहां किसी समय एक घर में एक बरामदे में बैठ कर मुल्क को आजाद कराने की रणनीति तैयार की जाती थी। एक ऐसा गांव जिसने अपने मिट्टी में पले बढ़े एक लाल के रूप में देश को पहले राष्ट्रपति दिया। एक ऐसा गांव जिसे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी समेत अनेक विभूतियों के आतिथ्य का गौरव हासिल हुआ। हम बात कर रहे हैं देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद के गांव की। यह गांव सीवान जिला मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस गांव का नाम है जीरादेई।
देश के प्रथम राष्ट्रपति की जयंती पर सीवान जिला पदाधिकारी मुकुल कुमार गुप्ता ने हरी झंडी दिखाकर प्रभात फेरी रवाना किया। उसके बाद उनके प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और फिर जीरादेई उनके पैतृक गांव के लिए रवाना हुए। वही सीवान के एमएलए सह बिहार विधानसभा अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी भी डॉ राजेन्द्र बाबू के प्रतिमा पर माल्यार्पण करने पहुंचे। यह वही गांव है, जिसे देश के पहले राष्ट्रपति देने का गौरव प्राप्त है।
डॉ राजेन्द्र बाबू ने अपना पूरा जीवन देश समर्पित कर
ग्रामीणों ने कहा कि जिस देश को डॉ राजेन्द्र बाबू ने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उस देश के लोगों ने ही उनको सम्मान के नाम पर केवल भाषण दिया गया। भाषण देने वाले तमाम उन नेताओं को मालूम होना चाहिए कि डॉ राजेन्द्र प्रसाद सिर्फ एक व्यक्ति ही नहीं, बल्कि देश के धरोहर भी हैं। डॉ राजेन्द्र बाबू सीवान के मान सम्मान एव स्वाभिमान के प्रतीक हैं।
आज भी राजेंद्र बाबू की घर की हालत काफी जर्जर है
ग्रामीणों का आरोप है कि देश प्रथम राष्ट्रपति होने के बावजूद भी इस गांव को जो मान सम्मान या जो दर्जा मिलना चाहिए वह नहीं मिला। आज भी उनके घर की हालत काफी जर्जर है। हालांकि, इस स्थल को अब पुरातत्व विभाग को सौंप दिया गया है। विकास के नाम पर सिर्फ कागजों पर कोरम पूरा किया जा रहा है। लोगों का आरोप है कि डॉ राजेंद्र प्रसाद को आब सिर्फ किताबों तक ही सीमित रखने जैसा हालात नजर आने लगे हैं।