{"_id":"def2873e-9841-11e2-b06d-d4ae52bc57c2","slug":"not-closely-with-congress-in-bihar-jdu","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिहार में कांग्रेस के साथ कोई नजदीकी नहीं: जदयू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिहार में कांग्रेस के साथ कोई नजदीकी नहीं: जदयू
पटना/एजेंसी
Updated Fri, 29 Mar 2013 12:55 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कांग्रेस के साथ बढ़ती नजदीकियों की अटकलों को जदयू ने खारिज कर दिया है। जदयू महासचिव व सांसद केसी त्यागी ने पार्टी का रुख साफ करते हुए कहा कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिल भी जाए तो भी राजग पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। जदयू राजग का हिस्सा है और साथ रहेगा।
बिहार के लिए विशेष राज्य के दर्जे की मांग को लेकर सियासत पिछले कुछ दिनों से गर्म है। केंद्र ने मांग को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। खासकर, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्र सरकार के मंत्रियों के बीच दिखे मधुर संबंध और बयानों ने इसे हवा दे दी थी। खासकर केंद्र से द्रमुक के समर्थन वापसी के बाद उभरते समीकरण को राजग में पड़ती दरार और कांग्रेस के लिए आक्सीजन की तरह देखा जा रहा था।
यह तब और गहरा गया था जब संप्रग की नजदीकियों को लेकर जदयू की ओर से नीतीश समेत किसी भी दूसरे नेता का कोई स्पष्ट बयान नहीं आया था, लेकिन गुरुवार को चुप्पी खत्म हो गई।
विज्ञापन
पार्टी की ओर से पहली बार त्यागी ने कहा कि विशेष राज्य का दर्जा बिहार का हक है। इसे मोलभाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। अगर संप्रग सरकार बिहार को यह दर्जा देती है तो इसके बदले में समर्थन की बात सोची भी नहीं जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्टी में कभी भी इस बात पर विचार तक नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति चुनाव में जदयू ने राजग के फैसले से परे संप्रग उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी के लिए वोट दिया था। पार्टी का मानना था कि उस वक्त प्रणब ज्यादा अच्छे उम्मीदवार थे। किसी अच्छे काम में समर्थन करने का यह अर्थ नहीं कि जदयू संप्रग के साथ है।
गौरतलब है कि राजग में प्रधानमंत्री उम्मीदवार को लेकर जदयू और भाजपा में थोड़ी दूरी दिखने लगी थी। उसके बाद नीतीश ने जहां विशेष राज्य का दर्जा देने वाली सरकार के साथ खड़े होने की बात कही थी, वहीं हाल के बजट में संप्रग ने अपने नरम रुख का संकेत दिया था।
कमलेश ने अपने जिम्मेदारियों का निर्वाह सदा समय पर किया है। मौजूदा समय में उनपर सिटी संस्करण अपडेट करने के साथ-साथ अन्य राज्य (बिहार, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, राजस्थान और झारखंड) को अपडेट करने की जिम्मेदारी है। इस जिम्मेदारी को उसने उम्मीद से बेहतर पूरा किया है।
विज्ञापन
बिहार के लिए विशेष राज्य के दर्जे की मांग को लेकर सियासत पिछले कुछ दिनों से गर्म है। केंद्र ने मांग को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। खासकर, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्र सरकार के मंत्रियों के बीच दिखे मधुर संबंध और बयानों ने इसे हवा दे दी थी। खासकर केंद्र से द्रमुक के समर्थन वापसी के बाद उभरते समीकरण को राजग में पड़ती दरार और कांग्रेस के लिए आक्सीजन की तरह देखा जा रहा था।
विज्ञापन
यह तब और गहरा गया था जब संप्रग की नजदीकियों को लेकर जदयू की ओर से नीतीश समेत किसी भी दूसरे नेता का कोई स्पष्ट बयान नहीं आया था, लेकिन गुरुवार को चुप्पी खत्म हो गई।
विज्ञापन
पार्टी की ओर से पहली बार त्यागी ने कहा कि विशेष राज्य का दर्जा बिहार का हक है। इसे मोलभाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। अगर संप्रग सरकार बिहार को यह दर्जा देती है तो इसके बदले में समर्थन की बात सोची भी नहीं जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्टी में कभी भी इस बात पर विचार तक नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति चुनाव में जदयू ने राजग के फैसले से परे संप्रग उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी के लिए वोट दिया था। पार्टी का मानना था कि उस वक्त प्रणब ज्यादा अच्छे उम्मीदवार थे। किसी अच्छे काम में समर्थन करने का यह अर्थ नहीं कि जदयू संप्रग के साथ है।
गौरतलब है कि राजग में प्रधानमंत्री उम्मीदवार को लेकर जदयू और भाजपा में थोड़ी दूरी दिखने लगी थी। उसके बाद नीतीश ने जहां विशेष राज्य का दर्जा देने वाली सरकार के साथ खड़े होने की बात कही थी, वहीं हाल के बजट में संप्रग ने अपने नरम रुख का संकेत दिया था।
कमलेश ने अपने जिम्मेदारियों का निर्वाह सदा समय पर किया है। मौजूदा समय में उनपर सिटी संस्करण अपडेट करने के साथ-साथ अन्य राज्य (बिहार, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, राजस्थान और झारखंड) को अपडेट करने की जिम्मेदारी है। इस जिम्मेदारी को उसने उम्मीद से बेहतर पूरा किया है।