नीतीश बन सकते हैं जदयू के अध्यक्ष, मोदी को देंगे टक्कर
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बिहार के मुख्यमंत्री रहते केंद्र की राजनीति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विरोधी चेहरा बनने की कोशिश में जुटे नीतीश कुमार शरद यादव की जगह खुद जदयू की कमान संभाल सकते हैं। नए अध्यक्ष की घोषणा 10 अप्रैल को होने वाली पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में होगी।
इससे पहले शरद ने सार्वजनिक तौर पर चौथी बार पार्टी के संगठन की कमान संभालने से इंकार कर दिया। हालांकि चर्चा है कि संगठन की कमान संभालने की मौका दिए जाने की संभावना खत्म होने के कारण शरद ने पहले ही अध्यक्ष न बनने की घोषणा कर दी।
इस बीच जनता परिवार में शामिल जदयू, जदएस, रालोद, सजपा और झाविमो में विलय की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है। विलय के बाद संयुक्त पार्टी का नाम जन विकास पार्टी या जन विकास मोर्चा रखने पर मंथन चल रहा है।
नीतीश ने केंद्र की राजनीति में मोदी विरोधी चेहरा बनने की अपनी रणनीति पर आगे बढ़ना शुरू कर दिया है। जदयू सूत्रों का कहना है कि इसकी पहली कड़ी में वह पार्टी संगठन की कमान संभालेंगे। चूंकि पार्टी में एक व्यक्ति एक पद का फार्मूला लागू नहीं है।
शरद यादव ने चौथी बार अध्यक्ष बनने से किया इंकार
ऐसे में नीतीश मुख्यमंत्री रहते पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकते हैं। जदयू सूत्रों का यह भी कहना है कि शरद ने अनायास ही चौथी बार अध्यक्ष नहीं बनने की घोषणा नहीं की। उन्हें पार्टी में शीर्ष स्तर से इस आशय का इशारा किया जा चुका था।
यही कारण है कि शरद ने खुद ही चौथी बार अध्यक्ष ना बनने की घोषणा कर दी। गौरतलब है कि इससे पहले शरद को लगातार तीसरी बार अध्यक्ष बनाने के लिए पार्टी के संविधान में संशोधन किया गया था।
विलय पर मंथन अंतिम दौर में
पार्टी के अतिविशिष्ट सूत्र के मुताबिक जदयू, जदएस, रालोद, सजपा और झाविमो में विलय पर मंथन अपने अंतिम दौर में है। रालोद की ओर से चौधरी अजीत सिंह के पुत्र जयंत चौधरी ने बीते महीने पटना में नीतीश के साथ बैठक में विलय पर हामी भर दी थी। झाविमो के बाबूलाल मरांडी और सजपा के कमल मोरारका भी राजी हैं। फिलहाल दो नामों जन विकास पार्टी और जन विकास मोर्चा का सुझाव आया है।