आजादी के 67 साल बाद पहली बार फहराया तिरंगा
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देश में एक तरफ जहां राष्ट्रद्रोह को लेकर बहस छिड़ी है, वहीं दूसरी तरफ देशप्रेम की मिसाल पेश की जा रही है। बिहार के गया जिले में स्थित कोनार गांव में तब सबकी आंखों में खुशी के आंसू आ गए, जब उनके गांव में 67 साल बाद बुधवार को पहली बार तिरंगा फहराया गया।
नक्सल प्रभावित यह गांव सड़क और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। टेक्नोलॉजी के इस युग में भी इस गांव के लोगों को न मोबाइल पता है और न ही इंटरनेट। बुधवार को तिरंगा फहराए जाने से पहले इनमें से कई लोगों ने इसका दीदार तक नहीं किया था। गया के डीएम कुमार रवि ने यहां तिरंगा फहराया।
गया का यह गांव मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर है। यह आमस ब्लॉक के घने जंगल के बीच स्थित है। कई सालों से यह गांव मुख्य धारा से कटा हुआ था।
एसएसबी के जवानों ने तलाशा गांव
इस गांव को एसएसबी की 8वीं बटालियन के जवानों ने ढूंढ निकाला है। यह गांव नक्सलियों के प्रभाव की वजह से सड़क, बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं से दूर रहा है।
आज जो चीजें हम सब के लिए आम हैं, यहां के लोगों को उनके बारे में पता तक नहीं है। इस गांव के लोगों ने कभी रेडियो, टीवी या कोई और इलेक्ट्रॉनिक सामान नहीं देखा है। कई लोगों ने तो तिरंगे की शक्ल भी कभी नहीं देखी थी। बुधवार को एसएसबी ने जन चेतना अभियान के तहत नक्सल प्रभावित इस गांव में राष्ट्रीयता का पाठ पढ़ाया और तिरंगा फहराया। इस मौके पर गांव के लोगों ने राष्ट्रगान भी गाया।
बीएसएफ अधिकारियों और जवानों की मौजूदगी में गया के डीएम कुमार रवि ने लोगों के बीच कंबल वितरण भी किया। इस कार्यक्रम के अवसर पर लोगों को शिक्षा, बेटी बचाव, शराबबंदी आदि के प्रति लोगों को जागरूक किया गया।