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Bihar News: ‘ऑपरेशन सिंदूर हमारी संस्कृति की विरासत, बिहार है देवभूमि’, भागवत कथा के दौरान बोले अनिरुद्धाचार्य

Mon, 26 May 2025 06:32 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Mon, 26 May 2025 06:32 PM IST
सार

Muzaffarpur News: कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि आज जब भारतीय सेना ने देश विरोधी ताकतों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर अभियान का नाम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ रखा, तो यह हमारी संस्कृति और परंपरा को सम्मान देने जैसा है।

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Operation Sindoor is heritage of our culture, Bihar is Devbhoomi, Aniruddhacharya said during Bhagwat Katha
मुजफ्फरपुर में भागवत कथा के दौरान कथावाचक अनिरुद्धाचार्य - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भागवत कथा वाचक अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर कोई सामान्य नाम नहीं, बल्कि यह हमारी सनातन संस्कृति और आस्था की गहराई से जुड़ा एक सशक्त प्रतीक है। उन्होंने यह बातें मुजफ्फरपुर के पताही मधुबनी चौसिमा में चल रही पांच दिवसीय भागवत कथा के तीसरे दिन हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहीं। कथा के दौरान उन्होंने बिहार की भूमि को ‘देवभूमि’ करार दिया और यहां की भक्ति परंपरा की दिल खोलकर प्रशंसा की।

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सिंदूर और मिथिला की परंपरा का सांस्कृतिक जुड़ाव
कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने रामायण काल की घटनाओं को उद्धृत कर बताया कि जब माता सीता ने अपनी मांग में लंबा सिंदूर लगाया था, तब उन्होंने यह संदेश दिया था कि सिंदूर पति की लंबी आयु का प्रतीक है। इसी प्रेरणा से हनुमान जी ने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगाया था, जिससे इस प्रतीक का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व स्थापित हुआ।
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उन्होंने कहा कि आज जब भारतीय सेना ने देश विरोधी ताकतों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर इस अभियान का नाम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ रखा, तो यह हमारी संस्कृति और परंपरा को सम्मान देने जैसा है। यह न केवल एक सैन्य ऑपरेशन, बल्कि एक सांस्कृतिक संदेश भी है कि भारत अपनी जड़ों को नहीं भूलता।
 
बिहार को बताया भक्ति और श्रद्धा का केंद्र
अनिरुद्धाचार्य ने बिहार के लोगों की आस्था, श्रद्धा और धर्म के प्रति समर्पण को विशेष रूप से सराहा। उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में कथा वाचन कर चुके हैं, लेकिन बिहार जैसी भक्तिभावना कहीं नहीं देखी। उन्होंने कहा कि धूप, गर्मी और असुविधा के बावजूद यहां की जनता जिस संख्या और उत्साह से कथा सुनने आती है, वह इस बात का प्रमाण है कि बिहार भगवान और भक्त की भूमि है।

 
उन्होंने यह भी जोड़ा कि बिहार की मिट्टी में एक अद्भुत ऊर्जा और अध्यात्मिकता है, जो यहां की परंपरा को विशेष बनाती है। उन्होंने मिथिला की भूमि को श्रद्धा के साथ नमन कर कहा कि यहां कथा करना उनके लिए गौरव का विषय है।

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मुजफ्फरपुर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
भागवत कथा के इस आयोजन में तीसरे दिन भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और बच्चे सभी वर्गों के लोग भारी गर्मी के बावजूद उत्साहपूर्वक कथा सुनने पहुंचे।

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