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Bihar: बिहार का यह सेंट्रल जेल लिख रहा अनोखी इबारत, स्मार्ट क्लास में कैदी कर रहे प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी

Wed, 15 Jan 2025 03:22 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Wed, 15 Jan 2025 03:22 PM IST
सार

Khudiram Bose Central Jail: जेल अधीक्षक बृजेश सिंह मेहता ने कहा कि हम लगातार कैदियों के सुधार और बेहतरी के लिए प्रयासरत हैं। स्मार्ट क्लास की शुरुआत से कैदियों को नई राह मिल रही है। हमारी कोशिश है कि जेल से निकलने के बाद वे एक बेहतर जिंदगी जी सकें।

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Muzaffarpur: Prisoners are preparing for competitive exams through smart classes in Khudiram Bose Central Jail
केंद्रीय कारा की स्मार्ट क्लास में पढ़ाई करते कैदी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुजफ्फरपुर का अमर शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय कारा अब केवल कैदियों की सजा काटने का स्थान नहीं रह गया है। यह जेल एक ऐसी अनोखी पहल का गवाह बन रहा है, जहां कैदी न केवल आत्मनिर्भर बनने की ओर बढ़ रहे हैं, बल्कि पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर अपनी जिंदगी को एक नई दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं।

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स्मार्ट क्लास से सजे जेल के क्लासरूम
जेल प्रशासन ने कैदियों को शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए जेल के अंदर ही एक स्मार्ट क्लासरूम तैयार किया है। इस क्लासरूम में बड़े LED स्क्रीन, डेस्क और बेंच लगाकर आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। यहां 18 कैदी बीपीएससी, दारोगा, सिपाही, एसएससी और रेलवे जैसी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
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स्मार्ट क्लासरूम में कैदियों को पढ़ाने के लिए दो तकनीकी रूप से दक्ष शिक्षक नियुक्त किए गए हैं। ये शिक्षक देशभर के चर्चित शिक्षकों के ऑनलाइन वीडियो डाउनलोड कर, उन्हें एलईडी स्क्रीन के जरिए कैदियों को दिखाते हैं। इसके साथ ही कैदियों को आने वाली किसी भी शंका का समाधान कक्षा में ही दिया जाता है।
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एनआईओएस और इग्नू से पढ़ाई का भी अवसर
प्रतियोगी परीक्षाओं के अलावा, 200 से अधिक कैदी राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) से शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इन पाठ्यक्रमों में गणित, भौतिकी, रसायन शास्त्र और अंग्रेजी जैसे विषय शामिल हैं। स्मार्ट क्लास के माध्यम से बंदियों को ये विषय पढ़ाए जा रहे हैं, जिससे उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है।
 
सरकारी नौकरी की ओर बढ़ते कदम
जेल अधीक्षक बृजेश सिंह मेहता ने जानकारी दी कि वर्ष 2024 में जेल में पढ़ाई और तैयारी करने वाले तीन कैदियों ने सरकारी नौकरी हासिल की है। यह उपलब्धि न केवल जेल प्रशासन के प्रयासों को दर्शाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि शिक्षा से कोई भी बदलाव संभव है।


 
कैदियों की बदलती जिंदगी का उदाहरण
जेल प्रशासन की इस पहल से कैदियों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। जहां कुछ साल पहले तक जेल केवल सजा का प्रतीक था, वहीं अब यह शिक्षा और सुधार का केंद्र बन चुका है। कैदियों का कहना है कि इस प्रयास ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है।

 
जेल अधीक्षक बृजेश सिंह मेहता ने कहा कि हम लगातार कैदियों के सुधार और बेहतरी के लिए प्रयासरत हैं। स्मार्ट क्लास की शुरुआत से कैदियों को नई राह मिल रही है। हमारी कोशिश है कि जेल से निकलने के बाद वे एक बेहतर जिंदगी जी सकें।

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