देखा न सुना कभी: पहले जमीन की रजिस्ट्री करो, तब होगा अंतिम संस्कार; पंचायत ने क्यों रखी ऐसी शर्त?
Muzaffarpur News: सीतामढ़ी के सुरसंड थाना क्षेत्र में करंट से किसान की मौत के बाद इंसानियत शर्मसार हो गई। मुआवजे में चार कट्ठा जमीन की रजिस्ट्री होने तक शव तीन दिन फ्रीजर में रखा गया। सौदा पूरा होने के बाद ही मृतक का अंतिम संस्कार किया गया।
विस्तार
सीतामढ़ी जिले के सुरसंड थाना क्षेत्र के मलाही गांव में इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां करंट लगने से किसान की मौत के बाद उसका शव तीन दिनों तक फ्रीजर में रखा गया, क्योंकि पंचायत ने मुआवजे के रूप में तय चार कट्ठा जमीन की रजिस्ट्री को अंतिम संस्कार की शर्त बना दिया था। एक तरफ घर में मातम पसरा था, परिजन रो-रो कर बेहाल थे, तो दूसरी तरफ कागजी कार्रवाई पूरी होने का इंतजार चल रहा था। इस घटना ने ग्रामीण समाज में पंचायत व्यवस्था, कानून और मानवीय संवेदना तीनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
खेत में करंट से गई जान
यह दर्दनाक हादसा 20 जनवरी को हुआ। मलाही गांव निवासी किसान नईम अंसारी (55) अपने खेत में गेहूं की पटवन कर रहे थे। इसी दौरान बगल के खेत में लगे नंगे बिजली के तार की चपेट में आ गए, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। बताया गया कि यह तार पास के खेत, जहां केला का बागान है, में मवेशियों से फसल बचाने के लिए लगाया गया था। जिस खेत में करंट प्रवाहित था, वह गांव के रत्नेश सिंह का है। घटना के बाद गांव में कोहराम मच गया और परिजन गहरे सदमे में चले गए।
पंचायत का फरमान- पहले जमीन, फिर संस्कार
मौत के बाद गांव में तत्काल पंचायत बुलाई गई। पंचों ने विचार-विमर्श के बाद फैसला सुनाया कि खेत मालिक रत्नेश सिंह मृतक के परिजनों को मुआवजे के तौर पर चार कट्ठा जमीन देंगे। दोनों पक्ष इस पर सहमत भी हो गए, लेकिन पंचायत ने यह भी तय कर दिया कि जब तक जमीन की रजिस्ट्री नहीं हो जाती, तब तक शव का अंतिम संस्कार नहीं होगा। पंचायत के इस फैसले के बाद सुरसंड से फ्रीजर मंगवाया गया और नईम अंसारी का शव उसमें सुरक्षित रखा गया। तीन दिनों तक शव फ्रीजर में पड़ा रहा, जबकि परिजन इंसाफ और इंसानियत के बीच झूलते रहे।
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तीन दिन बाद रजिस्ट्री, फिर अंतिम विदाई
22 जनवरी को परिहार निबंधन कार्यालय में रत्नेश सिंह ने मृतक के परिजनों के नाम चार कट्ठा जमीन की रजिस्ट्री कराई। जैसे ही कागजात पूरे हुए, फ्रीजर से शव निकाला गया और नईम अंसारी को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। हालांकि, गांव के कुछ लोगों ने यह तर्क दिया कि मृतक के चार बेटे बाहर रहते हैं और उनके आने के इंतजार में शव को सुरक्षित रखा गया था, लेकिन गांव में हर कोई जानता है कि असली वजह पंचायत का फैसला और जमीन की रजिस्ट्री थी।
पुलिस पहुंची, लेकिन लौटना पड़ा बैरंग
घटना की सूचना मिलने पर सुरसंड थाने की पुलिस टीम पीटीसी मुकेश कुमार के नेतृत्व में मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में ले लिया। पुलिस ने पोस्टमार्टम कराने की प्रक्रिया शुरू करनी चाही, लेकिन परिजनों ने पंचायत के आपसी समझौते का हवाला देते हुए इससे इनकार कर दिया। न तो किसी पक्ष ने लिखित आवेदन दिया और न ही कोई शिकायत दर्ज कराई गई। ऐसे में पुलिस को शव परिजनों के हवाले कर बैरंग लौटना पड़ा।
प्रशासन और पंचायत के बयान
घटना को लेकर मुखिया प्रतिनिधि सह पूर्व मुखिया वीरेन्द्र प्रसाद ठाकुर ने कहा कि पंचायत में मुआवजे के तौर पर चार कट्ठा जमीन देने का निर्णय हुआ था, जिसे गुरुवार को रजिस्ट्री कर दिया गया। इसके बाद शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया और अब गांव में माहौल सामान्य है। वहीं, सुरसंड थानाध्यक्ष लालकिशोर गुप्ता ने बताया कि पुलिस मौके पर गई थी, लेकिन परिजनों ने आपसी समझौते से मामला सुलझाने की बात कही और पोस्टमार्टम से इनकार कर दिया। किसी भी पक्ष की ओर से थाने में कोई लिखित आवेदन नहीं दिया गया है।