Bihar: किसानों के पैसे पर डाका, हनुमान शुगर मिल के जमीनों की हो रही सौदेबाजी, जानिए पूरा मामला
Bihar: मोतिहारी की बंद पड़ी हनुमान शुगर मिल एक बार फिर विवादों में है, जहां किसानों और कर्मचारियों के बकाया भुगतान के बजाय मिल की जमीन की बिक्री को लेकर आक्रोश बढ़ गया है। कोर्ट के आदेश और जमीन बिक्री को लेकर चल रहे विरोध के बीच प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। वर्षों से बकाया भुगतान की मांग कर रहे पीड़ितों को अब भी न्याय का इंतजार है।
विस्तार
पूर्वी चंपारण के मोतिहारी स्थित बंद पड़ी हनुमान शुगर मिल एक बार फिर विवादों में घिर गई है। मिल की जमीन की बिक्री शुरू होने के बाद कर्मचारियों और किसानों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। उनका आरोप है कि करोड़ों रुपये बकाया होने के बावजूद उनके भुगतान के बजाय मिल की संपत्तियों की सौदेबाजी की जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
हनुमान शुगर मिल के संचालन के दौरान इसकी जिम्मेदारी हर्षवर्धन बहेती और उनके पिता हीरालाल बहेती के पास थी, जो रामाकास्ट सिस्टर कंसर्न के माध्यम से मिल का संचालन करते थे। आरोप है कि मिल से हुई आय से हर्षवर्धन बहेती ने अपने नाम और फर्म के नाम पर बड़ी मात्रा में जमीन खरीदी। मिल के बंद होने के बाद से ही कर्मचारियों और किसानों का करोड़ों रुपये बकाया है, जिसे लेकर लंबे समय से आंदोलन जारी है।
आंदोलन और दर्दनाक घटना
बकाया भुगतान की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे कर्मचारियों के बीच 10 अप्रैल 2017 को एक दर्दनाक घटना घटी थी, जब यूनियन के महासचिव नरेश श्रीवास्तव और संयुक्त सचिव सूरज बैठा ने आत्मदाह कर लिया था। इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था।
हाईकोर्ट का आदेश और नया विवाद
हाल ही में उच्च न्यायालय ने केस संख्या 13711/2024 (बिहार सरकार बनाम हर्षवर्धन बहेती) में फैसला सुनाते हुए हर्षवर्धन बहेती को जमीन की रजिस्ट्री करने की अनुमति दी और प्रशासन को इसमें बाधा न डालने का निर्देश दिया। लेकिन यहीं से नया विवाद शुरू हो गया है।
आदेश किसी को, बिक्री कोई और कर रहा
हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद उज्ज्वल ने बताया कि कोर्ट का आदेश हर्षवर्धन बहेती के पक्ष में है, लेकिन रामाकास्ट लिमिटेड (रामा इंजीनियरिंग वर्क्स, मोतिहारी) के डायरेक्टर नवरत्न सेवक द्वारा बिक्री की जा रही है, जो गलत है।
इससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं
- जब आदेश बहेती के नाम है, तो बिक्री कोई और कैसे कर रहा है?
- क्या यह नियमों का उल्लंघन है?
- प्रशासन इस पर चुप क्यों है?
- सबसे बड़ा सवाल: किसानों का पैसा कौन देगा?
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना हे कि इस पूरे मामले में प्रशासन की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। स्पष्ट न्यायालय आदेश के बावजूद यदि नियमों का उल्लंघन हो रहा है, तो जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की जा रही है? इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का बयान
इस संदर्भ में राजद के जिला प्रवक्ता सह गोड़वा पंचायत के मुखिया राजू बैठा ने बताया कि माननीय न्यायालय ने हर्षवर्धन बहेती को निजी जमीन बेचने का आदेश दिया है, न कि चीनी मिल की जमीन बेचने का। यह सरासर गलत है और इसकी जांच होनी चाहिए। वहीं, राजद के पूर्व विधायक राजेंद्र राम ने कहा कि बिहार में अंधी और बहरी सरकार है, जिसे न किसानों की चिंता है और न मजदूरों की। जिस चीनी मिल पर किसानों का करोड़ों रुपये बकाया है, उसी से जुड़े मामले में दो किसानों ने आत्मदाह तक कर लिया, और अब उसी जमीन को रोक सूची से मुक्त कर दिया गया है, जो सरासर गलत है। पूरे मामले की जांच होनी चाहिए कि आखिर यह फैसला किसके दबाव में लिया गया है, अन्यथा एक बार फिर आंदोलन किया जाएगा। वहीं इस संदर्भ में मोतिहारी के अपर समाहर्ता मुकेश कुमार सिन्हा ने बताया कि यह सारी प्रक्रिया माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार की जा रही है।
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अब आगे क्या?
फिलहाल निगाहें सरकार और संबंधित विभागों पर टिकी हैं। देखना यह होगा कि क्या इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई होती है और क्या लंबे समय से इंतजार कर रहे किसानों और कर्मचारियों को उनका हक मिल पाता है।
इनपुट: (राजीव रंजन, पूर्वी चंपारण)
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