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Bihar : 4900 करोड़ वाला सिक्स लेन पुल हो रहा तैयार; कब से चलेंगी कच्ची दरगाह-बिदुपुर के नए रास्ते पर गाड़ियां?
Wed, 13 May 2026 09:52 AM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वैशाली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वैशाली
Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो
Updated Wed, 13 May 2026 09:52 AM IST
सार
कच्ची दरगाह-बिदुपुर सिक्स लेन पुल का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच गया है। जून 2026 तक इसके शुरू होने की उम्मीद है। करीब 4988 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह पुल उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच आवागमन आसान करेगा और गांधी सेतु पर दबाव कम करेगा।
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कच्ची दरगाह बिदुपुर पुल
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित कच्ची दरगाह-बिदुपुर सिक्स लेन पुल परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। गंगा नदी पर बन रहा यह आधुनिक महासेतु जून 2026 के अंत तक शुरू होने की संभावना है। पुल के चालू होने के बाद पटना, बिदुपुर और राघोपुर के बीच आवागमन पहले से कहीं अधिक आसान और तेज हो जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार निर्माण कार्य तेजी से पूरा किया जा रहा है। हाल ही में पाया संख्या-61 पर अंतिम सेगमेंट सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है, जिसके बाद अब फिनिशिंग कार्य जारी है। उम्मीद जताई जा रही है कि जून के अंतिम सप्ताह तक बिदुपुर की ओर से वाहनों का परिचालन शुरू कर दिया जाएगा।
गांधी सेतु और जेपी सेतु पर कम होगा दबाव
इस सिक्स लेन पुल के शुरू होने से गांधी सेतु और जेपी सेतु पर वाहनों का दबाव काफी हद तक कम होने की उम्मीद है। यह परियोजना उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार के बीच एक मजबूत और वैकल्पिक संपर्क मार्ग के रूप में उभरेगी। इससे वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा और मधुबनी जाने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।
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4988 करोड़ की लागत से बन रहा आधुनिक पुल
करीब 4988.4 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस पुल का निर्माण अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार किया जा रहा है। एलएंडटी और कोरियाई कंपनी देबू जाइंट वेंचर संयुक्त रूप से इसका निर्माण कर रही हैं। पुल का डिजाइन कोरियाई विशेषज्ञों द्वारा तैयार किया गया है। पूरे प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 22.76 किलोमीटर है, जिसमें मुख्य पुल की लंबाई 9.76 किलोमीटर और पहुंच पथ की लंबाई 13 किलोमीटर है। यह महासेतु कुल 67 पायों पर आधारित है।
ये भी पढ़ें- Bihar: आरजेडी सांसद की गाड़ी पर हमला, हमलावरों ने पीए व चालक को बेरहमी से पीटा; शादी से लौटते वक्त हुई घटना
आधुनिक तकनीक से तैयार हो रहा पुल
तकनीकी दृष्टि से यह पुल देश के आधुनिकतम ढांचों में शामिल होगा। इसे एक्स्ट्रा डोज्ड केबल स्टे डिजाइन पर बनाया जा रहा है, जिससे इसकी मजबूती और स्थायित्व बढ़ेगा। पुल की चौड़ाई 32 मीटर रखी गई है और इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि वाहन 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गुजर सकें।
एशियन डेवलपमेंट बैंक से मिला वित्तीय सहयोग
परियोजना के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक से लगभग 3000 करोड़ रुपये का ऋण लिया गया है, जबकि करीब 2000 करोड़ रुपये राज्य सरकार खर्च कर रही है। इस महासेतु का शिलान्यास 31 जनवरी 2016 को किया गया था। बीते 9 दिसंबर 2025 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने निर्माण स्थल का निरीक्षण कर एजेंसी को गुणवत्ता के साथ समय पर कार्य पूरा करने का निर्देश दिया था।
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अधिकारियों के अनुसार निर्माण कार्य तेजी से पूरा किया जा रहा है। हाल ही में पाया संख्या-61 पर अंतिम सेगमेंट सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है, जिसके बाद अब फिनिशिंग कार्य जारी है। उम्मीद जताई जा रही है कि जून के अंतिम सप्ताह तक बिदुपुर की ओर से वाहनों का परिचालन शुरू कर दिया जाएगा।
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गांधी सेतु और जेपी सेतु पर कम होगा दबाव
इस सिक्स लेन पुल के शुरू होने से गांधी सेतु और जेपी सेतु पर वाहनों का दबाव काफी हद तक कम होने की उम्मीद है। यह परियोजना उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार के बीच एक मजबूत और वैकल्पिक संपर्क मार्ग के रूप में उभरेगी। इससे वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा और मधुबनी जाने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।
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4988 करोड़ की लागत से बन रहा आधुनिक पुल
करीब 4988.4 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस पुल का निर्माण अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार किया जा रहा है। एलएंडटी और कोरियाई कंपनी देबू जाइंट वेंचर संयुक्त रूप से इसका निर्माण कर रही हैं। पुल का डिजाइन कोरियाई विशेषज्ञों द्वारा तैयार किया गया है। पूरे प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 22.76 किलोमीटर है, जिसमें मुख्य पुल की लंबाई 9.76 किलोमीटर और पहुंच पथ की लंबाई 13 किलोमीटर है। यह महासेतु कुल 67 पायों पर आधारित है।
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आधुनिक तकनीक से तैयार हो रहा पुल
तकनीकी दृष्टि से यह पुल देश के आधुनिकतम ढांचों में शामिल होगा। इसे एक्स्ट्रा डोज्ड केबल स्टे डिजाइन पर बनाया जा रहा है, जिससे इसकी मजबूती और स्थायित्व बढ़ेगा। पुल की चौड़ाई 32 मीटर रखी गई है और इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि वाहन 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गुजर सकें।
एशियन डेवलपमेंट बैंक से मिला वित्तीय सहयोग
परियोजना के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक से लगभग 3000 करोड़ रुपये का ऋण लिया गया है, जबकि करीब 2000 करोड़ रुपये राज्य सरकार खर्च कर रही है। इस महासेतु का शिलान्यास 31 जनवरी 2016 को किया गया था। बीते 9 दिसंबर 2025 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने निर्माण स्थल का निरीक्षण कर एजेंसी को गुणवत्ता के साथ समय पर कार्य पूरा करने का निर्देश दिया था।