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Bihar News: सीएम के एलान को दरकिनार कर कैसे बेचने दी जमीन? डीएम से पूछा सवाल तो गुस्से में किया ऐसा

Thu, 22 Jan 2026 08:35 PM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पूर्वी चंपारण
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पूर्वी चंपारण Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो Updated Thu, 22 Jan 2026 08:35 PM IST
सार

Bihar News: चकिया चीनी मिल को दोबारा शुरू करने का वादा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने समृद्धि यात्रा के दौरान किया था, लेकिन उससे तीन दिन पहले ही मिल की जमीन की बिक्री शुरू कर दी गई। इस मामले को अमर उजाला ने उजागर किया, जिसके बाद जिला प्रशासन से लेकर पटना तक हलचल मच गई।
 

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How was land allowed to be sold despite the CM announcement When DM questioned he reacted angrily Bihar
तत्कालीन जिलाधिकारी के आदेश, एवं मंच से घोषणा करते मुख्यमंत्री

विस्तार

जिस जमीन पर चीनी मिल को वापस शुरू कराने का सीएम नीतीश कुमार ने समृद्धि यात्रा के दौरान वादा किया, उस जमीन को उनकी पहले से प्रस्तावित यात्रा के तीन दिन पहले बेचना शुरू कर दिया गया। 'अमर उजाला' ने दो दिन पहले, सबसे पहले यह खबर सामने लायी तो पूर्वी चंपारण जिला प्रशासन से लेकर पटना तक हड़कंप मच गया। इसके बाद कल भी हमने उस खबर का पीछा किया। असर यह हुआ कि दूसरे मीडिया घरानों ने भी खबरें लगाईं। समझाना-डराना शुरू हुआ तो कुछ ने कदम पीछे खींच लिए। दूसरी तरफ, कई इस मुहिम में जुट भी गए। खबर को रोकने के लिए हाईकोर्ट के 'किसी' आदेश के तहत जमीन बेचे जाने की बात कही गई, लेकिन उस आदेश की प्रति देने के लिए कहीं से कोई तैयार नहीं। 'अमर उजाला' ने यह मांगने के लिए पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी को एक बार फिर टोका तो समाचार प्रतिनिधि का मोबाइल नंबर ब्लॉक करते हुए उन्होंने सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के व्हाट्सएप ग्रुप से भी रिमूव कर दिया।
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सीएम सचिवालय को भी नहीं दी आदेश की जानकारी
जिला प्रशासन की ओर से 'अमर उजाला' यह जानना चाह रहा है कोर्ट के किस आदेश के तहत जिलाधिकारी ने चकिया चीनी मिल की जमीन बेचने के लिए अनापत्ति-निर्देश जारी किया? इस बारे में डीएम या किसी पदाधिकारी का आधिकारिक बयान सामने अभी तक नहीं आया है। अब तक कोर्ट के जो कागजात सामने आ रहे, वह बता रहे कि इस जमीन को बेचने पर रोक है। चीनी मिल के कबाड़ को भी निविदा के जरिए बेचने की बात जरूर है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पहले से प्रस्तावित दौरे के बावजूद मुख्य सचिव या गन्ना उद्योग विभाग की ओर से सीएम सचिवालय को इसकी जानकारी नहीं दी गई। अगर सीएम सचिवालय को जानकारी दी जाती तो निश्चित तौर पर मुख्यमंत्री बारा चकिया चीनी मिल को फिर से शुरू करने की बात नहीं कहते।
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कोर्ट के उपलब्ध दस्तावेजों में यह सब लिखा है
राज्य बनाम मेसर्स बैद्यनाथ शुगर मिल प्राइवेट लिमिटेड के एलपीए (संख्या 1525/12) में दिनांक 9 जनवरी 2018 को पटना हाई कोर्ट ने जो आदेश पारित किया था, वह कुछ और कहता है। इसमें कहा गया है कि 4 फरवरी 2012 को पूर्वी चंपारण के तत्कालीन जिला दंडाधिकारी न्यायालय के आदेश और 12 जुलाई 2011 को अपर जिला दंडाधिकारी न्यायालय से पारित आदेश रद्द किया जाता है। उन दोनों आदेशों को रद्द करते हुए नए सिरे से भू-हदबन्दी करने को कहा गया था। इसका जिक्र तत्कालीन जिलाधिकारी ने 25 मई 2018 को अपनी कार्यवाही में भी लिखा था। उसी दिन विष्णु कांत गुप्ता को नोटिस भी दिया गया था। इसके बाद, कोर्ट का कोई आदेश नहीं दिखता है। किसी के पास इस बात का जवाब नहीं है कि आखिर किस प्रावधान के तहत पूर्वी चंपारण के डीएम सौरभ जोरवाल ने करीब 60 एकड़ जमीन को सीलिंग से मुक्त कर दिया और सूची बनाकर जिला निबंधन कार्यालय को भेज दी, ताकि चीनी मिल की जमीन की बिक्री का रास्ता खुल जाए। सवाल अब भी वही है कि अगर ऐसा कोई आदेश था तो उससे सीएम को अवगत क्यों नहीं कराया गया कि उन्होंने मिल को दोबारा शुरू होने की बात कही। उन्हें यह भी नहीं बताया गया कि उनकी यात्रा के तीन दिन पहले 14 जनवरी से उसकी जमीन बिकनी शुरू हो चुकी है।
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सीएम की साख पर सवाल, डीएम का रुख देखें
डीएम के आदेश पर ही 14 जनवरी से चकिया चीनी मिल की जमीन बिकनी शुरू हुई। दो दिन से प्रकाशित हो रही खबर के पहले भी 'अमर उजाला' ने उनसे संपर्क कर पक्ष लेने का प्रयास किया था। तब भी जवाब नहीं मिला था। अब इस तीसरी खबर के पहले जब डीएम सौरभ जोरवाल से सवाल किया कि क्या 2012 वाले मामले में वर्ष 2018 के बाद फिर हाई कोर्ट से कोई नया आदेश आया है? तो, सवाल का जवाब देने की बजाय डीएम ने सवाल पूछने वाले नंबर को न केवल ब्लॉक किया, बल्कि सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के नाम पर बने व्हाट्सएप ग्रुप से भी वह नंबर रिमूव कर दिया। वह भी खुद। यह हालत तब है, जब राज्य की नीतीश कुमार सरकार ने सीधे तौर पर सभी अधिकारियों को जनता के सवालों का जवाब देने और उसकी समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी नंबर दे रखा है और सरकारी विभाग की ओर से ही व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर संवाद-समन्वय की व्यवस्था रखी गई है। मामला सीएम की साख और आमजन के सवालों का है, इसलिए कल हमने इस संबंध में गन्ना उद्योग मंत्री संजय पासवान का भी रुख सामने लाया था।
 
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