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Lok Sabha: कन्हैया बोले- राम के नाम पर नाथूराम का एजेंडा फैला रही BJP, राम की अवधारणा में नफरत की जगह नहीं

Sat, 06 Apr 2024 08:56 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेगूसराय/नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेगूसराय/नई दिल्ली Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Sat, 06 Apr 2024 08:56 PM IST
सार

Lok Sabha Chunav 2024: कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने एक इंटरव्यू में राम मंदिर की लहर, परिवारवाद और वंशवाद की राजनीति तथा व्यक्तिवाद पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है। उन्होंने इंडिया गठबंधन को लेकर भी खुले मन से बात की। पढ़ें पूरी रिपोर्ट...।

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Lok Sabha Chunav 2024: Cong's Kanhaiya Kumar says BJP spreading agenda of Nathuram by taking name of Ram
कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने शनिवार को कहा कि राम के नाम पर सत्तारूढ़ भाजपा नाथूराम के सांप्रदायिक एजेंडे को फैला रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि व्यक्तिवाद (इंडीविजुअलिज्म) परिवारवाद (वंशवादी राजनीति) से अधिक खतरनाक है। उन्होंने यह भी कहा कि गांधी-नेहरू परिवार के योगदान को कमतर करने का प्रयास किया गया है। कुमार ने दावा किया कि भाजपा हिंदू धर्म की महानता को कम करने का प्रयास कर रही है। राम की अवधारणा में किसी के प्रति नफरत की कोई गुंजाइश नहीं है। यह बात कांग्रेस नेता ने एक इंटरव्यू में कही।

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‘हिंदू धर्म में आस्था रखने वालों को दिया जा रहा धोखा’
कई लोग अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर मानते हैं कि एक लहर चल रही है जिससे लोकसभा चुनाव में भाजपा को फायदा हो सकता है। कांग्रेस और इंडिया गठबंधन इससे कैसे निपटेंगा। इसके जवाब में कन्हैया कुमार ने कहा कि कांग्रेस को इससे निपटने की क्या जरूरत है। अगर देश में भगवान राम की लहर है तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। अगर देश में 'नाथूराम (महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे का संदर्भ)' की लहर होती तो यह गलत होता।
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उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि भाजपा जो प्रचार कर रही है, उसमें उसकी कोई भूमिका नहीं है। राम जी त्रेता युग में थे, भाजपा का गठन 1980 में हुआ था। भाजपा इस काम में लगी हुई है कि राम को मानने वाले लोगों को कैसे धोखा दिया जाए। इसलिए राम का नाम ( नाम तो लिया जाता है लेकिन काम नाथूराम का किया जाता है। इस खेल से बीजेपी को फायदा होता है। उन्होंने कहा कि यह देश के इतिहास, संस्कृति और आने वाली पीढ़ी के भविष्य के खिलाफ है।
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‘राम नाम त्रेता से है, भाजपा के अंत के बाद भी रहेगा’
कुमार ने आगे कहा कि राम की अवधारणा देश में उनके नाम पर रखे गए लोगों और स्थानों के साथ जुड़ी हुई है। आप उसे एक स्थान तक सीमित नहीं कर सकते। अन्य धर्मों में एक विशेष स्थान बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन हिंदू धर्म में सभी स्थान महत्वपूर्ण हैं और सभी देवता महत्वपूर्ण हैं। राम उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने शिव, विष्णु और ब्रह्मा। इसलिए हिंदू धर्म अन्य धर्म से अलग है।
 
कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने भाजपा की आलोचना करते हुए कहा कि हुआ यह है कि राजनीतिक लाभ के लिए हिंदू धर्म में आस्था रखने वालों को धोखा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि धर्म की महानता को कम करने की कोशिश की जा रही है। राम जी की अवधारणा में किसी के प्रति नफरत की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने कहा कि पूरी रामायण जीवन जीने के तरीके के बारे में है और बताती है कि क्या नैतिक है और क्या अनैतिक है। उन्होंने कहा कि राम और रामायण सिर्फ एक रूप में नहीं, बल्कि कई रूपों में हैं।
 
कुमार ने आरोप लगाया कि अगर आप रामायण की बात करते हैं, तो तुलसीदास जी की रामायण और वाल्मिकी की रामायण है। ऐसी कई कथाएं हैं जिनसे हमारी अलग है, इस देश में सैकड़ों अन्य रामायण हैं। इस देश की संस्कृति और इतिहास राम से जुड़ा हुआ है। एकमात्र चिंता की बात यह है कि राम का नाम लेकर नाथूराम की सांप्रदायिकता और पहचान के आधार पर विभाजन को एक राजनीतिक चाल के रूप में फैलाया जा रहा है, जो खतरनाक है। कुमार ने कहा कि राम का नाम त्रेता युग से है, यह भाजपा के जन्म से पहले से है और यह भाजपा के अंत तक जारी रहेगा।
 
‘कांग्रेस का परिवारवाद गलत और भाजपा का सही कैसे’
कांग्रेस के वंशवादी पार्टी होने के आरोपों पर कांग्रेस नेता ने कहा कि इस तरह के बयान में पूर्वाग्रह निहित है। उन्होंने कहा कि यह एक पूर्वाग्रह है और एक विशेष परिवार की पृष्ठभूमि का उपहास करने की जानबूझकर की गई कोशिश है। कन्हैया ने कहा कि कांग्रेस पर लगे 'परिवारवाद' के आरोप पर मैं पूछना चाहता हूं कि क्या यह सिर्फ गांधी-नेहरू 'परिवार' तक ही सीमित है या यह अन्य नेताओं पर भी लागू होता है? अगर यह अन्य नेताओं पर भी लागू होता है तो मेरा सीधा सवाल है कि जब तक ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस में थे, तब तक वह 'परिवारवादी' थे। लेकिन जैसे ही वह भाजपा में चले गए, वह 'राष्ट्रवादी, समाजवादी और संघवादी' हो गए?
 
कुमार ने कहा कि चाहे वह कोई भी क्षेत्र हो, व्यापार से लेकर फिल्म उद्योग से लेकर शिक्षा जगत तक (यह वहां है), इसलिए या तो हम सभी 'परिवारवादी' हैं या अगर यह गलत है, तो यह सभी के लिए गलत होना चाहिए। ऐसा नहीं हो सकता कि कांग्रेस का परिवारवाद गलत है और भाजपा का सही है। उन्होंने भाजपा नेताओं रविशंकर प्रसाद, पीयूष गोयल, अनुराग ठाकुर और बीसीसीआई सचिव जय शाह का उदाहरण देते हुए बताया कि उनके पिता राजनीति में रहे हैं या हैं, यह वंशवाद के समान है। उन्होंने कहा कि दो प्रधानमंत्रियों इंदिरा गांधी और राजीव गांधी द्वारा देश के लिए अपनी जान देने के बावजूद नेहरू-गांधी परिवार के योगदान को कम करके आंका जा रहा है।
 
उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि इस दिन और युग में जब लोग रात में कांग्रेस के लिए रीट्वीट करते हैं और अगली सुबह पाला बदल लेते हैं। दो प्रधानमंत्रियों ने अपनी जान दे दी। नेहरू को 15 साल तक जेल में रहने की क्या जरूरत थी, वह मोतीलाल नेहरू के बेटे थे। इसलिए उस परिवार के बलिदान और योगदान को कम कर दिया गया है।

 
‘व्यक्तिवाद, परिवारवाद से भी ज्यादा खतरनाक है’
इसके साथ ही कुमार ने तर्क दिया कि 'व्यक्तिवाद' 'परिवारवाद' से अधिक खतरनाक है। उन्होंने कहा कि मोदी जी ने फैसला किया कि शिवराज सिंह चौहान सीएम नहीं होंगे, (हरियाणा के पूर्व सीएम) खट्टर साहब सीएम के रूप में सोए और जागने पर पता चला कि वह अब सीएम नहीं रहे...ये फैसले कहां लिए जा रहे हैं? यह परिवारवाद से भी बदतर है। व्यक्तिवाद अधिक खतरनाक है, क्योंकि सभी निर्णय एक ही व्यक्ति लेता है।

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