बिहार: रेलवे ने बंद किया बरौनी का पुराना माल गोदाम, 16 महीने में कमाए थे 36 करोड़; अब रोजगार का क्या होगा?
बेगूसराय के बरौनी में करीब 66 वर्षों से संचालित माल गोदाम को 31 अगस्त से अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है। रेलवे ने फ्रेट कॉरिडोर के तहत बरौनी जंक्शन के विस्तार, शंटिंग नेक और नई स्टेबलिंग लाइन के निर्माण के चलते नई माल बुकिंग पर रोक लगाई है।
विस्तार
बेगूसराय जिले में रेलवे से जुड़ी छह दशक से अधिक पुरानी कारोबारी व्यवस्था पर फिलहाल विराम लग गया है। करीब 66 वर्षों से संचालित बरौनी माल गोदाम को 31 अगस्त से अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है। रेलवे ने यहां नई माल बुकिंग पर पूरी तरह रोक लगा दी है। खास बात यह है कि बंद होने से पहले महज 16 महीनों में इस माल गोदाम के जरिए रेलवे को करीब 36 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। माल गोदाम के बंद होने का असर केवल माल ढुलाई तक सीमित रहने की आशंका नहीं है, बल्कि इससे जुड़े मजदूरों, ट्रक संचालकों, चालकों, खलासियों, ट्रांसपोर्टरों और कारोबारियों के सामने रोजगार और कारोबार का संकट भी खड़ा हो सकता है।
स्टेशन विस्तार के चलते लिया गया फैसला
रेलवे के अनुसार, बरौनी जंक्शन पर फ्रेट कॉरिडोर के तहत स्टेशन विस्तार का काम प्रस्तावित है। इसके अलावा स्टेशन के दक्षिणी हिस्से में शंटिंग नेक और नई स्टेबलिंग लाइन का निर्माण भी किया जाना है। इसी निर्माण कार्य को देखते हुए बरौनी माल गोदाम में नई माल बुकिंग पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है। रेलवे के इस फैसले को भविष्य में होने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, दूसरी ओर इससे माल ढुलाई से जुड़े स्थानीय कारोबार पर तत्काल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
करीब 1959 में शुरू हुआ था बरौनी माल गोदाम
जानकारों के मुताबिक, बरौनी गुड्स शेड की शुरुआत करीब वर्ष 1959 में हुई थी। पिछले छह दशकों से अधिक समय में यह क्षेत्र की औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों का अहम हिस्सा बन गया। देश के अलग-अलग राज्यों से मालगाड़ियों के जरिए खाद्य सामग्री समेत विभिन्न प्रकार के सामान यहां पहुंचते रहे हैं। माल की लोडिंग और अनलोडिंग की प्रक्रिया से बड़ी संख्या में लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता रहा। समय के साथ बरौनी माल गोदाम के आसपास ट्रांसपोर्ट और माल ढुलाई से जुड़ा एक बड़ा स्थानीय कारोबार भी विकसित हो गया।
16 महीने में रेलवे को मिला करीब 36 करोड़ का राजस्व
बरौनी माल गोदाम से रेलवे को होने वाली आय इसके महत्व को समझने के लिए पर्याप्त है। रेलवे से जुड़े जानकारों के मुताबिक, अप्रैल 2025 से जुलाई 2026 के बीच यहां 100 से अधिक रेल रैक के जरिए करीब 2.70 लाख मीट्रिक टन माल पहुंचा।
इस तरह करीब 16 महीनों की अवधि में बरौनी माल गोदाम के माध्यम से रेलवे को कुल लगभग 36 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।
मजदूरों से लेकर ट्रांसपोर्ट कारोबार तक पड़ेगा असर
माल गोदाम के बंद होने का सबसे सीधा असर वहां काम करने वाले मजदूरों पर पड़ने की आशंका है। लोडिंग-अनलोडिंग से जुड़े श्रमिकों के अलावा सैकड़ों ट्रक संचालक, चालक, खलासी और ट्रांसपोर्टर भी लंबे समय से इस व्यवस्था पर निर्भर रहे हैं।
नई माल बुकिंग बंद होने से माल की आवाजाही प्रभावित होगी। इसका असर ट्रांसपोर्ट और इससे जुड़े छोटे-बड़े कारोबार पर भी पड़ सकता है। स्थानीय अर्थव्यवस्था में माल ढुलाई की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए माल गोदाम के बंद होने का असर केवल परिसर तक सीमित रहने की बजाय आसपास की व्यापारिक गतिविधियों पर भी पड़ने की संभावना है।
विकास कार्य और स्थानीय रोजगार के बीच चुनौती
बरौनी जंक्शन का विस्तार, नई रेल लाइन और परिचालन सुविधाओं का निर्माण रेलवे के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना है। लेकिन इसके साथ ही दशकों से इस माल गोदाम पर निर्भर लोगों के रोजगार और कारोबार का सवाल भी खड़ा हो गया है। करीब 66 साल पुरानी व्यवस्था के बंद होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद बरौनी माल गोदाम का भविष्य क्या होगा और इससे जुड़े लोगों के रोजगार को लेकर रेलवे की क्या योजना है।
फिलहाल रेलवे ने 31 अगस्त से अगले आदेश तक नई माल बुकिंग पर रोक लगा दी है। ऐसे में बरौनी के व्यापारिक और परिवहन क्षेत्र की नजर अब रेलवे के अगले आदेश और स्टेशन विस्तार की आगामी कार्ययोजना पर टिकी है।